🪔 पूजा-विधि

☀️ रथ सप्तमी (अचला / सूर्य सप्तमी) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

यह घरेलू विधि है — अरुणोदय-स्नान, सूर्य-अर्घ्य व रथ-रंगोली, दिन में व्रत-दान।

रथ सप्तमी (अचला / सूर्य सप्तमी) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. अरुणोदय (सूर्योदय से ~45 मिनट पहले, ऊपर ब्रह्म-मुहूर्त देखें) में स्नान — सिर पर आक के सात पत्ते, बेर के पत्ते, अक्षत रखकर; नदी न हो तो घर में गंगाजल; स्नान-मंत्र «यद्यज्जन्मकृतं पापं मया सप्तसु जन्मसु…»।
  2. सूर्योदय (ऊपर समय) पर पूर्व-मुख खड़े होकर ताँबे के लोटे से जल-अक्षत-लाल फूल-रोली का अर्घ्य — सात बार, «ॐ घृणि सूर्याय नमः» / «ॐ सूर्याय नमः» / आदित्य-हृदय-स्तोत्र।
  3. आँगन/पूजा-स्थान में रंगोली से सात घोड़ों का रथ बनाएँ (दक्षिण-महाराष्ट्र की रीत); बीच में सूर्य-प्रतीक; रथ पर दीप।
  4. सूर्य-पूजा: सूर्य-चित्र/सूर्य-यंत्र या ताँबे की प्रतिमा को लाल कपड़ा, लाल फूल (गुड़हल/कनेर), रोली, गुड़, गेहूँ; धूप-दीप; सूर्य-चालीसा/आदित्य-हृदय; गायत्री-मंत्र 108।
  5. व्रत: दिन में फलाहार या बिना नमक का एक समय भोजन (कई घर «नमक-रहित सप्तमी» रखते हैं); सूर्यास्त के बाद भोजन।
  6. दान: गेहूँ, गुड़, लाल वस्त्र, ताँबा, घी — ब्राह्मण/ज़रूरतमंद; गाय को गुड़-रोटी; परिवार के बीमार सदस्य के लिए विशेष प्रार्थना।
  7. दक्षिण-रीत: नए मिट्टी के बर्तन में दूध-चावल सूर्य के सामने उफनाएँ (पोंगल जैसा), सूर्य को भोग — «रथ सप्तमी पोंगल»।
  8. शाम को सूर्यास्त पर भी अर्घ्य/प्रणाम; रात में सूर्य-भजन; अगले दिन भीष्माष्टमी — तर्पण (जहाँ रीत)।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

आक के पत्ते और ताँबे का लोटा — इस पर्व की ख़ास चीज़ें।

  • आक (मदार) के 7 पत्ते, बेर के पत्ते — स्नान के लिए; गंगाजल
  • ताँबे का लोटा, अक्षत, लाल फूल (गुड़हल/कनेर/गुलाब), रोली, गुड़
  • सूर्य-चित्र/यंत्र/ताँबे की प्रतिमा, लाल कपड़ा, चौकी
  • रंगोली के रंग (रथ-आकृति), दीपक, धूप, कपूर
  • भोग: गेहूँ का हलवा/खीर, गुड़-चावल, लाल फल (अनार/सेब); दक्षिण में नया मिट्टी का बर्तन, दूध, चावल, गुड़
  • दान: गेहूँ, गुड़, लाल वस्त्र, ताँबे का बर्तन, घी, दक्षिणा
  • आदित्य-हृदय/सूर्य-चालीसा पुस्तक, गायत्री-माला

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सूर्य का भोग — गेहूँ-गुड़ और नमक-रहित भोजन

सूर्य को गेहूँ, गुड़, लाल वस्तुएँ प्रिय; रथ सप्तमी का व्रत कई घरों में नमक-रहित (अलोना) होता है। दक्षिण में सूर्य के सामने उफनाया दूध-चावल।

