| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | बुधवार, 21 अप्रैल 2027 | 6:22 AM – 10:48 AM AEST | 20 अप्रैल, 9:22 AM → 21 अप्रैल, 8:27 AM AEST |
| मेलबर्न AEST/AEDT | बुधवार, 21 अप्रैल 2027 | 6:52 AM – 11:14 AM AEST | 20 अप्रैल, 9:22 AM → 21 अप्रैल, 8:27 AM AEST |
| ब्रिस्बेन AEST | बुधवार, 21 अप्रैल 2027 | 6:08 AM – 10:39 AM AEST | 20 अप्रैल, 9:22 AM → 21 अप्रैल, 8:27 AM AEST |
| पर्थ AWST | मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | 6:40 AM – 11:08 AM AWST | 20 अप्रैल, 7:22 AM → 21 अप्रैल, 6:27 AM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | बुधवार, 21 अप्रैल 2027 | 6:44 AM – 11:08 AM ACST | 20 अप्रैल, 8:52 AM → 21 अप्रैल, 7:57 AM ACST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
हनुमान संकटमोचन हैं — «भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै»; उनकी पूजा भय, रोग, शनि-मंगल की पीड़ा और बुरी नज़र से रक्षा के लिए; जो स्त्रियाँ बच्चों/पति की सुरक्षा चाहती हैं, वे इस दिन का व्रत रखती हैं (स्त्रियाँ हनुमान की पूजा करती हैं, बस चोला-सिंदूर स्पर्श कई परंपराओं में पुरुष चढ़ाते हैं)।
जन्म-समय सूर्योदय — इसलिए पूजा ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय (ऊपर समय) में; पूर्णिमा होने से चंद्र-अर्घ्य और सत्यनारायण-कथा भी। मंगलवार या शनिवार पड़े तो और विशेष।
सिंदूर की कथा — सीता जी को सिंदूर लगाते देख हनुमान ने राम की दीर्घायु के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया; तभी से सिंदूर-चोला; चमेली का तेल हनुमान को प्रिय; बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा भोग।
नहीं। भारत: मंगलवार, 20 अप्रैल 2027; सिडनी (ऑस्ट्रेलिया): बुधवार, 21 अप्रैल 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:22 AM से 10:48 AM (AEST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
हाँ — फूल, भोग, दीप, चालीसा-सुंदरकांड, व्रत सब कर सकती हैं; लोक-परंपरा में कई जगह मूर्ति को सिंदूर-चोला चढ़ाना और चरण-स्पर्श पुरुष करते हैं (हनुमान बाल-ब्रह्मचारी) — यह घर-मंदिर की रीत पर निर्भर है; शास्त्र में स्त्री-पूजा वर्जित नहीं।
सीता जी की माँग के सिंदूर से राम की दीर्घायु की बात सुनकर हनुमान ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया — राम प्रसन्न हुए और वर दिया कि सिंदूर-तेल चढ़ाने वाले पर कृपा होगी; इसीलिए सिंदूर-चमेली का चोला।
कई विद्वान «जयंती» की जगह «जन्मोत्सव» कहते हैं — क्योंकि हनुमान चिरंजीवी हैं (जयंती दिवंगत के लिए); दोनों नाम प्रचलित, पर्व वही।
हनुमान मंगल व शनि दोनों को शांत करने वाले माने गए — मांगलिक/साढ़ेसाती में मंगलवार-शनिवार हनुमान चालीसा, सिंदूर-तेल, गुड़-चना का दान; जयंती से संकल्प लेना उत्तम। कुंडली-पन्ने पर अपना दोष देखें।