☀️ रथ सप्तमी (अचला / सूर्य सप्तमी) 2027
माघ शुक्ल सप्तमी — सूर्य देव का जन्मदिन और उनके सात-घोड़ों वाले रथ का उत्तर-मुड़ना; अरुणोदय-स्नान, सूर्य-अर्घ्य, आरोग्य का व्रत।
रथ सप्तमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है — वसंत पंचमी के दो दिन बाद। इसे अचला सप्तमी, सूर्य सप्तमी, माघ सप्तमी और आरोग्य सप्तमी भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव प्रकट हुए (सूर्य-जयंती) और उनका सात घोड़ों का रथ उत्तर दिशा की ओर मुड़ता है — वसंत का रथ।
स्त्रियाँ इस दिन अरुणोदय (सूर्योदय से पहले) स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देती हैं, परिवार के स्वास्थ्य — विशेषकर बच्चों व बुज़ुर्गों के आरोग्य — का व्रत रखती हैं; दक्षिण-महाराष्ट्र में आँगन में रथ की रंगोली और दूध-चावल उफानने की रीत है। नीचे इस साल की तिथि, अरुणोदय-स्नान का समय, विधि, सामग्री, कथा, भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
सूर्य आरोग्य के देवता हैं — «आरोग्यं भास्करादिच्छेत्»; रथ सप्तमी का स्नान-अर्घ्य त्वचा-रोग, नेत्र-रोग और दीर्घ रोगों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया; सात सप्तमियों (माघ की सप्तमी से) का व्रत भी इसी से शुरू।
अरुणोदय-स्नान: सूर्योदय से लगभग 48 मिनट पहले (अरुणोदय) नदी/घर में सिर पर आक (मदार) के सात पत्ते और बेर के पत्ते रखकर स्नान — पापनाशक; यही इस पर्व की विशेष विधि है।
यह «अबूझ» नहीं पर शुभ-सप्तमी है — दान, नए काम, सूर्य-मंत्र-आरंभ (गायत्री) के लिए उत्तम; भीष्म पितामह ने माघ शुक्ल अष्टमी को देह त्यागी, उसकी पूर्व-संध्या यही सप्तमी।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — अरुणोदय-स्नान, सूर्य-अर्घ्य व रथ-रंगोली, दिन में व्रत-दान।
- अरुणोदय (सूर्योदय से ~45 मिनट पहले, ऊपर ब्रह्म-मुहूर्त देखें) में स्नान — सिर पर आक के सात पत्ते, बेर के पत्ते, अक्षत रखकर; नदी न हो तो घर में गंगाजल; स्नान-मंत्र «यद्यज्जन्मकृतं पापं मया सप्तसु जन्मसु…»।
- सूर्योदय (ऊपर समय) पर पूर्व-मुख खड़े होकर ताँबे के लोटे से जल-अक्षत-लाल फूल-रोली का अर्घ्य — सात बार, «ॐ घृणि सूर्याय नमः» / «ॐ सूर्याय नमः» / आदित्य-हृदय-स्तोत्र।
- आँगन/पूजा-स्थान में रंगोली से सात घोड़ों का रथ बनाएँ (दक्षिण-महाराष्ट्र की रीत); बीच में सूर्य-प्रतीक; रथ पर दीप।
- सूर्य-पूजा: सूर्य-चित्र/सूर्य-यंत्र या ताँबे की प्रतिमा को लाल कपड़ा, लाल फूल (गुड़हल/कनेर), रोली, गुड़, गेहूँ; धूप-दीप; सूर्य-चालीसा/आदित्य-हृदय; गायत्री-मंत्र 108।
- व्रत: दिन में फलाहार या बिना नमक का एक समय भोजन (कई घर «नमक-रहित सप्तमी» रखते हैं); सूर्यास्त के बाद भोजन।
- दान: गेहूँ, गुड़, लाल वस्त्र, ताँबा, घी — ब्राह्मण/ज़रूरतमंद; गाय को गुड़-रोटी; परिवार के बीमार सदस्य के लिए विशेष प्रार्थना।
- दक्षिण-रीत: नए मिट्टी के बर्तन में दूध-चावल सूर्य के सामने उफनाएँ (पोंगल जैसा), सूर्य को भोग — «रथ सप्तमी पोंगल»।
- शाम को सूर्यास्त पर भी अर्घ्य/प्रणाम; रात में सूर्य-भजन; अगले दिन भीष्माष्टमी — तर्पण (जहाँ रीत)।
पूजा-सामग्री की सूची
आक के पत्ते और ताँबे का लोटा — इस पर्व की ख़ास चीज़ें।
- आक (मदार) के 7 पत्ते, बेर के पत्ते — स्नान के लिए; गंगाजल
- ताँबे का लोटा, अक्षत, लाल फूल (गुड़हल/कनेर/गुलाब), रोली, गुड़
- सूर्य-चित्र/यंत्र/ताँबे की प्रतिमा, लाल कपड़ा, चौकी
- रंगोली के रंग (रथ-आकृति), दीपक, धूप, कपूर
- भोग: गेहूँ का हलवा/खीर, गुड़-चावल, लाल फल (अनार/सेब); दक्षिण में नया मिट्टी का बर्तन, दूध, चावल, गुड़
- दान: गेहूँ, गुड़, लाल वस्त्र, ताँबे का बर्तन, घी, दक्षिणा
- आदित्य-हृदय/सूर्य-चालीसा पुस्तक, गायत्री-माला
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पंचांग देखें →व्रत-कथा
