| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | गुरुवार, 5 अगस्त 2027 | 6:45 AM – 10:58 AM AEST | 4 अगस्त, 12:50 PM → 5 अगस्त, 9:39 AM AEST |
| मेलबर्न AEST/AEDT | गुरुवार, 5 अगस्त 2027 | 7:17 AM – 11:25 AM AEST | 4 अगस्त, 12:50 PM → 5 अगस्त, 9:39 AM AEST |
| ब्रिस्बेन AEST | गुरुवार, 5 अगस्त 2027 | 6:27 AM – 10:49 AM AEST | 4 अगस्त, 12:50 PM → 5 अगस्त, 9:39 AM AEST |
| पर्थ AWST | गुरुवार, 5 अगस्त 2027 | 7:03 AM – 11:19 AM AWST | 4 अगस्त, 10:50 AM → 5 अगस्त, 7:39 AM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | गुरुवार, 5 अगस्त 2027 | 7:07 AM – 11:19 AM ACST | 4 अगस्त, 12:20 PM → 5 अगस्त, 9:09 AM ACST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
तीज = तृतीया — गौरी की तिथि; हरियाली तीज पार्वती (तीज माता) की पूजा का दिन है: शिव-पार्वती के मिलन का पर्व, इसलिए नई विवाहिता का पहला सावन मायके में और तीज पर ससुराल से «सिंधारा/सिंजारा» (वस्त्र-मिठाई-श्रृंगार) आना — मायके-ससुराल का प्रेम-सूत्र।
हरा रंग सावन-समृद्धि-सुहाग का — हरी चूड़ियाँ इस दिन बदली जाती हैं, मेहंदी जितनी गहरी उतना पति का प्रेम (लोक-विश्वास); झूला — कृष्ण-राधा/शिव-पार्वती का झूला, नीम-आम पर रस्सी-पटरे का झूला; सावन के गीत — कजरी, झूला, «झूला पड़ गयो अम्बुआ की डार»।
व्रत निर्जला/फलाहार (कई घर सिर्फ़ पूजा-उत्सव); जयपुर की तीज-सवारी (तीज माता की शाही सवारी), बनारस-मिर्ज़ापुर की कजरी, हरियाणा-पंजाब की «तीयाँ» (झूले-गिद्दा) — पूरा सावन इसी के इर्द-गिर्द।
नहीं। भारत: बुधवार, 4 अगस्त 2027; सिडनी (ऑस्ट्रेलिया): गुरुवार, 5 अगस्त 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:45 AM से 10:58 AM (AEST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
तीनों गौरी-तृतीया व्रत — हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया (सावन, झूले-मेहंदी, उत्सव-प्रधान); कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया (15 दिन बाद — नीम-पूजा, चंद्र-अर्घ्य, बुंदेलखंड-राजस्थान); हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया (एक महीने बाद — निर्जला, सबसे कठोर, यूपी-बिहार-महाराष्ट्र)।
तीज से एक दिन पहले (या तीज पर) मायके से बेटी/बहू को भेजा जाने वाला उपहार — मेहंदी, हरी चूड़ी, लहरिया, घेवर-फीणी, श्रृंगार; ससुराल से नई बहू को «सिंधारा» — दोनों ओर से प्रेम का सूत्र।
हरियाली तीज पर नहीं — यह चौथ नहीं है; प्रदोष-पूजा के बाद व्रत खुलता है। कजरी तीज पर चंद्र-अर्घ्य की रीत है (कृष्ण तृतीया — चाँद देर से)।
हरा सावन-हरियाली, समृद्धि और सुहाग का रंग — इस दिन पुरानी चूड़ियाँ उतारकर नई हरी पहनना पार्वती का श्रृंगार दोहराना है; मेहंदी जितनी रचे, उतना प्रेम — लोक-विश्वास।