📖 व्रत-कथा

🌳 करमा / करम पर्व (करमा एकादशी) व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

धर्मा और करमा दो भाई थे — करमा व्यापार के लिए परदेस गया, धर्मा घर पर खेती करता और करम-देवता की पूजा करता। करमा कमाकर लौटा तो देखा घर में करमा-पर्व की तैयारी — सब लोग करम-डाली के चारों ओर नाच रहे, कोई उसकी अगवानी को न आया; क्रोध में करमा ने करम-डाली उखाड़कर नदी में फेंक दी, जावा रौंद दिया। उसी क्षण उसका सब वैभव नष्ट — व्यापार डूबा, घर उजड़ा, रोग-दरिद्रता; पत्नी ने कहा «तुमने करम-देवता का अपमान किया»।

करमा पछताया और करम-देवता की खोज में निकला — रास्ते में सूखे कुएँ, फल-हीन वृक्ष, कोढ़ी, अकेली स्त्री मिलीं — सबने पूछा «करम-देवता से हमारा दुःख भी पूछना»; अंत में नदी में बहती करम-डाली मिली, करमा ने उसे थामकर क्षमा माँगी, विधि से पूजा की — करम-देवता प्रसन्न हुए, वैभव लौटा; लौटते हुए रास्ते के प्रश्नों के उत्तर भी मिले — जिसने दान न किया उसका कुआँ सूखा, जिसने फल न बाँटा वह वृक्ष निष्फल… सीख — कर्म (करम) व करम-देवता का अनादर नहीं, श्रम-दान-श्रद्धा से समृद्धि; इसीलिए करमा पर करम-डाली की पूजा और बहनें भाई के भाग्य के लिए उपवास।

लोक-रूप: कहीं सात भाइयों और उनकी बहन की कथा (बहन ने भाइयों के लिए करमा-व्रत किया, भाभियों ने जावा फेंका → विपत्ति → बहन के व्रत से लौटी); उराँव-मुंडा में «करम-राजा» फ़सल-देवता, संथाल में «करम-गोसाईं»; करमा-गीत («करम राजा आयो रे…») इन्हीं कथाओं की धुनें; झारखंड में भादो करम पर मुख्यमंत्री-स्तर का राजकीय आयोजन।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

करम = कर्म (भाग्य/परिश्रम) व करम-वृक्ष — करम-राजा (करम-देवता) फ़सल, संतान, समृद्धि व भाग्य के देवता; धर्मा-करमा कथा (नीचे) कर्म-श्रद्धा की सीख — जो करम-डाली/कर्म का अनादर करे, उसका सब नष्ट; भाद्रपद में खेतों में धान बढ़ रहा — अच्छी फ़सल की कामना, «जावा» (नए अंकुर) = उर्वरता का प्रतीक।

स्त्री-पर्व: बहनें भाई के लिए दिन-भर उपवास (कई निर्जला), जावा-टोकरी की नौ दिन सेवा (जल-दीप-गीत), करम-डाली के चारों ओर रात-भर नृत्य; अगली सुबह जावा के अंकुर भाई के कान/सिर पर खोंसना = रक्षा-आशीर्वाद — रक्षाबंधन का आदिवासी समकक्ष; विवाहिता बहनें मायके आतीं।

करमा के रूप: भाद्रपद शुक्ल एकादशी को «भादो करम/इंद-करम» (मुख्य), कुछ इलाक़ों में «जितिया करम» (आश्विन कृष्ण अष्टमी — जिउतिया के साथ), «दशहरा करम», «राजी करम» (आदिवासी राजाओं का) — झारखंड-सरकार की छुट्टी भादो करम पर; झारखंड-छत्तीसगढ़ में करमा-नृत्य लोक-धरोहर (मांदर, नगाड़ा, झूमर-गीत)।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 करमा / करम पर्व (करमा एकादशी) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

करमा {Y} में कब है?

ऊपर इस साल की भाद्रपद शुक्ल एकादशी (भादो करम) की तिथि है — उत्तर-भारतीय पंचांग में यही परिवर्तिनी (जलझूलनी) एकादशी; जावा इससे 7-9 दिन पहले (शुक्ल तृतीया-पंचमी) बोया जाता है; विसर्जन अगली सुबह (द्वादशी); कुछ इलाक़ों के जितिया-करम/दशहरा-करम की तिथियाँ अलग — गाँव के पाहन/पंचांग से मिलाएँ।

करमा किसका पर्व है — सिर्फ़ आदिवासियों का?

मूलतः झारखंड-छत्तीसगढ़-ओडिशा के आदिवासी (मुंडा-उराँव-संथाल-हो-खड़िया-बैगा-गोंड) व कुड़मी-महतो समाज का, पर गाँव के सभी समाज (ग्रामीण हिंदू) साथ मनाते हैं; झारखंड में राजकीय पर्व — शहरों में सब नाचते हैं; बहन-भाई व फ़सल का पर्व होने से रक्षाबंधन-सा भाव, सबके लिए खुला।

जावा क्या है और कैसे उगाएँ?

बाँस की नई टोकरी में नदी की बालू-मिट्टी भरकर जौ-गेहूँ-मक्का-उड़द-चना के बीज बोना — करमा से 7-9 दिन पहले; कुँवारी कन्याएँ रोज़ स्नान कर जल-हल्दी देतीं, जावा-गीत गातीं, टोकरी पवित्र ऊँचे स्थान पर; करमा की रात जावा करम-डाली के पास, अगली सुबह अंकुर भाई के कान में व खेत में — उर्वरता-समृद्धि-भाई-रक्षा का प्रतीक (नवरात्रि के जवारे-सा)।

करम-वृक्ष कौन-सा है? डाली न मिले तो?

करम = हल्दू/कदंब-परिवार का *Adina cordifolia* (कर्म/करम-गाछ) — झारखंड-छत्तीसगढ़ के जंगलों का वृक्ष; डाली युवक बिना ज़मीन छुए लाते हैं; न मिले तो शमी, पीपल, बेल या कदंब की डाली, या करम-देवता का चित्र — भाव वही; शहरों में प्रवासी समाज प्रायः शमी-डाली रोपते हैं।

बहनें क्या व्रत रखती हैं और भाई क्या करता है?

बहनें (कुँवारी-विवाहिता) भाई की दीर्घायु-सौभाग्य के लिए दिन-भर निर्जला/फलाहार उपवास, जावा की सेवा, करम-डाली की पूजा-कथा, रात नृत्य; भाई डाली लाता है, अगली सुबह बहन से जावा का अंकुर कान में लेता है व बहन को भेंट देता है — रक्षाबंधन-जैसा; विवाहिता बहनें मायके आतीं।

करमा-नृत्य क्या है?

करम-डाली के चारों ओर रात-भर गोल घेरे में स्त्री-पुरुषों का सामूहिक नृत्य — मांदर, नगाड़ा, झाँझ, बाँसुरी; करमा-झूमर गीत («करम राजा…», डमकच); छत्तीसगढ़ का राजकीय लोक-नृत्य, झारखंड-ओडिशा-असम के चाय-बाग़ानों की धरोहर; पहनावा — लाल-पाड़ साड़ी, फूल-मुकुट, पुरुष धोती-पगड़ी।

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