❄️ पौष पूर्णिमा (शाकंभरी जयंती) 2027
पौष मास की पूर्णिमा — माघ-स्नान का आरंभ, प्रयाग में कल्पवास की शुरुआत, शाकंभरी देवी की जयंती और सर्दी में तिल-गुड़-कंबल का दान।
पौष पूर्णिमा साल की सबसे ठंडी पूर्णिमा है — मकर संक्रांति के कुछ ही दिन बाद (कभी पहले)। इसी दिन से माघ-स्नान (पूरे माघ भोर में नदी-स्नान) और प्रयागराज का कल्पवास शुरू होता है, जो माघ पूर्णिमा को पूरा होता है। यह शाकंभरी नवरात्रि (पौष शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा) का अंतिम दिन — शाकंभरी जयंती — भी है।
घर की स्त्रियाँ इस दिन पूर्णिमा-व्रत, सत्यनारायण-कथा और शाक-सब्ज़ी-फल का दान करती हैं; बंगाल-ओडिशा में यह पौष-पार्बण/पुष्याभिषेक की पूर्णिमा है। नीचे इस साल की तिथि, स्नान-मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
माघ-स्नान का संकल्प इसी पूर्णिमा को लिया जाता है — «पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक रोज़ भोर में स्नान, दान, संयम»; प्रयाग के कल्पवासी इसी दिन संगम-तट पर कुटिया बसाते हैं।
शाकंभरी जयंती — दुर्गा का वह रूप जिसने अकाल में अपने शरीर से शाक (सब्ज़ियाँ-फल) उगाकर संसार को भोजन दिया; इसलिए इस दिन शाक-सब्ज़ी-फल-अन्न का दान और अन्न के प्रति कृतज्ञता — रसोई की देवी का दिन।
पूर्णिमा-व्रत और चंद्र-अर्घ्य; पौष का चंद्रमा सूर्य-तत्व से जुड़ा माना गया है (पौष = सूर्य का महीना) — कई परंपराओं में इस दिन सूर्य-चंद्र दोनों को अर्घ्य।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — भोर में स्नान व माघ-स्नान का संकल्प, दिन में व्रत-दान, शाम को शाकंभरी/चंद्र-पूजा।
- ब्रह्म-मुहूर्त (ऊपर समय) में नदी/तालाब या घर में गंगाजल-तिल मिले जल से स्नान; सूर्य को अर्घ्य; माघ-स्नान का संकल्प — «पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक प्रतिदिन स्नान-दान करूँगी।»
- पूर्णिमा-व्रत का संकल्प; दिन में फलाहार/एक समय भोजन; विष्णु-लक्ष्मी की पूजा — पीले फूल, तुलसी, पंचामृत; सत्यनारायण-कथा (हो सके तो)।
- शाकंभरी पूजा (शाम): दुर्गा/शाकंभरी देवी के चित्र के सामने मौसमी सब्ज़ियाँ-फल (गाजर, मूली, मटर, पालक, बैंगन, गोभी, बेर, सेब, संतरा) चौकी पर सजाकर रखें; रोली-अक्षत-फूल, दीप; «ॐ शाकंभर्यै नमः» / दुर्गा-सप्तशती का शाकंभरी-प्रसंग (11वाँ अध्याय)।
- दान: तिल, गुड़, कंबल/ऊनी वस्त्र, घी, अन्न — और विशेष रूप से सब्ज़ी-फल (शाक) ज़रूरतमंद/मंदिर/गौशाला को; इस दिन का दान अक्षय।
- चंद्रोदय (ऊपर समय) पर चंद्रमा को दूध-जल का अर्घ्य; खीर का भोग; व्रत खोलें।
- रात में दुर्गा-चालीसा या विष्णु-भजन; शाकंभरी को चढ़ी सब्ज़ियाँ अगले दिन प्रसाद-रूप में बनाकर खाएँ-बाँटें।
पूजा-सामग्री की सूची
मौसमी सब्ज़ी-फल ही इस दिन की मुख्य सामग्री हैं — जो घर में है वही।
- गंगाजल, तिल, ताँबे का लोटा (स्नान-अर्घ्य)
- विष्णु-लक्ष्मी व दुर्गा/शाकंभरी का चित्र, चौकी, लाल-पीला कपड़ा
- मौसमी सब्ज़ियाँ-फल: गाजर, मूली, मटर, पालक, मेथी, गोभी, बैंगन, बेर, सेब, संतरा, गन्ना
- रोली, अक्षत, फूल, मौली, तुलसी, पंचामृत
- दीपक, धूप, कपूर, आरती-थाली
- दान: तिल-गुड़, कंबल/ऊनी वस्त्र, घी, अन्न, सब्ज़ी-फल
- खीर (चंद्र-भोग), सत्यनारायण-कथा हो तो पंजीरी-केला
- दुर्गा-सप्तशती/दुर्गा-चालीसा पुस्तक
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पुराणों में — सौ वर्ष तक वर्षा न हुई, अकाल पड़ा; ऋषियों-प्राणियों ने देवी की स्तुति की। देवी ने अपने शरीर से हज़ार नेत्र निकालकर करुणा के आँसुओं से पृथ्वी सींची और अपने शरीर से शाक-फल-कंद उगाकर सबको भोजन दिया — इसी से «शाकंभरी» (शाक धारण करने वाली) कहलाईं; दुर्गा-सप्तशती (मूर्ति-रहस्य/11वाँ अध्याय) में देवी स्वयं कहती हैं — «शाकैः… शाकंभरीति विख्यातिं तदा यास्याम्यहं भुवि»। पौष शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक शाकंभरी नवरात्रि, पूर्णिमा को जयंती।
