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📖 व्रत-कथा

🚩 मंगलवार व्रत (हनुमान) व मंगळागौर व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

मंगलवार व्रत-कथा: एक ब्राह्मण-दंपति निःसंतान थे; ब्राह्मण वन में हनुमान-पूजा करता, पत्नी घर पर मंगलवार व्रत रखकर हनुमान को भोग लगाकर ही भोजन करती। एक मंगलवार वह भोग न बना सकी और भूखी रही — छह दिन बाद अगले मंगलवार बेहोश हो गई; हनुमान प्रकट हुए — «तेरी श्रद्धा से प्रसन्न, यह पुत्र लो» — बालक «मंगल»। ब्राह्मण लौटा तो शंका हुई, बालक को कुएँ में गिरा दिया — पर मंगल मुस्कुराता लौट आया; रात हनुमान ने ब्राह्मण को सपने में सच बताया, वह पछताया; दंपति सुखी, मंगल-पुत्र सदा रक्षित। सीख — मंगलवार व्रत श्रद्धा से संतान-रक्षा व हनुमान-कृपा।

मंगळागौर की कहाणी (महाराष्ट्र): एक धनवान निःसंतान व्यापारी को साधु ने बताया कि उसके पुत्र की आयु 16 वर्ष होगी; पुत्र हुआ, 16वें वर्ष विवाह; वधू की माँ ने श्रावण के मंगलवार को मंगळागौरी-व्रत किया था और बेटी को भी कराया — जब यम आए तो वधू के व्रत-तेज/सर्प-रूप में गौरी की रक्षा से पति बच गया, आयु सौ वर्ष; तभी से नवविवाहिता पाँच वर्ष मंगळागौर — पति-दीर्घायु। उत्तर की मंगला गौरी कथा भी यही (सेठ-पुत्र 16 वर्ष, पत्नी के व्रत से दीर्घायु — साँप-रूप में यम को हार)।

मंगल-ग्रह की उत्पत्ति: शिव के पसीने की बूँद पृथ्वी पर गिरी — भूमि-पुत्र मंगल (अंगारक/भौम) — रक्तवर्ण, उग्र; उज्जैन मंगल का जन्म-स्थान (मंगलनाथ मंदिर — भात-पूजा से मांगलिक-शांति); हनुमान मंगल को नियंत्रित करते — इसलिए मंगलवार को हनुमान-पूजा से मंगल-दोष शांत (लोक-ज्योतिष); अंगारक ने गणेश-तपस्या से अंगारकी संकष्टी पाई।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

हनुमान: मंगलवार को जन्म (लोक-मान्यता — चैत्र पूर्णिमा मंगलवार), रुद्रावतार, अष्ट-सिद्धि-नव-निधि के दाता; मंगलवार-व्रत से भय-रोग-भूत-प्रेत-शनि-पीड़ा दूर («भूत पिशाच निकट नहिं आवै»), साहस-आत्मविश्वास; ब्रह्मचर्य-नियम; स्त्रियाँ हनुमान-पूजा कर सकती हैं (मूर्ति-स्पर्श/चोला की रीत कुछ मंदिरों में पुरुष) — चालीसा-दीप-लड्डू सबके लिए।

मंगल-ग्रह: भूमि-पुत्र, रक्त-साहस-भाई-भूमि-वाहन का कारक; कुंडली में 1-4-7-8-12 भाव में मंगल = मांगलिक-दोष (विवाह-विलंब/कलह — लोक-ज्योतिष); मंगलवार-व्रत, हनुमान-पूजा, लाल मसूर-गुड़-लाल वस्त्र-तांबा दान, «ॐ अं अंगारकाय नमः»/मंगल-स्तोत्र, मूँगा (पंडित से) — शांति-उपाय; भौम-प्रदोष व अंगारकी संकष्टी भी मंगलवार के।

मंगळागौर (महाराष्ट्र): श्रावण-मंगलवार की गौरी-पूजा — नवविवाहिता पाँच वर्ष, फिर उद्यापन; सोलह प्रकार के पत्ते-फूल (पत्री), अन्नपूर्णा-मूर्ति, रात-भर जागरण-खेल (झिम्मा, फुगड़ी, पिंगा, उखाणे — पति का नाम काव्य में), मायके-ससुराल की स्त्रियाँ; उत्तर-भारत में मंगला गौरी व्रत (सावन-मंगलवार — पार्वती को 16 वस्तुएँ, 16 लड्डू) — सुहाग व संतान।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 मंगलवार व्रत (हनुमान) व मंगळागौर की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगला मंगलवार व्रत कब और सावन के मंगलवार {Y} में कब-कब?

