📖 व्रत-कथा

💍 विवाह पंचमी (राम-सीता विवाह) व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

मिथिला के राजा जनक ने हल चलाते समय धरती से मिली कन्या को पुत्री की तरह पाला — वे सीता (जानकी) हुईं। जनक ने प्रण किया कि जो शिव का पिनाक धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ा दे, उसी से सीता का विवाह होगा। देश-देश के राजा आए, कोई धनुष हिला भी न सका; रावण-बाणासुर तक हारकर लौटे।

गुरु विश्वामित्र के साथ आए राम ने धनुष उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया — «भरे भुवन घोर कठोर रव»। सीता ने राम को वरमाला पहनाई। दशरथ बारात लेकर अयोध्या से आए; मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी, शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति — चारों भाइयों का विवाह जनकपुर में हुआ।

यही प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास ने बालकांड में गाया — और मानस का यह भाग पढ़ने-सुनने से विवाह-बाधा दूर होने की मान्यता है। इसी दिन (एक मत से) तुलसीदास ने रामचरितमानस पूरी की थी, इसलिए मानस-जयंती भी।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

राम-सीता का विवाह आदर्श दांपत्य का प्रतीक है — इस दिन का व्रत विवाह-बाधा दूर करने और पति-पत्नी में प्रेम बनाए रखने के लिए किया जाता है। कुँवारी कन्याएँ राम-जैसा वर पाने की कामना से रखती हैं।

रामचरितमानस के बालकांड का धनुष-यज्ञ और विवाह-प्रसंग इस दिन पढ़ा जाता है — «मंगल भवन अमंगल हारी» और «सिया-राम मय सब जग जानी» के साथ; मानस का पाठ पूरा करना विशेष फलदायी माना गया।

मिथिला में यह दिन ससुराल-मायके की मिठास का पर्व है — सीता मिथिला की बेटी हैं, इसलिए यहाँ राम «जमाई» हैं और बारात की सारी छेड़-छाड़ लोकगीतों में है।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 विवाह पंचमी (राम-सीता विवाह) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विवाह पंचमी {Y} में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी है — पंचांग-गणना से; अभिजित व गोधूलि मुहूर्त (दिल्ली) भी वहीं।

क्या विवाह पंचमी को शादी करना शुभ है?

यह राम-सीता के विवाह का दिन है, पर लोक-परंपरा में इस दिन विवाह से बचा जाता है — क्योंकि राम-सीता को वियोग सहना पड़ा; मिथिला-अवध में यह मान्यता प्रबल है। मुहूर्त-पन्ने पर शुभ तिथियाँ देखें।

यह व्रत कौन रखे?

सुखी दांपत्य की कामना से विवाहित स्त्रियाँ, और अच्छे वर की कामना से कुँवारी कन्याएँ; विवाह में बाधा हो तो इस दिन बालकांड के विवाह-प्रसंग का पाठ विशेष माना गया।

मानस-जयंती क्या है?

एक मत से तुलसीदास जी ने रामचरितमानस इसी विवाह पंचमी को पूरी की थी, इसलिए इस दिन मानस-पाठ और तुलसी-स्मरण।

विवाह पंचमी पर मिथिला और अयोध्या में क्या होता है?

जनकपुर (नेपाल) में राम-जानकी विवाह की बारात अयोध्या से पहुँचती है — मंडप, सिंदूरदान, कोहबर, मैथिल विवाह-गीत, हज़ारों श्रद्धालु; अयोध्या में कनक-भवन व राम-मंदिर में विवाह-झाँकी, रामलीला का विवाह-प्रसंग; मिथिला के घरों में सीता को बेटी मानकर «बेटी की विदाई» के गीत गाए जाते हैं।

विवाह में देरी हो तो इस दिन कौन-सा उपाय करें?

सुबह राम-सीता की पूजा कर «ॐ जानकीवल्लभाय नमः» 108 जप, रामचरितमानस का बालकांड विवाह-प्रसंग (धनुष-यज्ञ से विदाई तक) पाठ, सुहागिन/कन्या को पीले वस्त्र-फल-सुहाग-सामग्री दान, केले के पेड़ को जल; विश्वास है कि सीता-राम के विवाह-दिन की प्रार्थना से विवाह-बाधा दूर होती है — कुंडली में मांगलिक/शुक्र-गुरु दोष हो तो पंडित से अलग उपाय।

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