📖 व्रत-कथा

🕉 सोमवार व्रत (सावन सोमवार व सोलह सोमवार) व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

सोलह सोमवार की कथा: अमरावती (या मंदिर) में शिव-पार्वती चौसर खेलने बैठे; पार्वती ने पुजारी से पूछा «कौन जीतेगा?» — पुजारी ने बिना सोचे «शिव» कहा; पार्वती जीतीं, क्रोध में पुजारी को कोढ़ी होने का शाप; अप्सराओं ने पुजारी को सोलह सोमवार का व्रत बताया — 16 सोमवार गेहूँ-घी-गुड़ का चूरमा बनाकर शिव-पूजा, 17वें सोमवार उद्यापन; पुजारी ठीक हुआ; पार्वती ने वही व्रत कर रूठे कार्तिकेय को लौटाया, कार्तिकेय ने बिछड़े मित्र को, मित्र ने राजकुमारी से विवाह (हाथिनी की माला) — फिर राजा ने बेटी-दामाद को इस व्रत से पाया। सीख — सोलह सोमवार से रोग-मुक्ति, मित्र-मिलन, विवाह, संतान।

साहूकार-पुत्र की सोमवार-कथा: एक निःसंतान साहूकार हर सोमवार व्रत करता; शिव ने पार्वती के आग्रह पर पुत्र दिया पर आयु 12 वर्ष; पुत्र को मामा के साथ काशी भेजा; रास्ते में राजकुमारी से विवाह; काशी में यज्ञ करते 12वें वर्ष प्राण गए — मामा रोया; उधर से जाते शिव-पार्वती ने पार्वती के आग्रह पर उसे जीवित किया — «सोमवार-व्रती का पुत्र है»; लौटकर राजा ने बेटी-दामाद को अपनाया, साहूकार को पुत्र मिला। सीख — सोमवार व्रत संतान व दीर्घायु देता है।

सावन की कथा: समुद्र-मंथन का हलाहल शिव ने श्रावण में पिया, विष की ज्वाला में देवताओं-ऋषियों ने गंगाजल चढ़ाया — इसलिए सावन में जल-अभिषेक व कावड़ (रावण को पहला कावड़िया मानते हैं — बैजनाथ); पार्वती ने श्रावण में सोमवार-व्रत कर शिव को वर में पाया — इसलिए कन्याएँ सावन-सोमवार रखतीं; मार्कंडेय ऋषि की दीर्घायु सोमवार-शिव-पूजा से।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

सावन में शिव: समुद्र-मंथन का विष श्रावण में पिया, देवताओं ने जल चढ़ाकर ज्वाला शांत की — इसलिए सावन में जलाभिषेक व कावड़; पार्वती ने श्रावण में तप कर शिव को पाया; सावन का हर सोमवार शिव-पार्वती-मिलन का — सुहागिनें हरी चूड़ी-मेहँदी, कन्याएँ वर-हेतु; सावन-सोमवार की संख्या 4 या 5 (पूर्णिमांत श्रावण में — उत्तर भारत; अमांत श्रावण में महाराष्ट्र-गुजरात 15 दिन बाद शुरू)।

सोलह सोमवार: शिव-पार्वती की चौसर-कथा (नीचे) — पार्वती की सखी/अमरावती का पुजारी; 16 सोमवार पूरे होने पर 17वें सोमवार को उद्यापन — 16 दंपति/ब्राह्मण-भोजन, चूरमा (गेहूँ-घी-गुड़ का — सोलह सोमवार का विशिष्ट प्रसाद), शिव-हवन; विवाह-बाधा, कुंडली में मंगल/शनि-विलंब, सुहाग-रक्षा हेतु प्रसिद्ध।

चंद्र (सोम) का वार — मन-शांति, माता-सुख, चंद्र-दोष-शांति (शिव के मस्तक पर चंद्र); सोमवार को शिव-पूजा + सफ़ेद वस्तु-दान; सावन-सोमवार पर सोमवती अमावस्या या सोम प्रदोष पड़े तो दुर्लभ महायोग (अमावस्या व त्रयोदशी एक दिन नहीं हो सकतीं)।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 सोमवार व्रत (सावन सोमवार व सोलह सोमवार) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सावन के सोमवार {Y} में कब-कब हैं?

