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🪔 व्रत-त्योहार

💛 वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

माघ शुक्ल पंचमी — पीले रंग का पर्व; सरस्वती-पूजा, बच्चों का विद्यारंभ (अक्षर-आरंभ), पीले चावल-केसरिया भात, और अबूझ विवाह-मुहूर्त।

वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) 2027 की तिथि
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
माघ · शुक्ल पक्ष · पंचमी (विक्रम संवत 2084)
🌅 सूर्योदय7:03 AM
⭐ अभिजित मुहूर्त12:11 PM – 12:59 PM
📿 तिथि-कालपंचमी 11 फ़रवरी, 3:05 AM → 12 फ़रवरी, 3:18 AM
🕉 ब्रह्म मुहूर्त05:27 AM – 06:15 AM
🐄 गोधूलि बेला5:45 PM – 6:30 PM
⛔ राहुकाल (टालें)01:58 PM – 03:21 PM
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है — मौनी अमावस्या के पाँच दिन बाद। यह वसंत ऋतु के आगमन और विद्या की देवी सरस्वती के प्रकट होने का दिन है। घर-स्कूल में पीले फूल, पीले वस्त्र, पीले चावल; बच्चों की पट्टी-पूजा और अक्षर-आरंभ (विद्यारंभ) इसी दिन कराया जाता है।

स्त्रियों के लिए यह पीले रंग, सरसों के खेत और घर के बच्चों की पढ़ाई का पर्व है; यह अबूझ मुहूर्त भी है — बिना पंचांग देखे विवाह, गृह-प्रवेश, नया काम इस दिन शुभ। नीचे इस साल की तिथि, पूजा-मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, पीले पकवान और इलाक़ों की रीत दी गई है।

महत्व — यह व्रत क्यों

सरस्वती-पूजा: विद्या, संगीत, कला की देवी — छात्र, कलाकार, शिक्षक इस दिन किताब-कलम-वाद्य की पूजा करते हैं; पूर्वी भारत में यही «सरस्वती पूजा» का मुख्य दिन है (बंगाल-बिहार-ओडिशा-असम)।

पीला रंग सरसों के फूल, सूर्य के तेज और बुद्धि का प्रतीक — इसलिए पीले वस्त्र, पीले फूल (गेंदा-सरसों), पीला भोजन (केसरिया भात, बेसन-लड्डू, बूंदी)।

अबूझ मुहूर्त: वसंत पंचमी साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में गिनी जाती है (कुछ परंपराएँ) — विवाह-मुंडन-गृहप्रवेश इस दिन बिना मुहूर्त-विचार; इसीलिए इस दिन देश में सबसे ज़्यादा शादियाँ होती हैं। कामदेव-रति की पूजा और होली की तैयारी (होलिका-डंडा गाड़ना) भी इसी दिन से।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह घरेलू विधि है — सुबह पीले वस्त्र व सरस्वती-पूजा, बच्चों का विद्यारंभ, पीले पकवान; बंगाल-बिहार की रीत अलग से नीचे।

  1. सुबह स्नान, पीले/बसंती वस्त्र; पूजा-स्थान पर चौकी पर पीला कपड़ा, माँ सरस्वती की मूर्ति/चित्र (श्वेत वस्त्र, वीणा, हंस); साथ में गणेश जी।
  2. कलश-स्थापना; सरस्वती को पीले-सफ़ेद फूल, गेंदा-सरसों के फूल, पीला चंदन/हल्दी, अक्षत, सफ़ेद/पीली मिठाई; «ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः» का 108 जप या सरस्वती-वंदना «या कुंदेंदु तुषारहार धवला»।
  3. पुस्तक-कलम-कॉपी, बच्चों का स्कूल-बैग, वाद्य-यंत्र (हारमोनियम/तबला), लैपटॉप — सब माँ के सामने रखकर रोली-अक्षत-फूल चढ़ाएँ; इस दिन इन्हें छूना-पढ़ना वर्जित (बंगाल-रीत) या शुभ-आरंभ (उत्तर-रीत)।
  4. विद्यारंभ/अक्षर-आरंभ: 2-5 वर्ष के बच्चे को गोद में बिठाकर थाली में चावल/हल्दी बिछाकर उसकी उँगली से «ॐ» या «अ» लिखवाएँ, फिर पट्टी-खड़िया से; गुरु/बड़े आशीर्वाद दें; बच्चे को पीली मिठाई।
  5. भोग — केसरिया भात/मीठे पीले चावल, बेसन-लड्डू, बूंदी, पीले फल (केला); सरस्वती-आरती; प्रसाद बच्चों-पड़ोस में।
  6. स्त्रियाँ: बाल में पीले फूल/पीली चुनरी, सरसों के खेत/पौधे को जल; घर में नए काम — बच्चों की पढ़ाई का संकल्प, नया वाद्य/किताब।
  7. यह अबूझ मुहूर्त है — विवाह/गृह-प्रवेश/दुकान-आरंभ इस दिन बिना अलग मुहूर्त के; कामदेव-रति की भी पूजा (दांपत्य-प्रेम)।
  8. अगले दिन (षष्ठी) सरस्वती-विसर्जन (बंगाल-बिहार: मूर्ति-विसर्जन, «दधिकर्म»); उत्तर भारत में इसी दिन से होली का डंडा (होलिका) गाड़ने की तैयारी।

