| शहर | तारीख | पूजा मुहूर्त (पूर्वाह्न, मध्याह्न तक) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 | 7:59 AM – 1:07 PM AEDT | 23 जनवरी, 7:59 AM → 24 जनवरी, 7:17 AM AEDT |
| मेलबर्न AEST/AEDT | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 | 7:59 AM – 1:32 PM AEDT | 23 जनवरी, 7:59 AM → 24 जनवरी, 7:17 AM AEDT |
| ब्रिस्बेन AEST | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 | 6:59 AM – 12:00 PM AEST | 23 जनवरी, 6:59 AM → 24 जनवरी, 6:17 AM AEST |
| पर्थ AWST | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 | 5:33 AM – 12:28 PM AWST | 23 जनवरी, 4:59 AM → 24 जनवरी, 4:17 AM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 | 7:29 AM – 1:27 PM ACDT | 23 जनवरी, 7:29 AM → 24 जनवरी, 6:47 AM ACDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
माघ शुक्ल पंचमी जो स्थानीय मध्याह्न में हो; सरस्वती-पूजा पूर्वाह्न में — सूर्योदय (या पंचमी-आरंभ) से मध्याह्न तक।
सरस्वती-पूजा: विद्या, संगीत, कला की देवी — छात्र, कलाकार, शिक्षक इस दिन किताब-कलम-वाद्य की पूजा करते हैं; पूर्वी भारत में यही «सरस्वती पूजा» का मुख्य दिन है (बंगाल-बिहार-ओडिशा-असम)।
पीला रंग सरसों के फूल, सूर्य के तेज और बुद्धि का प्रतीक — इसलिए पीले वस्त्र, पीले फूल (गेंदा-सरसों), पीला भोजन (केसरिया भात, बेसन-लड्डू, बूंदी)।
अबूझ मुहूर्त: वसंत पंचमी साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में गिनी जाती है (कुछ परंपराएँ) — विवाह-मुंडन-गृहप्रवेश इस दिन बिना मुहूर्त-विचार; इसीलिए इस दिन देश में सबसे ज़्यादा शादियाँ होती हैं। कामदेव-रति की पूजा और होली की तैयारी (होलिका-डंडा गाड़ना) भी इसी दिन से।
हाँ — शुक्रवार, 23 जनवरी 2026।
पूजा मुहूर्त (पूर्वाह्न, मध्याह्न तक): 7:59 AM से 1:07 PM (AEDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
बच्चे (2-5 वर्ष) को पीले कपड़े पहनाकर सरस्वती के सामने बिठाएँ; थाली में चावल/हल्दी बिछाकर उसकी उँगली पकड़कर «ॐ» या «अ» लिखवाएँ; फिर पट्टी-खड़िया; गुरु/बड़ों का आशीर्वाद, मिठाई। स्कूल/पंडित से भी कराया जा सकता है।
वसंत में सरसों पीली, सूर्य तेज; पीला रंग बुद्धि-ऊर्जा-शुभता का प्रतीक और सरस्वती (व विष्णु) को प्रिय — इसलिए वस्त्र-फूल-भोजन सब पीला।
इसी दिन से 40 दिन का फाग/वसंतोत्सव शुरू — ब्रज में गुलाल, गाँवों में होलिका का डंडा गाड़ना; कामदेव-वसंत की कथा शिव-होली से जुड़ती है। होली फाल्गुन पूर्णिमा को।