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🪔 पूजा-विधि

🍚 पोंगल (थाई पोंगल) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

पोंगल के चार दिनों की घरेलू विधि — भोगी (सफ़ाई-होली), थाई पोंगल (भोर में कोलम, सूर्योदय के बाद पोंगल पकाना — ऊपर सूर्योदय/अभिजित), मट्टु पोंगल (गाय-बैल), काणुम (मिलन)।

पोंगल (थाई पोंगल) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. भोगी (पहला दिन): भोर में घर की पुरानी-टूटी वस्तुएँ (चटाई-कपड़े-झाड़ू — प्लास्टिक/टायर नहीं) आँगन में अलाव में जलाना (नए की शुरुआत — «भोगी मंडलु»), ढोल-गीत; घर की सफ़ाई-लिपाई-सफ़ेदी, नए वस्त्र-बर्तन ख़रीदना, आम-पत्तों का तोरण; आंध्र-तेलंगाना में बच्चों पर «भोगी पळ्ळु» (बेर-फूल-सिक्के) की वर्षा; इंद्र-पूजा (कुछ घर)।
  2. थाई पोंगल — भोर: सूर्योदय से पहले स्नान, नए वस्त्र; द्वार-आँगन धोकर बड़ा **कोलम** (चावल-आटे/रंग की रंगोली — सूर्य-गन्ना-कलश की आकृतियाँ), बीच में गोबर के गोले पर पीले कद्दू (परंगिक्काय) का फूल; आँगन/छत पर खुले में (सूर्य के सामने) चूल्हा — ईंटों का।
  3. पोंगल-बर्तन: नया मिट्टी (या पीतल) का बर्तन — उस पर हल्दी-चंदन-कुंकुम की तीन धारियाँ, गले पर ताज़ी हल्दी-अदरक की गाँठ (पत्तों सहित) व आम-पत्ते बाँधना; बर्तन के पास गन्ने की जोड़ी, केले का पत्ता, नारियल, केला, सूर्य-देव का चित्र (या सूर्य की ओर मुख)।
  4. पोंगल पकाना (सूर्योदय के बाद, अभिजित तक — ऊपर समय): बर्तन में दूध-जल उबालें — जैसे ही दूध **उफने** (शुभ: उत्तर/पूर्व दिशा में), पूरा परिवार «पोंगलो पोंगल!» पुकारे, शंख/ढोल; तब नया चावल (धान की पहली फ़सल), मूँग-दाल, गुड़, घी, काजू-किशमिश, इलायची डालकर सक्करै (मीठा) पोंगल; साथ वेण (नमकीन — काली मिर्च-जीरा-अदरक) पोंगल।
  5. सूर्य-पूजा: केले के पत्ते पर पोंगल, गन्ना, केला, नारियल, हल्दी-गाँठ रखकर सूर्य को अर्पण — «सूर्याय नमः», आदित्य-हृदय/सूर्य-मंत्र, कपूर-आरती; सूर्य को अर्घ्य; पोंगल को पहले सूर्य, फिर घर के देवता, गाय, कौवे (कणु), फिर परिवार — केले के पत्ते पर भोजन।
  6. मट्टु पोंगल (तीसरा दिन): गाय-बैल को स्नान, सींगों पर रंग-पीतल के खोल, माला-घंटी, माथे पर कुंकुम-हल्दी, गले में फूल; उन्हें पोंगल-गुड़-गन्ना-केला खिलाना, आरती; गोशाला-पूजा; गाँवों में जल्लीकट्टु (बैल-दौड़) व मंजु-विरट्टु; घर में पालतू पशु-पक्षियों को भोजन।
  7. काणुम पोंगल (चौथा दिन): परिवार-रिश्तेदार मिलना, नदी/समुद्र-तट पर पिकनिक; **कणु पिड़ि** — घर की स्त्रियाँ/बहनें भोर में आँगन में हल्दी-पत्ते पर बचा पोंगल, रंगीन चावल (हल्दी-कुंकुम), गन्ना, केला रखकर कौवों को अर्पित करती हैं और भाइयों की दीर्घायु-समृद्धि माँगती हैं (भाई बहन को उपहार); बड़ों का आशीर्वाद, नए कपड़े।
  8. समापन: गन्ना चूसना-बाँटना, कोलम अगले दिन तक; पोंगल-बर्तन साल-भर पूजा में; बचे चावल पक्षियों को; उत्तरायण से नए काम-विवाह के मुहूर्त देखना।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

नया मिट्टी का बर्तन, हल्दी-अदरक की ताज़ी गाँठ, नया चावल-गुड़, गन्ना, कोलम — पोंगल की सूची (चारों दिन)।