कल्पवास — पद्म-पुराण के अनुसार पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक प्रयाग-संगम पर संयम से रहना (एक समय भोजन, ज़मीन पर सोना, तीन बार स्नान, सत्संग) — «कल्पवास» — का फल सौ वर्ष के तप के बराबर; भरद्वाज-मुनि के आश्रम की परंपरा।
बंगाल की कथा — पौष पूर्णिमा को लक्ष्मी (पौष-लक्ष्मी) की पूजा और नए धान से पीठा; ओडिशा में इसी दिन जगन्नाथ का पुष्याभिषेक (पुष्य नक्षत्र पर राज्याभिषेक-उत्सव)।
पूर्णिमा की खीर और शाकंभरी की सब्ज़ियाँ
इस दिन का भोग मौसम की सब्ज़ी-फल और खीर; शाकंभरी को चढ़ी सब्ज़ियों की मिली-जुली सब्ज़ी अगले दिन प्रसाद। सर्दी में तिल-गुड़-गाजर के पकवान।
- खीर (चंद्र-भोग), गाजर का हलवा, तिल-गुड़ के लड्डू, मूँगफली-गुड़
- शाकंभरी-प्रसाद: चढ़ी सब्ज़ियों की मिली-जुली सब्ज़ी (बिना प्याज़-लहसुन), मेथी-पालक की पूड़ी, मूली-गाजर का सलाद, बेर-सेब
- बंगाल: पौष-पीठा (पाटिसापटा, दूध-पुली), खजूर-गुड़ का पायेश; ओडिशा: पीठा-मंडा, अरिसा
- व्रत: फल-दूध, साबूदाना; पारण चंद्र-अर्घ्य के बाद
- दान का शाक-फल भोग से पहले अलग रखें
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
उत्तर में माघ-स्नान का आरंभ, पूर्व में पीठा-पूर्णिमा, राजस्थान में शाकंभरी का मेला।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
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✅ क्या करें
- भोर में स्नान और माघ-स्नान का संकल्प — महीने-भर का नियम
- सब्ज़ी-फल-अन्न का दान — शाकंभरी का सार; कंबल/ऊनी भी
- पूर्णिमा-व्रत, चंद्रोदय पर अर्घ्य, खीर
- सत्यनारायण-कथा (हो सके तो)
- चढ़ी सब्ज़ियाँ अगले दिन प्रसाद-रूप में पकाएँ — फेंकें नहीं
❌ क्या न करें
- ठंड में नदी-स्नान बुज़ुर्ग/बच्चे/रोगी न करें — घर में गंगाजल से पर्याप्त
- पूर्णिमा को मांस-मदिरा, कलह, बाल-नाख़ून
- अन्न-सब्ज़ी का अपमान/बर्बादी — शाकंभरी-दिन विशेष वर्जित
- तुलसी-दल शाम को न तोड़ें
- व्रत में तामसिक भोजन नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पौष पूर्णिमा 2027 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की पौष पूर्णिमा है — पंचांग-गणना से; ब्रह्म-मुहूर्त (स्नान) व चंद्रोदय का दिल्ली-समय भी वहीं।
माघ-स्नान/कल्पवास क्या है?
पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक रोज़ भोर में नदी-स्नान, दान, संयम (एक समय भोजन, सत्संग) — घर पर गंगाजल से भी मान्य; प्रयाग-संगम पर कुटिया बनाकर रहना कल्पवास कहलाता है।
शाकंभरी देवी कौन हैं, उनकी पूजा कैसे?
दुर्गा का वह रूप जिसने अकाल में अपने शरीर से शाक-फल उगाकर संसार को खिलाया; पूजा में मौसमी सब्ज़ियाँ-फल चौकी पर सजाकर चढ़ाते हैं और अगले दिन प्रसाद-रूप में खाते-बाँटते हैं; सब्ज़ी-फल-अन्न का दान मुख्य।
पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति का क्या संबंध?
दोनों जनवरी में, कुछ दिनों के अंतर पर — संक्रांति सूर्य से (14 जनवरी के आस-पास), पूर्णिमा चंद्र-तिथि से; दोनों में तिल-गुड़-कंबल का दान और स्नान — सर्दी का पुण्य-पखवाड़ा।
क्या इस दिन सत्यनारायण कथा कर सकते हैं?
हाँ — हर पूर्णिमा की तरह, पौष पूर्णिमा पर भी; माघ-स्नान का संकल्प कथा के साथ लेने की रीत है।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
यह भी पढ़ें: मकर संक्रांति · मौनी अमावस्या · माघ पूर्णिमा (कल्पवास-समापन) · पूर्णिमा-सूची
⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। ठंड में स्नान-स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
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