  • भोग: गेहूँ के आटे का हलवा या खीर (गुड़ से), गुड़-चावल, अनार-सेब, लाल फल
  • व्रत-भोजन: बिना नमक — खीर, फल, दूध, मीठा दलिया; या फलाहार
  • दक्षिण (रथ सप्तमी पोंगल): नए मिट्टी के बर्तन में दूध-चावल-गुड़ उफानकर सूर्य को; चक्करै पोंगल
  • महाराष्ट्र: गुळ-पोळी/खीर, आँगन में रथ-रंगोली के पास दूध उफानना
  • दान: गेहूँ-गुड़ की पोटली, ताँबे का लोटा

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • स्नान अरुणोदय में, सिर पर आक-बेर के पत्ते — पर्व की विशेष विधि
  • सूर्योदय पर सात बार अर्घ्य, पूर्व-मुख; आदित्य-हृदय/गायत्री
  • बीमार सदस्य के आरोग्य की प्रार्थना — यही व्रत का उद्देश्य
  • गेहूँ-गुड़-ताँबा-लाल वस्त्र का दान
  • रथ-रंगोली और दूध उफानना (जहाँ रीत)

❌ क्या न करें

  • अर्घ्य देते समय जल में सूर्य की परछाईं न देखें — सीधे सूर्य को न घूरें
  • व्रत में नमक (अलोना रखने वाले), तामसिक भोजन
  • आक का दूध आँख-मुँह में न लगे — पत्ते सावधानी से (विषैला)
  • सूर्यास्त के बाद सूर्य-मंत्र से अर्घ्य नहीं — सुबह ही
  • दान का गेहूँ-गुड़ ख़राब नहीं

व्रत-कथा

भविष्य-पुराण की कथा — कांभोज-नरेश यशोवर्मा का इकलौता पुत्र जन्म से रोगी और अल्पायु था। ऋषियों ने बताया — पूर्वजन्म में यह वैश्य था, धन तो कमाया पर दान न किया, इसलिए यह फल। उपाय — माघ शुक्ल सप्तमी को अरुणोदय-स्नान, सूर्य-… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रथ सप्तमी {Y} में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की माघ शुक्ल सप्तमी है — पंचांग-गणना से; अरुणोदय-स्नान (ब्रह्म-मुहूर्त) व सूर्योदय (अर्घ्य) का दिल्ली-समय भी वहीं। सप्तमी जिस दिन सूर्योदय/अरुणोदय में हो, वही दिन।

अरुणोदय-स्नान क्या है?

सूर्योदय से लगभग 48 मिनट (4 घटी) पहले का समय अरुणोदय — उस समय सिर पर आक (मदार) के सात पत्ते और बेर के पत्ते रखकर स्नान; पाप-नाश और आरोग्य का विधान; घर में गंगाजल से भी मान्य।

सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?

पूर्व-मुख खड़े होकर ताँबे के लोटे में जल-अक्षत-लाल फूल-रोली; दोनों हाथ ऊपर उठाकर पतली धार में जल छोड़ें, सूर्य-मंत्र बोलते हुए, सात बार; जल में सूर्य की छाया न देखें, सीधे न घूरें।

रथ सप्तमी और मकर संक्रांति में क्या अंतर?

दोनों सूर्य-पर्व — संक्रांति सूर्य का मकर-प्रवेश (सौर, 14 जनवरी के आस-पास); रथ सप्तमी माघ शुक्ल सप्तमी (चंद्र-तिथि, फरवरी के आस-पास) — सूर्य-जयंती और रथ का उत्तर-मुड़ना; दक्षिण में दोनों पर दूध उफानते हैं।

सात सप्तमियों का व्रत क्या है?

रथ सप्तमी से शुरू करके लगातार सात माह की शुक्ल सप्तमियों को सूर्य-व्रत (अर्घ्य, नमक-रहित भोजन) — आरोग्य व संतान-सुख के लिए; या माघ की सप्तमी से सात वर्ष।

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