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📖 व्रत-कथा

👶 पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

भद्रावती नगर के राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या धर्मात्मा थे, पर निःसंतान — चिंता यह कि पिंडदान कौन करेगा, पितर कैसे तृप्त होंगे। दुखी राजा एक दिन वन में निकल गया; प्यास में सरोवर पर पहुँचा, जहाँ ऋषियों का आश्रम था। ऋषियों ने कहा — «आज पौष शुक्ल एकादशी है, हम इसी का व्रत कर रहे हैं; यह पुत्रदा एकादशी है, तुम भी करो।»

राजा-रानी ने विधि से व्रत किया, रात जागरण किया, द्वादशी को पारण; समय आने पर रानी को तेजस्वी पुत्र हुआ जो प्रजा-पालक राजा बना। तभी से पौष शुक्ल एकादशी «पुत्रदा» — संतान-सुख की एकादशी। कथा का सार: श्रद्धा से व्रत, दान और धैर्य।

उत्तर-भारत में इसी दिन (कुछ वर्षों में मकर संक्रांति के साथ) बाल-गोपाल के जन्म-उत्सव-सा भाव — लड्डू गोपाल को नए वस्त्र, झूला; माताएँ अपने बच्चों को गोपाल-रूप मानकर आशीर्वाद देती हैं।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

भविष्य-पुराण में इस एकादशी को संतान-प्रदायिनी कहा गया — कथा में राजा सुकेतुमान को इसी व्रत से पुत्र मिला। जिनके घर में संतान की प्रतीक्षा हो, वे पति-पत्नी दोनों यह व्रत रखते हैं; माताएँ बच्चों की मंगल-कामना से।

पौष का महीना सूर्य और विष्णु का — इस एकादशी को नारायण की पूजा, «संतान गोपाल» मंत्र और बाल-गोपाल (लड्डू गोपाल) की सेवा विशेष; कई घर इस दिन लड्डू गोपाल को झूला-वस्त्र चढ़ाते हैं।

एकादशी का सामान्य नियम — चावल-अनाज वर्जित, द्वादशी में हरि-वासर के बाद पारण; ऊपर द्वादशी की तिथि भी दी है।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 पौष पुत्रदा एकादशी की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पौष पुत्रदा एकादशी {Y} में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की पौष शुक्ल एकादशी है — पंचांग-गणना से; पारण की द्वादशी भी वहीं है।

पौष और श्रावण की पुत्रदा एकादशी में क्या अंतर?

दोनों संतान-सुख की एकादशियाँ — पौष शुक्ल एकादशी उत्तर-पूर्व भारत में प्रमुख (यह पन्ना), श्रावण शुक्ल एकादशी पश्चिम-दक्षिण में; व्रत-विधि व कथा-भाव समान। एक ही वर्ष में दोनों रख सकते हैं।

यह व्रत कौन रखे — सिर्फ़ निःसंतान?

नहीं — निःसंतान दंपत्ति संतान-प्राप्ति के लिए, और जिनकी संतान है वे माताएँ बच्चों के आरोग्य-उन्नति-दीर्घायु के लिए; दोनों में विधि एक।

संतान गोपाल मंत्र कितना जपें?

एकादशी को 108 (एक माला) कम-से-कम; नियमित करना हो तो रोज़ एक माला, बाल-गोपाल के सामने; श्रद्धा मुख्य, गिनती नहीं।

पारण का समय?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, हरि-वासर (द्वादशी का पहला चौथाई) बीत जाने पर, द्वादशी समाप्त होने से पहले — प्रायः सुबह 7-9; पहले दान, फिर तुलसी-जल के साथ भोजन।

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