👶 पौष पुत्रदा एकादशी 2027
पौष शुक्ल एकादशी — संतान-सुख की एकादशी; निःसंतान दंपत्ति और संतान की मंगल-कामना करने वाली माताओं का विष्णु-व्रत, अगले दिन पारण।
- पुत्रदा एकादशी — व्रत — मंगलवार, 19 जनवरी 2027
- द्वादशी — पारण — बुधवार, 20 जनवरी 2027
पौष पुत्रदा एकादशी पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है — मकर संक्रांति के आस-पास (कभी पहले, कभी बाद)। «पुत्रदा» = संतान देने वाली; यह व्रत निःसंतान दंपत्ति संतान-प्राप्ति के लिए और माताएँ अपनी संतान के आरोग्य-उन्नति के लिए रखती हैं। साल में दो पुत्रदा एकादशियाँ हैं — पौष (उत्तर भारत में प्रमुख) और श्रावण (दक्षिण-पश्चिम में)।
व्रत विष्णु का है — दशमी की शाम से संयम, एकादशी को उपवास-पूजा-जागरण, द्वादशी में पारण; बच्चे के नाम से दान। नीचे इस साल की तिथि, पारण-द्वादशी, विधि, सामग्री, कथा, फलाहार और इलाक़ों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
भविष्य-पुराण में इस एकादशी को संतान-प्रदायिनी कहा गया — कथा में राजा सुकेतुमान को इसी व्रत से पुत्र मिला। जिनके घर में संतान की प्रतीक्षा हो, वे पति-पत्नी दोनों यह व्रत रखते हैं; माताएँ बच्चों की मंगल-कामना से।
पौष का महीना सूर्य और विष्णु का — इस एकादशी को नारायण की पूजा, «संतान गोपाल» मंत्र और बाल-गोपाल (लड्डू गोपाल) की सेवा विशेष; कई घर इस दिन लड्डू गोपाल को झूला-वस्त्र चढ़ाते हैं।
एकादशी का सामान्य नियम — चावल-अनाज वर्जित, द्वादशी में हरि-वासर के बाद पारण; ऊपर द्वादशी की तिथि भी दी है।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह एकादशी की घरेलू विधि है — संतान-कामना का संकल्प, विष्णु/बाल-गोपाल पूजा, जागरण, पारण।
- दशमी की रात सात्विक भोजन; एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान, पीले वस्त्र; संकल्प — «मैं संतान-प्राप्ति/संतान के आरोग्य हेतु पुत्रदा एकादशी का व्रत करती/करता हूँ» (पति-पत्नी साथ रखें तो उत्तम)।
- विष्णु/लक्ष्मी-नारायण और बाल-गोपाल (लड्डू गोपाल) की पूजा — पंचामृत-स्नान, पीले वस्त्र, तुलसी-दल, पीले फूल, चंदन, धूप-दीप, नैवेद्य (माखन-मिश्री, फल, पीली मिठाई); «ॐ नमो भगवते वासुदेवाय» 108।
- संतान गोपाल मंत्र — «ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः» — 108 जप (या जितना हो सके); बाल-गोपाल को झूला झुलाएँ, लोरी/भजन।
- दिन-भर फलाहार/निर्जला (सामर्थ्य से); दिन में सोना नहीं; भागवत/एकादशी-कथा पढ़ें-सुनें; शाम को तुलसी-चौरे पर दीप, विष्णु-आरती।
- रात्रि-जागरण — भजन/विष्णु-सहस्रनाम; न हो सके तो आधी रात तक।
- दान: बच्चे/संतान के नाम से अन्न, वस्त्र, फल; ब्राह्मण-भोजन; गाय को चारा; बच्चों को मिठाई-उपहार।
- पारण: द्वादशी को सूर्योदय के बाद, हरि-वासर बीतने पर, द्वादशी समाप्त होने से पहले — पहले दान, फिर तुलसी-जल के साथ भोजन।
पूजा-सामग्री की सूची
बाल-गोपाल की सेवा-सामग्री इस एकादशी की ख़ासियत है।
- विष्णु/लक्ष्मी-नारायण का चित्र, बाल-गोपाल (लड्डू गोपाल) की मूर्ति, झूला, पीला कपड़ा, चौकी
- बाल-गोपाल के लिए पीले वस्त्र, मुकुट, माखन-मिश्री, बाँसुरी, फूल-माला
- पंचामृत, गंगाजल, तुलसी-दल, पीले फूल, चंदन, रोली, अक्षत, मौली
- दीपक (घी), धूप, कपूर, आरती-थाली
- फल, पीली मिठाई (बेसन-लड्डू/केसर-खीर), पान-सुपारी
- संतान गोपाल मंत्र/एकादशी-कथा पुस्तक, माला
- दान: अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा; बच्चों के लिए मिठाई-खिलौने
