| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 8 मई 2027 | 6:01 AM – 11:48 AM EDT | 8 मई, 2:13 AM → 8 मई, 11:34 PM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 8 मई 2027 | 6:02 AM – 11:49 AM EDT | 8 मई, 2:13 AM → 8 मई, 11:34 PM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शनिवार, 8 मई 2027 | 5:39 AM – 11:39 AM MST | 7 मई, 11:13 PM → 8 मई, 8:34 PM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 8 मई 2027 | 5:57 AM – 12:02 PM MDT | 8 मई, 12:13 AM → 8 मई, 9:34 PM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 8 मई 2027 | 5:46 AM – 11:58 AM MDT | 8 मई, 12:13 AM → 8 मई, 9:34 PM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 8 मई 2027 | 5:33 AM – 11:24 AM EDT | 8 मई, 2:13 AM → 8 मई, 11:34 PM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
वैशाख शुक्ल तृतीया सूर्योदय पर; वह सूर्योदय के बाद 3 मुहूर्त से कम रहे तो पिछला दिन (जब मध्याह्न में तृतीया हो)।
पुराणों में इस दिन की घटनाएँ: त्रेता-युग का आरंभ, विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म (परशुराम जयंती — प्रदोष में), गंगा का धरती पर अवतरण (गंगा-सप्तमी से जुड़ा), महाभारत-लेखन का आरंभ (व्यास-गणेश), द्रौपदी को अक्षय-पात्र, सुदामा का कृष्ण से मिलना, कुबेर को धन-अधिकार — इसलिए धन-दान-अन्न सब अक्षय।
अबूझ मुहूर्त — विवाह, सगाई, गृह-प्रवेश, भूमि-वाहन-सोना ख़रीद, व्यापार-आरंभ बिना मुहूर्त-विचार शुभ; पर रोहिणी नक्षत्र व बुध/शुक्रवार पड़े तो और भी। पूरा दिन शुभ, अभिजित श्रेष्ठ; ख़रीद दिन में, विवाह लग्न से।
बद्रीनाथ धाम के कपाट इसी के आस-पास खुलते हैं और वृंदावन में बाँके-बिहारी के चरण-दर्शन साल में सिर्फ़ इसी दिन; जगन्नाथ-रथयात्रा के रथों का निर्माण पुरी में इसी दिन शुरू; बंगाल में «हालखाता»।
नहीं। भारत: रविवार, 9 मई 2027; टोरंटो (कनाडा): शनिवार, 8 मई 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:01 AM से 11:48 AM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
गर्मी की चीज़ें — जल-भरा घड़ा/सुराही, पंखा, छाता, चप्पल, सत्तू, खरबूज़ा-ककड़ी, अन्न-गुड़, वस्त्र; प्याऊ लगाना; गौ-दान/गौशाला; पितरों के नाम से — जो दिया वह अक्षय।
हाँ — परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के प्रदोष में; इसलिए जयंती उसी दिन (तृतीया प्रदोष में जिस दिन हो — कभी अगला दिन); शाम को स्मरण।
राजस्थान-मालवा में अक्षय तृतीया का लोक-नाम — सामूहिक विवाह, कन्याओं का गौरी-व्रत, सत्तू-घड़ा, मिट्टी की चिड़िया; «आखा» = अक्षय।