Nakshtra Takकुंडलीराशिफलपंचांगमिलानज्ञानग्रह-फलज्योतिषीStore
📖 व्रत-कथा

🐄 गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

ब्रज में हर साल इंद्र की पूजा होती थी ताकि वर्षा हो। बालक कृष्ण ने नंद बाबा और ब्रजवासियों से कहा — «वर्षा इंद्र नहीं, प्रकृति का नियम देता है; हमें अपना अन्न देने वाले गोवर्धन पर्वत, हमारी गायों और वनों की पूजा करनी चाहिए।» ब्रजवासियों ने उस साल इंद्र की जगह गोवर्धन की पूजा की और छप्पन भोग चढ़ाए।

इंद्र क्रोध से पागल हो गए और ब्रज पर मूसलाधार वर्षा-प्रलय भेज दिया। तब सात वर्ष के कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया; सात दिन-सात रात सारा ब्रज, गायें-बछड़े, ग्वाल-बाल उसके नीचे सुरक्षित रहे। इंद्र का अहंकार टूटा, उन्होंने क्षमा माँगी और कृष्ण को «गोविंद» (गायों के स्वामी) नाम मिला।

सात दिन कृष्ण ने कुछ नहीं खाया — इसलिए आठवें दिन ब्रजवासियों ने उन्हें 56 भोग (आठ पहर × सात दिन) अर्पित किए; यही अन्नकूट है। तभी से हर कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन-पूजा और अन्नकूट की परंपरा चली।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

गोवर्धन-लीला की सीख यह है कि अहंकारी सत्ता (इंद्र) की नहीं, प्रकृति (पर्वत, गाय, वन) की पूजा करो — वही अन्न, जल, छाया देती है। इसीलिए इस दिन गाय-बैल का श्रृंगार और गोबर के गोवर्धन की पूजा है।

अन्नकूट का अर्थ है «अन्न का पर्वत» — नई फ़सल की सब्ज़ियों, अनाज, मिठाइयों से 56 (या जितने बन सकें) व्यंजन बनाकर ठाकुर जी (कृष्ण) को भोग लगाना और फिर सबको प्रसाद बाँटना — यह घर की स्त्रियों की सामूहिक रसोई का सबसे बड़ा दिन है।

इसी दिन बलि-प्रतिपदा (राजा बलि की पूजा) और गुजरात में नया साल (बेस्तु वर्ष) है; कई घरों में दीवाली की अगली सुबह इसी दिन दरिद्र-निकास (सूप बजाना) भी होता है। यदि अमावस्या दोपहर तक चले तो गोवर्धन पूजा एक दिन आगे भी हो सकती है — ऊपर की तिथि पंचांग से है।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोवर्धन पूजा {Y} में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा है — पंचांग-गणना से, दिल्ली की उदया-तिथि पर; अमावस्या अगर दोपहर तक चले तो कुछ पंचांग गोवर्धन-पूजा को अगले दिन रखते हैं — अपने स्थानीय पंचांग से मिला लें।

गोवर्धन पूजा का शुभ समय क्या है?

प्रतिपदा तिथि में सुबह (सूर्योदय के बाद) या अभिजित मुहूर्त में गोवर्धन-पूजा; अन्नकूट का भोग शाम को गोधूलि-बेला में — ऊपर दोनों समय (दिल्ली) दिए हैं।

अन्नकूट में 56 भोग ही क्यों?

कथा के अनुसार कृष्ण ने गोवर्धन उठाए सात दिन में आठ पहर × सात दिन = 56 बार भोजन नहीं किया, इसलिए 56 भोग। घर में जितने बन सकें उतने बनाएँ — भाव मुख्य है, गिनती नहीं।

गोबर न मिले तो गोवर्धन कैसे बनाएँ?

मिट्टी, आटे या गोबर के उपले से भी प्रतीक बना सकते हैं; या गोवर्धन-चित्र/गोवर्धन-शिला (मथुरा से लाई) की पूजा। शहरों में गौशाला से थोड़ा गोबर मिल जाता है।

गोवर्धन पूजा और बलि-प्रतिपदा एक ही दिन क्यों?

दोनों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को हैं — उत्तर-पश्चिम भारत में गोवर्धन-अन्नकूट और महाराष्ट्र-दक्षिण में राजा बलि का धरती पर आगमन; गुजरात में यही नया साल है।

🏠 गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) 2026 — तिथि, मुहूर्त, पूरा पन्ना · सभी व्रत-त्योहार