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भद्रावती नगर के राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या धर्मात्मा थे, पर निःसंतान — चिंता यह कि पिंडदान कौन करेगा, पितर कैसे तृप्त होंगे। दुखी राजा एक दिन वन में निकल गया; प्यास में सरोवर पर पहुँचा, जहाँ ऋषियों का आश्रम था। ऋषियों ने कहा — «आज पौष शुक्ल एकादशी है, हम इसी का व्रत कर रहे हैं; यह पुत्रदा एकादशी है, तुम भी करो।»
राजा-रानी ने विधि से व्रत किया, रात जागरण किया, द्वादशी को पारण; समय आने पर रानी को तेजस्वी पुत्र हुआ जो प्रजा-पालक राजा बना। तभी से पौष शुक्ल एकादशी «पुत्रदा» — संतान-सुख की एकादशी। कथा का सार: श्रद्धा से व्रत, दान और धैर्य।
उत्तर-भारत में इसी दिन (कुछ वर्षों में मकर संक्रांति के साथ) बाल-गोपाल के जन्म-उत्सव-सा भाव — लड्डू गोपाल को नए वस्त्र, झूला; माताएँ अपने बच्चों को गोपाल-रूप मानकर आशीर्वाद देती हैं।
एकादशी का फलाहार और गोपाल का भोग
एकादशी को चावल-अनाज नहीं; बाल-गोपाल को माखन-मिश्री, पंजीरी, पीली मिठाई। पौष की ठंड में सूखे मेवे, तिल-गुड़ का फलाहार।
- गोपाल-भोग: माखन-मिश्री, धनिया-पंजीरी, केसर-खीर (द्वादशी को), बेसन-लड्डू, फल, तुलसी
- फलाहार: साबूदाना, सिंघाड़ा-कुट्टू, आलू, मूँगफली, मेवे, दूध, फल — सेंधा नमक
- पारण: तुलसी-जल, फिर खिचड़ी/दाल-चावल (द्वादशी को अन्न अनिवार्य)
- बच्चों को: मिठाई, फल, नए कपड़े — संतान के नाम का दान
- गर्भवती/रोगी फल-दूध से; निर्जला नहीं
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
पौष पुत्रदा उत्तर-पूर्व में, श्रावण पुत्रदा दक्षिण-पश्चिम में — दोनों संतान की एकादशी।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- पति-पत्नी साथ व्रत रखें (संतान-कामना में) — संकल्प में स्पष्ट कामना
- बाल-गोपाल की सेवा — वस्त्र, झूला, माखन-मिश्री; संतान गोपाल मंत्र
- बच्चों के नाम से दान; उन्हें आशीर्वाद, मिठाई
- पारण द्वादशी के भीतर, हरि-वासर के बाद
- तुलसी-दल एक दिन पहले तोड़ें
❌ क्या न करें
- एकादशी को चावल/अनाज, तुलसी तोड़ना, दिन में सोना — वर्जित
- द्वादशी बीतने के बाद पारण नहीं
- गर्भवती/रोगी निर्जला नहीं — फल-दूध
- संतान-कामना में व्रत को इलाज का विकल्प न मानें — चिकित्सा साथ रखें
- क्रोध, कलह, झूठ — व्रत-दिन
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पौष पुत्रदा एकादशी 2027 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की पौष शुक्ल एकादशी है — पंचांग-गणना से; पारण की द्वादशी भी वहीं है।
पौष और श्रावण की पुत्रदा एकादशी में क्या अंतर?
दोनों संतान-सुख की एकादशियाँ — पौष शुक्ल एकादशी उत्तर-पूर्व भारत में प्रमुख (यह पन्ना), श्रावण शुक्ल एकादशी पश्चिम-दक्षिण में; व्रत-विधि व कथा-भाव समान। एक ही वर्ष में दोनों रख सकते हैं।
यह व्रत कौन रखे — सिर्फ़ निःसंतान?
नहीं — निःसंतान दंपत्ति संतान-प्राप्ति के लिए, और जिनकी संतान है वे माताएँ बच्चों के आरोग्य-उन्नति-दीर्घायु के लिए; दोनों में विधि एक।
संतान गोपाल मंत्र कितना जपें?
एकादशी को 108 (एक माला) कम-से-कम; नियमित करना हो तो रोज़ एक माला, बाल-गोपाल के सामने; श्रद्धा मुख्य, गिनती नहीं।
पारण का समय?
द्वादशी को सूर्योदय के बाद, हरि-वासर (द्वादशी का पहला चौथाई) बीत जाने पर, द्वादशी समाप्त होने से पहले — प्रायः सुबह 7-9; पहले दान, फिर तुलसी-जल के साथ भोजन।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
यह भी पढ़ें: मकर संक्रांति · पौष पूर्णिमा · मोक्षदा एकादशी (पिछली) · एकादशी-सूची
⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। संतान-संबंधी चिकित्सा का विकल्प नहीं।
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