ऊपर सूची में «श्रावण (सावन) सोमवार» लिखी तिथियाँ ही सावन के सोमवार हैं (पूर्णिमांत श्रावण — उत्तर भारत; 4 या 5); महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण का अमांत श्रावण 15 दिन बाद शुरू होता है — वहाँ के श्रावण-सोमवार = सूची के श्रावण-शुक्ल वाले सोमवार + उनके बाद के (पूर्णिमांत भाद्रपद-कृष्ण, यानी अमांत श्रावण-कृष्ण) सोमवार; अधिक मास हो तो «अधिक श्रावण» के सोमवार अलग गिने जाते हैं।

सोलह सोमवार व्रत कब से शुरू करें और नियम क्या हैं?

किसी शुक्ल-पक्ष के सोमवार से (श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष, या सावन के पहले सोमवार से श्रेष्ठ); लगातार 16 सोमवार — सुबह अभिषेक, शाम शिव-पार्वती पूजा, कथा, चूरमा (गेहूँ-घी-गुड़) का भोग व वही प्रसाद स्वयं खाना (बाँटें भी), एक समय भोजन (कई घर बिना नमक); 17वें सोमवार उद्यापन — 16 दंपति/ब्राह्मण-भोजन, हवन, दान; मासिक-धर्म आए तो पूजा घर का कोई और करे, गिनती चलती रहे (रीत-भेद)।

क्या सोमवार व्रत में नमक खा सकते हैं?

साधारण/सावन सोमवार में सेंधा नमक का फलाहार या एक समय सात्विक भोजन चलता है; सोलह सोमवार में कई परंपराएँ बिना नमक (मीठा — चूरमा-खीर-फल) रखती हैं; रोगी-गर्भवती सेंधा नमक व फल-दूध — स्वास्थ्य पहले; व्रत का सार शिव-स्मरण व संयम।

कन्याएँ सावन-सोमवार क्यों रखती हैं?

पार्वती ने श्रावण में तप व सोमवार-व्रत कर शिव को पति-रूप में पाया — इसलिए कन्याएँ मनचाहे/शिव-जैसे वर हेतु सावन के सोमवार व सोलह सोमवार रखती हैं; हरी चूड़ी-मेहँदी, पार्वती को सुहाग-सामग्री; विवाह-विलंब (कुंडली में मंगल/शनि/सप्तम-दोष) में यह व्रत लोक-प्रसिद्ध उपाय — ज्योतिष-जाँच साथ।

शिवामूठ क्या है?

महाराष्ट्र की सावन-सोमवार रीत — नवविवाहिता (पहले पाँच साल) हर सावन-सोमवार शिवलिंग पर एक मुट्ठी अनाज अर्पित करती है — पहले सोमवार चावल, दूसरे तिल, तीसरे मूँग, चौथे जौ, पाँचवें सतुआ; «शिवा शिवा महादेवा…» कहकर; उपवास साबूदाणा-वरी; सौभाग्य-संतान की कामना।

सोमवार व्रत और सोम प्रदोष/सोमवती अमावस्या में क्या संबंध?

तीनों शिव-चंद्र से जुड़े — सोमवार व्रत (हर सोमवार/सावन/सोलह), सोम प्रदोष (सोमवार को त्रयोदशी — प्रदोष-काल पूजा), सोमवती अमावस्या (सोमवार को अमावस्या — पीपल-परिक्रमा); एक ही दिन दो मिल जाएँ (सावन-सोमवार + सोम प्रदोष) तो महायोग — वही पूजा, फल कई गुना; ऊपर सूची में सोमवार, प्रदोष-पन्ने पर प्रदोष, अमावस्या-पन्ने पर सोमवती।

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