  • पोंगल-बर्तन: नया मिट्टी का बर्तन (पोंगल पानै) या पीतल का, चूल्हे की ईंटें/स्टोव (खुले में), लकड़ी/उपले; हल्दी-चंदन-कुंकुम (बर्तन पर धारियाँ)
  • ताज़ी हल्दी की गाँठ (पत्तों सहित) व अदरक की गाँठ — बर्तन के गले पर बाँधने को, आम-पत्ते, कच्चा सूत; गन्ने की जोड़ी, केले के पत्ते, नारियल, केला
  • पोंगल-सामग्री: नया चावल (धान की नई फ़सल — पोंगल-अरिसी), मूँग-दाल, गुड़ (पोंगल-वेल्लम), गाय का दूध, घी, काजू-किशमिश, इलायची, कपूर (खाद्य — कुछ घर); वेण-पोंगल हेतु काली मिर्च-जीरा-अदरक-करी-पत्ता
  • कोलम: चावल का आटा/सफ़ेद रंग, रंगीन पाउडर, गोबर का गोला व पीले कद्दू का फूल (केंद्र), गेंदा-फूल; द्वार-तोरण (आम-पत्ते)
  • सूर्य-पूजा: सूर्य-चित्र/मुख पूर्व, अर्घ्य-लोटा, कुंकुम-हल्दी-चंदन, फूल, धूप, कपूर, आरती-थाली, घंटी, शंख; आदित्य-हृदय पुस्तिका
  • मट्टु पोंगल: गाय-बैल के लिए रंग (सींग), पीतल के सींग-खोल, माला, घंटी, फूल, पोंगल-गुड़-गन्ना-केला, कुंकुम-हल्दी; गोशाला-दान
  • काणुम/कणु पिड़ि: हल्दी-पत्ते, रंगीन चावल (हल्दी-कुंकुम), बचा पोंगल, गन्ना, केला — कौवों को; भाई-बहन के उपहार; नए वस्त्र
  • पकवान: सक्करै पोंगल, वेण पोंगल, वड़ई, पायसम, अवियल/सांबर, मुरुक्कु, अप्पम; गन्ना, केला, तिल-गुड़ (एळ्ळु-वेल्लम)

🛍 पूजा-सामग्री देखें

सक्करै पोंगल, वेण पोंगल, वड़ई-पायसम, गन्ना-तिल-गुड़; केले के पत्ते पर सूर्य-भोग

पोंगल का भोग = पोंगल ही — नए चावल-मूँग-गुड़-घी का उफनता मीठा (सक्करै) पोंगल सूर्य को, साथ वेण (नमकीन) पोंगल, वड़ई, पायसम, गन्ना, केला, नारियल; केले के पत्ते पर पूरा परिवार भोजन; मट्टु पोंगल पर गाय-बैल को पोंगल-गुड़-गन्ना; काणुम पर कौवों को रंगीन चावल।

  • सक्करै पोंगल: नया चावल + मूँग-दाल (भूनी) दूध-जल में, गुड़-घी-काजू-किशमिश-इलायची — बर्तन में उफनाकर; सूर्य का मुख्य भोग
  • वेण पोंगल: चावल-मूँग-घी-काली मिर्च-जीरा-अदरक-काजू-करी-पत्ता — नमकीन; साथ सांबर-गोत्सु (बैंगन/इमली)
  • थाली (केले का पत्ता): पोंगल दोनों, मेदु-वड़ई, पायसम (सेवई/मूँग), अवियल, सांबर-रसम, अप्पलम, केला, गन्ना, तिल-गुड़ (एळ्ळु-वेल्लम — संक्रांति), पानगम (गुड़-पानी)
  • भोगी: पुराने की होली के बाद दाल-चावल/पोंगल, बच्चों पर भोगी-पळ्ळु (बेर); मट्टु पोंगल: गाय-बैल को पोंगल-गुड़-गन्ना-केला; काणुम: पिकनिक-भोजन (कूट्टु-वड़ई-दही-चावल), कौवों को रंगीन चावल
  • वर्जित: पोंगल-दिन माँस (बहुत-से घर — पर काणुम पर मांसाहार कुछ समुदायों में), पोंगल पकाने में जल्दबाज़ी (उफनना देखना ज़रूरी), बर्तन पर हल्दी-गाँठ भूलना

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • भोगी पर सफ़ाई व पुराने (प्राकृतिक) का अलाव; थाई पोंगल पर भोर का कोलम, नया बर्तन, हल्दी-अदरक की गाँठ, सूर्योदय के बाद खुले में पोंगल — उफनते ही «पोंगलो पोंगल!»
  • पहला पोंगल सूर्य को (केले के पत्ते पर, गन्ना-केला-नारियल के साथ), फिर देवता-गाय-कौवे-परिवार; आदित्य-हृदय/सूर्य-मंत्र
  • मट्टु पोंगल पर गाय-बैल/पालतू पशुओं का स्नान-श्रृंगार-भोजन, गोशाला-दान; काणुम पर बहनें कणु पिड़ि, परिवार-मिलन, बड़ों का आशीर्वाद
  • नई फ़सल के चावल-गुड़-गन्ने से ही पोंगल (हो सके तो); तिल-गुड़ बाँटना, मीठा बोलना; उत्तरायण से नए काम-विवाह के मुहूर्त
  • उत्तर-भारतीय घर तमिलनाडु में/तमिल परिवार उत्तर में — दोनों रीतें (खिचड़ी + पोंगल) साथ; बच्चों को पर्व का अर्थ बताना (सूर्य-किसान-पशु का धन्यवाद)