पूजा-सामग्री की सूची

पीला — फूल, वस्त्र, भोग; और बच्चों की किताब-कलम।

  • माँ सरस्वती की मूर्ति/चित्र, गणेश जी, चौकी, पीला कपड़ा
  • पीले-सफ़ेद फूल — गेंदा, सरसों, गुलाब; फूल-माला
  • हल्दी/पीला चंदन, रोली, अक्षत, मौली, कलश, आम के पत्ते
  • किताब-कलम-कॉपी-स्लेट, वाद्य-यंत्र — पूजा में रखने को
  • विद्यारंभ को थाली, चावल/हल्दी, खड़िया-पट्टी
  • भोग: केसर, चावल, शक्कर (केसरिया भात), बेसन-लड्डू, बूंदी, केला, दूध-खीर
  • दीपक, धूप, कपूर, आरती-थाली, सरस्वती-वंदना पुस्तक
  • बच्चों-छात्रों को देने को पीली मिठाई, कलम

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व्रत-कथा

सृष्टि रचकर ब्रह्मा जी ने देखा — सब कुछ मौन और नीरस है; न स्वर, न संगीत। उन्होंने कमंडल से जल छिड़का तो एक तेजस्वी देवी प्रकट हुईं — हाथों में वीणा, पुस्तक, माला, वर-मुद्रा। ब्रह्मा ने कहा — वीणा बजाओ; वीणा के पहले स्वर से सृष्टि में वाणी, संगीत, बुद्धि आई। यही सरस्वती हैं — «वागीश्वरी»; और यह दिन था माघ शुक्ल पंचमी।

दूसरी कथा वसंत-कामदेव की — शिव तपस्या में लीन थे, तारकासुर-वध के लिए शिव-पुत्र चाहिए था; देवताओं ने कामदेव को भेजा, उन्होंने वसंत को साथ लिया — इसी दिन वसंत ने पृथ्वी पर फूल खिलाए, सरसों पीली हुई। कामदेव के बाण से शिव का ध्यान टूटा (और कामदेव भस्म हुए — होली से जुड़ी कथा)। इसीलिए वसंत पंचमी से होली तक फाग-ऋतु।

एक लोक-मान्यता — कालिदास मूर्ख थे, पत्नी विद्योत्तमा के तिरस्कार से नदी में डूबने चले; सरस्वती ने प्रकट होकर उन्हें ज्ञान दिया — इसी दिन। इसलिए विद्यार्थी सरस्वती की शरण लेते हैं।

पीला भोग — केसरिया भात और बेसन-लड्डू

वसंत पंचमी का भोजन पीला और मीठा — केसरिया भात (मीठे पीले चावल: चावल-शक्कर-केसर-घी-मेवे), बेसन-लड्डू, बूंदी; बंगाल में खिचुड़ी-बेगुन भाजा और कुल (बेर) की चटनी; बिहार में सरस्वती-पूजा का भोग खिचड़ी-चोखा।

  • केसरिया भात (4 लोगों को): 1 कप चावल, ¾ कप शक्कर, चुटकी केसर दूध में, 3 चम्मच घी, इलायची, मेवे — घी में चावल भूनकर पकाएँ, बाद में शक्कर-केसर
  • बेसन/बूंदी के लड्डू, मालपुआ, पीली खीर (केसर), केला-अमरूद
  • बंगाल: खिचुड़ी, लाबड़ा, बेगुन भाजा, कुल (बेर) — पंचमी को पहली बार बेर खाने की रीत, चटनी, पायेश
  • बिहार-झारखंड: सरस्वती-पूजा की खिचड़ी-चोखा, बूंदी, बेर
  • पंजाब: मीठे चावल (पीले), पतंगबाज़ी के साथ सरसों का साग-मक्के की रोटी

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

उत्तर में पीला-विद्यारंभ-विवाह, पूर्व में सरस्वती-पूजा का पंडाल, पंजाब में पतंग — एक पंचमी, कई रूप।