भविष्य-पुराण की कथा — कांभोज-नरेश यशोवर्मा का इकलौता पुत्र जन्म से रोगी और अल्पायु था। ऋषियों ने बताया — पूर्वजन्म में यह वैश्य था, धन तो कमाया पर दान न किया, इसलिए यह फल। उपाय — माघ शुक्ल सप्तमी को अरुणोदय-स्नान, सूर्य-अर्घ्य व व्रत। राजा ने पुत्र से यह व्रत कराया — रोग गया, आयु बढ़ी और वह प्रतापी राजा हुआ। तभी से रथ सप्तमी आरोग्य व आयु का व्रत।
सूर्य-जयंती — कश्यप ऋषि और अदिति के पुत्र-रूप में आदित्य (सूर्य) का प्रकट होना माघ शुक्ल सप्तमी को माना गया; इसी दिन से सूर्य का रथ (सात घोड़े = सात दिन/सात रंग, एक पहिया = वर्ष, बारह अरे = बारह मास, सारथी अरुण) उत्तर की ओर मुड़ता है — यही «रथ» सप्तमी।
भीष्म-कथा — शर-शय्या पर लेटे भीष्म ने उत्तरायण की प्रतीक्षा की और माघ शुक्ल अष्टमी (रथ सप्तमी के अगले दिन) को देह त्यागी; इसलिए यह सप्तमी-अष्टमी पितरों व दीर्घायु से भी जुड़ी है।
सूर्य का भोग — गेहूँ-गुड़ और नमक-रहित भोजन
सूर्य को गेहूँ, गुड़, लाल वस्तुएँ प्रिय; रथ सप्तमी का व्रत कई घरों में नमक-रहित (अलोना) होता है। दक्षिण में सूर्य के सामने उफनाया दूध-चावल।
- भोग: गेहूँ के आटे का हलवा या खीर (गुड़ से), गुड़-चावल, अनार-सेब, लाल फल
- व्रत-भोजन: बिना नमक — खीर, फल, दूध, मीठा दलिया; या फलाहार
- दक्षिण (रथ सप्तमी पोंगल): नए मिट्टी के बर्तन में दूध-चावल-गुड़ उफानकर सूर्य को; चक्करै पोंगल
- महाराष्ट्र: गुळ-पोळी/खीर, आँगन में रथ-रंगोली के पास दूध उफानना
- दान: गेहूँ-गुड़ की पोटली, ताँबे का लोटा
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
रथ सप्तमी दक्षिण-पश्चिम में बड़ी, उत्तर में घरेलू सूर्य-व्रत; तिरुमला में रथ-सप्तमी का महोत्सव।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- स्नान अरुणोदय में, सिर पर आक-बेर के पत्ते — पर्व की विशेष विधि
- सूर्योदय पर सात बार अर्घ्य, पूर्व-मुख; आदित्य-हृदय/गायत्री
- बीमार सदस्य के आरोग्य की प्रार्थना — यही व्रत का उद्देश्य
- गेहूँ-गुड़-ताँबा-लाल वस्त्र का दान
- रथ-रंगोली और दूध उफानना (जहाँ रीत)
❌ क्या न करें
- अर्घ्य देते समय जल में सूर्य की परछाईं न देखें — सीधे सूर्य को न घूरें
- व्रत में नमक (अलोना रखने वाले), तामसिक भोजन
- आक का दूध आँख-मुँह में न लगे — पत्ते सावधानी से (विषैला)
- सूर्यास्त के बाद सूर्य-मंत्र से अर्घ्य नहीं — सुबह ही
- दान का गेहूँ-गुड़ ख़राब नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रथ सप्तमी 2027 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की माघ शुक्ल सप्तमी है — पंचांग-गणना से; अरुणोदय-स्नान (ब्रह्म-मुहूर्त) व सूर्योदय (अर्घ्य) का दिल्ली-समय भी वहीं। सप्तमी जिस दिन सूर्योदय/अरुणोदय में हो, वही दिन।
अरुणोदय-स्नान क्या है?
सूर्योदय से लगभग 48 मिनट (4 घटी) पहले का समय अरुणोदय — उस समय सिर पर आक (मदार) के सात पत्ते और बेर के पत्ते रखकर स्नान; पाप-नाश और आरोग्य का विधान; घर में गंगाजल से भी मान्य।
सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?
पूर्व-मुख खड़े होकर ताँबे के लोटे में जल-अक्षत-लाल फूल-रोली; दोनों हाथ ऊपर उठाकर पतली धार में जल छोड़ें, सूर्य-मंत्र बोलते हुए, सात बार; जल में सूर्य की छाया न देखें, सीधे न घूरें।
रथ सप्तमी और मकर संक्रांति में क्या अंतर?
दोनों सूर्य-पर्व — संक्रांति सूर्य का मकर-प्रवेश (सौर, 14 जनवरी के आस-पास); रथ सप्तमी माघ शुक्ल सप्तमी (चंद्र-तिथि, फरवरी के आस-पास) — सूर्य-जयंती और रथ का उत्तर-मुड़ना; दक्षिण में दोनों पर दूध उफानते हैं।
सात सप्तमियों का व्रत क्या है?
रथ सप्तमी से शुरू करके लगातार सात माह की शुक्ल सप्तमियों को सूर्य-व्रत (अर्घ्य, नमक-रहित भोजन) — आरोग्य व संतान-सुख के लिए; या माघ की सप्तमी से सात वर्ष।
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। आक (मदार) विषैला है — पत्ते सावधानी से, रोग का इलाज चिकित्सक से।
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