| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | 6:27 AM – 11:55 AM EDT | 19 अप्रैल, 7:22 PM → 20 अप्रैल, 6:27 PM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | 6:28 AM – 11:56 AM EDT | 19 अप्रैल, 7:22 PM → 20 अप्रैल, 6:27 PM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | 6:11 AM – 11:48 AM MST | 19 अप्रैल, 4:22 PM → 20 अप्रैल, 3:27 PM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | 6:31 AM – 12:11 PM MDT | 19 अप्रैल, 5:22 PM → 20 अप्रैल, 4:27 PM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | 6:23 AM – 12:07 PM MDT | 19 अप्रैल, 5:22 PM → 20 अप्रैल, 4:27 PM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | 6:00 AM – 11:31 AM EDT | 19 अप्रैल, 7:22 PM → 20 अप्रैल, 6:27 PM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
हनुमान संकटमोचन हैं — «भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै»; उनकी पूजा भय, रोग, शनि-मंगल की पीड़ा और बुरी नज़र से रक्षा के लिए; जो स्त्रियाँ बच्चों/पति की सुरक्षा चाहती हैं, वे इस दिन का व्रत रखती हैं (स्त्रियाँ हनुमान की पूजा करती हैं, बस चोला-सिंदूर स्पर्श कई परंपराओं में पुरुष चढ़ाते हैं)।
जन्म-समय सूर्योदय — इसलिए पूजा ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय (ऊपर समय) में; पूर्णिमा होने से चंद्र-अर्घ्य और सत्यनारायण-कथा भी। मंगलवार या शनिवार पड़े तो और विशेष।
सिंदूर की कथा — सीता जी को सिंदूर लगाते देख हनुमान ने राम की दीर्घायु के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया; तभी से सिंदूर-चोला; चमेली का तेल हनुमान को प्रिय; बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा भोग।
हाँ — मंगलवार, 20 अप्रैल 2027।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:27 AM से 11:55 AM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
हाँ — फूल, भोग, दीप, चालीसा-सुंदरकांड, व्रत सब कर सकती हैं; लोक-परंपरा में कई जगह मूर्ति को सिंदूर-चोला चढ़ाना और चरण-स्पर्श पुरुष करते हैं (हनुमान बाल-ब्रह्मचारी) — यह घर-मंदिर की रीत पर निर्भर है; शास्त्र में स्त्री-पूजा वर्जित नहीं।
सीता जी की माँग के सिंदूर से राम की दीर्घायु की बात सुनकर हनुमान ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया — राम प्रसन्न हुए और वर दिया कि सिंदूर-तेल चढ़ाने वाले पर कृपा होगी; इसीलिए सिंदूर-चमेली का चोला।
कई विद्वान «जयंती» की जगह «जन्मोत्सव» कहते हैं — क्योंकि हनुमान चिरंजीवी हैं (जयंती दिवंगत के लिए); दोनों नाम प्रचलित, पर्व वही।
हनुमान मंगल व शनि दोनों को शांत करने वाले माने गए — मांगलिक/साढ़ेसाती में मंगलवार-शनिवार हनुमान चालीसा, सिंदूर-तेल, गुड़-चना का दान; जयंती से संकल्प लेना उत्तम। कुंडली-पन्ने पर अपना दोष देखें।