ऊपर सूची में आने वाले 12 मंगलवार हैं — «मंगळागौर (श्रावण मंगलवार)» लिखे हुए सावन के मंगलवार (पूर्णिमांत श्रावण — उत्तर भारत; महाराष्ट्र का अमांत श्रावण 15 दिन बाद शुरू — उसके मंगलवार = सूची के श्रावण-शुक्ल वाले मंगलवार + उनके बाद के (पूर्णिमांत भाद्रपद-कृष्ण, यानी अमांत श्रावण-कृष्ण) मंगलवार); 21-मंगलवार व्रत किसी भी मंगलवार (शुक्ल पक्ष श्रेष्ठ) से आरंभ करें।

मंगलवार व्रत कितने रखें, नियम क्या, नमक?

संकल्प 21 (लगभग 5 महीने) या 45 मंगलवार; सुबह हनुमान-पूजा (चोला-लड्डू-चालीसा), एक समय भोजन — परंपरा में मीठा/नमक-रहित (गुड़-हलवा-मीठी रोटी), कई घर सेंधा नमक; ब्रह्मचर्य; उद्यापन पर 21 लड्डू-ध्वजा-बच्चों को भोजन; बीमार-गर्भवती सामान्य भोजन कर पूजा-चालीसा भर करें।

मंगल-दोष (मांगलिक) क्या है, मंगलवार-व्रत से शांति?

कुंडली में मंगल लग्न से 1-4-7-8-12 भाव में = मांगलिक (विवाह-विलंब/कलह की लोक-मान्यता; कई अपवाद — मंगल स्वराशि/उच्च, गुरु-दृष्टि, 28 वर्ष के बाद क्षीण); उपाय — मंगलवार-व्रत, हनुमान-पूजा, लाल मसूर-गुड़-लाल वस्त्र-तांबा दान, मंगल-स्तोत्र, उज्जैन मंगलनाथ भात-पूजा, कुंभ-विवाह (कुछ), मूँगा (पंडित से); पहले कुंडली (मांगलिक-रिपोर्ट) से पुष्टि — डर से नहीं।

मंगळागौर क्या है और कौन करे?

महाराष्ट्र की नवविवाहिता श्रावण (अमांत) के हर मंगलवार गौरी-अन्नपूर्णा की पूजा — सोलह पत्री-फूल, हल्दी-कुंकू, करंज्या; मायके-ससुराल की सुहागिनों-सहेलियों को बुलाकर रात-भर झिम्मा-फुगड़ी-पिंगा-उखाणे; विवाह के पहले पाँच वर्ष (पहला वर्ष मायके, बाक़ी ससुराल — रीत-भेद), पाँचवें साल उद्यापन; पति-दीर्घायु व सौभाग्य; अब शहरों में सामूहिक मंगळागौर-कार्यक्रम।

मंगला गौरी व्रत (उत्तर) कैसे करें?

सावन के हर मंगलवार सुहागिनें/कन्याएँ पार्वती (मंगला गौरी) की पूजा — 16-16 वस्तुएँ (लड्डू, फल, फूल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चूड़ी, आटे के 16 दीप — 16 बाती), सुहाग-सामग्री, कथा (सेठ-पुत्र की 16 वर्ष आयु व्रत से बढ़ी), आरती; एक समय भोजन; 5 वर्ष/सामर्थ्य पर उद्यापन; पति-संतान की दीर्घायु, मंगल-दोष-शांति।

क्या स्त्रियाँ हनुमान-पूजा कर सकती हैं?

हाँ — हनुमान-चालीसा, दीप, लड्डू, सुंदरकांड, मंगलवार-व्रत सबके लिए; कुछ मंदिर-परंपराओं में मूर्ति-स्पर्श/चोला-चढ़ाना पुरुष करते हैं (हनुमान ब्रह्मचारी — शास्त्र में स्त्री-पूजा वर्जित नहीं, सीता-माता स्वयं); स्त्रियाँ दूर से चोला/सिंदूर अर्पित कर सकती हैं; मासिक-धर्म में स्मरण-जप।

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