🌕 माघ पूर्णिमा (माघी पूर्णिमा) व्रत कथा
कथा
पद्म-पुराण की कथा — कांतिका नगर के धनेश्वर ब्राह्मण की पत्नी को संतान न थी; ब्राह्मण ने भिक्षा में मिले संदेश पर पत्नी से माघ-मास में सुबह स्नान और चंद्रमा को अर्घ्य का व्रत कराया। 32 पूर्णिमाओं के व्रत से पुत्र हुआ, पर वह अल्पायु था; पत्नी ने माघ पूर्णिमा के व्रत का पुण्य पुत्र को दिया, और जब यम-दूत उसे लेने आए तो व्रत-बल से वे लौट गए — पुत्र दीर्घायु हुआ। तभी से माघ पूर्णिमा का स्नान-व्रत संतान-रक्षा व आयु का व्रत माना गया।
प्रयाग-मान्यता — माघ में तीनों लोकों के देवता, गंधर्व, ऋषि प्रयाग-संगम में मनुष्य-रूप में स्नान करने आते हैं; माघ पूर्णिमा को यह «देव-स्नान» पूर्ण होता है — इसलिए कल्पवासी इस दिन अंतिम स्नान करके त्रिवेणी को प्रणाम कर लौटते हैं।
संत रविदास — काशी के चर्मकार-कुल में माघ पूर्णिमा (1377 ई. के आस-पास) को जन्म; मीराबाई के गुरु, «बेगमपुरा» (दुःख-रहित नगर) के कवि; गुरु ग्रंथ साहिब में उनके 40 पद — भक्ति में ऊँच-नीच नहीं, यही उनका संदेश।
कथा का महत्व — यह व्रत क्यों
माघ-स्नान का समापन — जिसने महीना-भर किया उसका फल आज पूरा; जो न कर सका, उसके लिए माघ पूर्णिमा का एक स्नान पूरे माघ के बराबर कहा गया (पद्म-पुराण)। संगम पर कल्पवासी आज कुटिया छोड़कर लौटते हैं।
माघ में सूर्य कुंभ-राशि और चंद्रमा मघा नक्षत्र में (इसी से माघ) — इस पूर्णिमा को दान (तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र, कंबल, घी) का फल हज़ार गुना कहा गया; पितरों के लिए तर्पण-श्राद्ध भी।
रविदास जयंती — संत रविदास (रैदास) का जन्म काशी में माघ पूर्णिमा को; «मन चंगा तो कठौती में गंगा» — भक्ति-समानता का पर्व; पंजाब-उप्र-मप्र में शोभा-यात्रा, लंगर।
कथा सुनने का नियम
- कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
- व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
- कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।
📿 माघ पूर्णिमा (माघी पूर्णिमा) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
माघ पूर्णिमा {Y} में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की माघ पूर्णिमा है — पंचांग-गणना से; ब्रह्म-मुहूर्त (स्नान) व चंद्रोदय का दिल्ली-समय भी वहीं।
माघ-स्नान पूरा न कर पाए तो?
पद्म-पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा का एक स्नान पूरे माघ के बराबर — आज भोर में स्नान, दान और चंद्र-अर्घ्य कर लें; या माघ की तीन तिथियाँ (पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, माघ पूर्णिमा) पर।
इस दिन क्या दान करें?
काले तिल, गुड़, अन्न-सीधा, कंबल/ऊनी वस्त्र, घी, तेल, जूते-छाता — सर्दी के अंत में कंबल-वस्त्र सबसे उपयोगी; गौशाला को चारा।
रविदास जयंती और माघ पूर्णिमा एक ही दिन क्यों?
संत रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा को माना गया — इसलिए हर साल इसी तिथि पर जयंती; पंजाब-उप्र में सरकारी अवकाश और शोभा-यात्रा।
माघी पूर्णिमा के बाद क्या?
अगले दिन से फाल्गुन — पंद्रह दिन बाद महाशिवरात्रि, फिर होलाष्टक (होली से आठ दिन पहले) और फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका-दहन।
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