| शहर | तारीख | निशीथ काल पूजा (अर्धरात्रि) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 | 11:29 PM – 12:19 AM AEST | 4 सितंबर, 6:56 AM → 5 सितंबर, 4:44 AM AEST |
| मेलबर्न AEST/AEDT | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 | 11:54 PM – 12:44 AM AEST | 4 सितंबर, 6:56 AM → 5 सितंबर, 4:44 AM AEST |
| ब्रिस्बेन AEST | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 | 11:22 PM – 12:12 AM AEST | 4 सितंबर, 6:56 AM → 5 सितंबर, 4:44 AM AEST |
| पर्थ AWST | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 | 11:51 PM – 12:40 AM AWST | 4 सितंबर, 4:56 AM → 5 सितंबर, 2:44 AM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 | 11:49 PM – 12:40 AM ACST | 4 सितंबर, 6:26 AM → 5 सितंबर, 4:14 AM ACST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्मार्त नियम: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी जिस निशीथ (अर्धरात्रि) में हो, रोहिणी-युक्त दिन को वरीयता; सप्तमी-विद्धा अष्टमी हो और अगले दिन अष्टमी-रोहिणी योग बने तो अगला दिन। हर शहर की अपनी अर्धरात्रि से।
जन्म-मुहूर्त: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी + रोहिणी नक्षत्र + मध्य-रात्रि + वृषभ का चंद्रमा — यह «जयंती-योग» जब पूरा मिले, दुर्लभ; स्मार्त-परंपरा (गृहस्थ) अष्टमी-तिथि जिस रात निशीथ में हो वह दिन, वैष्णव-संप्रदाय (मंदिर/इस्कॉन/ब्रज) रोहिणी-युक्त उदया-तिथि — इसलिए कई वर्षों में दो दिन: गृहस्थ पहला दिन, मंदिर दूसरा; ऊपर की तिथि स्मार्त-नियम से (निशीथ-व्यापिनी अष्टमी)।
व्रत अष्टमी को सूर्योदय से रात 12 बजे जन्म तक (या नवमी के सूर्योदय तक — कठोर रूप); पारण जन्म के बाद रात में या नवमी की सुबह — रोहिणी/अष्टमी समाप्ति के बाद। यह संतान-प्राप्ति व संतान के मंगल का व्रत भी माना गया — बाल-गोपाल की सेवा माँ-भाव से।
मथुरा-वृंदावन में जन्मभूमि-द्वारकाधीश-बाँके-बिहारी की मंगला-आरती (साल में इसी रात), महाराष्ट्र-गुजरात में दही-हांडी (गोविंदा), दक्षिण में गोकुलाष्टमी (कृष्ण के छोटे पैरों के छापे), ओडिशा-बंगाल में «जन्माष्टमी/नंद-उत्सव» — पूरा देश एक रात जागता है।
हाँ — शुक्रवार, 4 सितंबर 2026।
निशीथ काल पूजा (अर्धरात्रि): 11:29 PM से 12:19 AM (AEST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
कृष्ण का जन्म मध्य-रात्रि (निशीथ-काल — रात का मध्य बिंदु, ऊपर सटीक समय) में हुआ; लोक-रीत में घड़ी के 12 बजे; निशीथ शहर के सूर्यास्त-सूर्योदय से 12:00-12:30 के बीच पड़ता है — ऊपर देखें।
जन्म के समय डंठल वाले खीरे को बीच से काटकर (सिक्के से) बाल-गोपाल को माँ के गर्भ (नाल) से अलग करने का प्रतीक — «नाल-छेदन»; खीरा गर्भ, डंठल नाल; उत्तर-भारतीय लोक-रीत; फिर खीरा प्रसाद।
जन्माष्टमी को लड्डू गोपाल घर लाकर माँ-भाव से सेवा (रोज़ स्नान, भोग, झूला) का संकल्प और संतान गोपाल मंत्र — संतान-सुख का उपाय माना गया; पौष/श्रावण पुत्रदा एकादशी भी; चिकित्सा साथ रखें।