उत्तर प्रदेश-हरियाणा-दिल्ली-राजस्थान: पीले वस्त्र, केसरिया भात, सरस्वती-पूजा, बच्चों का विद्यारंभ; सबसे ज़्यादा विवाह इसी दिन (अबूझ मुहूर्त); ब्रज (मथुरा-वृंदावन) में इसी दिन से 40 दिन का फाग — बाँके-बिहारी को गुलाल; राजस्थान में पीली पगड़ी-चुनरी, केसर-खीर।
बंगाल-असम-ओडिशा-त्रिपुरा: «सरस्वती पूजो/श्रीपंचमी» — घर-स्कूल-पंडाल में मूर्ति, बच्चों का «हाते-खोड़ी» (अक्षर-आरंभ), पीली साड़ी (बसंती), किताबें माँ के चरणों में — उस दिन पढ़ना नहीं; कुल (बेर) पहली बार, खिचुड़ी-भोग; अगले दिन «दधिकर्म» और विसर्जन; ओडिशा में «बसंत पंचमी» पर स्कूलों में उत्सव।
बिहार-झारखंड: सरस्वती-पूजा मोहल्ले-मोहल्ले पंडाल, युवा-समितियाँ, «हे शारदे माँ» कीर्तन, प्रसाद खिचड़ी-बूंदी-बेर; विसर्जन-जुलूस अगले दिन; घरों में पीले चावल।
पंजाब-हिमाचल: «बसंत» — पीली पगड़ी-दुपट्टे, पतंगबाज़ी (पुरानी लाहौर-अमृतसर परंपरा), सरसों के खेत, मीठे पीले चावल; गुरुद्वारों में बसंत-राग कीर्तन; हिमाचल में सरस्वती-पूजा और मीठे चावल।
महाराष्ट्र-गुजरात: «वसंत पंचमी» पर सरस्वती/लक्ष्मी-नारायण पूजा, पीले वस्त्र; महाराष्ट्र में नव-विवाहितों का पहला वसंत — पीले कपड़ों में विष्णु-पूजा; गुजरात में पीली चूँदड़ी, मंदिर-उत्सव।
दक्षिण भारत: यहाँ सरस्वती-पूजा मुख्यतः नवरात्रि (आयुध-पूजा/विद्यारंभ विजयादशमी) पर; वसंत पंचमी को «श्रीपंचमी» — कुछ मंदिरों में पूजा; केरल में विद्यारंभ विजयादशमी को।
🙏 आपके घर की रीत इससे अलग है? यहाँ लिखिए

दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला भोग — पर्व की पहचान
  • बच्चों का विद्यारंभ/किताब-कलम की पूजा — विद्या का संकल्प
  • विवाह/गृह-प्रवेश/नया काम — अबूझ मुहूर्त, पर शुभ-समय (अभिजित) और भी अच्छा
  • सरस्वती-वंदना पूरे परिवार के साथ; छात्रों को कलम-मिठाई का उपहार
  • सरसों/पौधों को जल — वसंत का स्वागत

❌ क्या न करें

  • बंगाल-बिहार की रीत में पूजा-दिन किताब छूना/पढ़ना नहीं (माँ के चरणों में); उत्तर भारत में शुभ-आरंभ — अपनी रीत मानें
  • इस दिन काले/सफ़ेद-मटमैले वस्त्र नहीं — पीला-बसंती
  • पेड़ काटना, फूल तोड़कर फेंकना — वसंत के दिन नहीं
  • बच्चों को विद्यारंभ में डराना-डाँटना नहीं — यह उत्सव है
  • मूर्ति-विसर्जन (बंगाल-बिहार) में प्लास्टिक-रंग नदी में नहीं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वसंत पंचमी 2027 में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की माघ शुक्ल पंचमी है — पंचांग-गणना से; पूजा का अभिजित-मुहूर्त (दिल्ली) भी वहीं। पंचमी दो दिन पूर्वाह्न को छुए तो पहला दिन (पूर्वाह्न-व्यापिनी) लिया जाता है।

क्या वसंत पंचमी को शादी बिना मुहूर्त के कर सकते हैं?

हाँ — यह अबूझ मुहूर्त माना जाता है (उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा विवाह इसी दिन); फिर भी लग्न-समय अभिजित/गोधूलि में रखें। मुहूर्त-पन्ने पर विवाह-तिथियाँ देखें।

विद्यारंभ कैसे कराएँ?

बच्चे (2-5 वर्ष) को पीले कपड़े पहनाकर सरस्वती के सामने बिठाएँ; थाली में चावल/हल्दी बिछाकर उसकी उँगली पकड़कर «ॐ» या «अ» लिखवाएँ; फिर पट्टी-खड़िया; गुरु/बड़ों का आशीर्वाद, मिठाई। स्कूल/पंडित से भी कराया जा सकता है।

पीला रंग ही क्यों?

वसंत में सरसों पीली, सूर्य तेज; पीला रंग बुद्धि-ऊर्जा-शुभता का प्रतीक और सरस्वती (व विष्णु) को प्रिय — इसलिए वस्त्र-फूल-भोजन सब पीला।

वसंत पंचमी और होली का क्या संबंध?

इसी दिन से 40 दिन का फाग/वसंतोत्सव शुरू — ब्रज में गुलाल, गाँवों में होलिका का डंडा गाड़ना; कामदेव-वसंत की कथा शिव-होली से जुड़ती है। होली फाल्गुन पूर्णिमा को।

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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है।

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