❌ क्या न करें

  • भोगी-अलाव में प्लास्टिक-टायर-रबर जलाना (प्रदूषण — केवल लकड़ी-चटाई-कपड़ा-गोबर); धुएँ से बच्चे-बुज़ुर्ग दूर
  • पोंगल-दूध का उफनना बिना देखे पकाना/पकाते समय झगड़ा-अशुभ वचन; बर्तन पर हल्दी-गाँठ व कोलम भूलना
  • जल्लीकट्टु/पशु-खेल में पशु-क्रूरता, मट्टु पोंगल पर पशुओं को रंग-केमिकल से नुक़सान (प्राकृतिक रंग)
  • मुख्य दिन (थाई पोंगल) माँस-मद्य (परंपरा); पोंगल-प्रसाद फेंकना — पक्षियों/गाय को
  • थाई पोंगल को केवल 14 जनवरी मानना — सौर-संक्रमण से तिथि 14/15 (कभी 13/16) बदलती है; ऊपर की तिथि देखें

व्रत-कथा

पोंगल की कथा (शिव-नंदी व बसव): शिव ने नंदी को पृथ्वी पर भेजा — «मनुष्यों से कहो: महीने में एक बार भोजन करें, रोज़ तेल-स्नान करें»; नंदी ने उलटा कह दिया — «रोज़ भोजन करें, महीने में एक बार स्नान»। शिव क्रुद्ध हुए — «अब इत… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पोंगल {Y} में कब है — चारों दिन?

ऊपर चारों दिन: भोगी (थाई पोंगल से एक दिन पहले), थाई पोंगल (मकर संक्रांति — सूर्य का मकर-प्रवेश, 14/15 जनवरी के आसपास), मट्टु पोंगल (अगला दिन), काणुम पोंगल (उसके अगले दिन); तिथि सौर-गणना से हर वर्ष बदलती है।

पोंगल पकाने का समय व दिशा?

सूर्योदय के बाद, दोपहर (अभिजित) से पहले — ऊपर समय; खुले में सूर्य के सामने पूर्व-मुख; दूध उत्तर/पूर्व दिशा में उफने तो शुभ (उत्तरायण); राहुकाल में न पकाएँ (ऊपर)।

सक्करै पोंगल कैसे बनाएँ?

नया चावल 1 कप + भुनी मूँग-दाल ¼ कप, दूध-जल में गलने तक; गुड़ ¾-1 कप पिघलाकर छानकर डालें, घी 3-4 चम्मच, काजू-किशमिश घी में भूनकर, इलायची; बर्तन में दूध पहले उफनने दें (शगुन), फिर चावल डालें।

हल्दी-अदरक की गाँठ बर्तन पर क्यों?

ताज़ी हल्दी (मंजल) शुभता-शुद्धि व फ़सल का प्रतीक — पत्तों सहित गाँठ बर्तन के गले पर बाँधी जाती है (अदरक-गाँठ साथ), आम-पत्ते; यह बर्तन को «कलश» का रूप देती है; गन्ना समृद्धि, केला शुभ।

काणुम पोंगल की कणु पिड़ि क्या है?

चौथे दिन भोर में स्त्रियाँ/बहनें हल्दी-पत्ते पर बचा पोंगल, रंगीन (हल्दी-कुंकुम) चावल, गन्ना-केला रखकर कौवों को अर्पित करती हैं — भाइयों की दीर्घायु-समृद्धि की प्रार्थना; भाई बहनों को उपहार; परिवार-भ्रमण का दिन।

पोंगल और मकर संक्रांति में अंतर?

एक ही सौर-संक्रमण (सूर्य का मकर-प्रवेश) — तमिलनाडु में थाई पोंगल (चार दिन, उफनता पोंगल), उत्तर में मकर संक्रांति (खिचड़ी-तिल-स्नान-पतंग), पंजाब में लोहड़ी (एक दिन पहले), असम में माघ बिहू; मकर संक्रांति का अलग पन्ना — रीतें वहाँ।

उत्तर-भारतीय घर में पोंगल कैसे मनाएँ?

उसी दिन (मकर संक्रांति) सुबह कोलम/रंगोली, नए बर्तन में दूध उफनाकर चावल-मूँग-गुड़ का पोंगल सूर्य को अर्पित (केले के पत्ते पर गन्ना-केला), «पोंगलो पोंगल!»; साथ खिचड़ी-तिल-गुड़ की अपनी रीत; अगले दिन गाय-सेवा, फिर परिवार-मिलन — भाव वही: सूर्य-किसान-पशु को धन्यवाद।

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