| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 | 7:08 AM – 11:56 AM EDT | 24 सितंबर, 1:49 PM → 25 सितंबर, 1:37 PM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 | 7:10 AM – 11:58 AM EDT | 24 सितंबर, 1:49 PM → 25 सितंबर, 1:37 PM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 | 7:04 AM – 11:52 AM PDT | 24 सितंबर, 10:49 AM → 25 सितंबर, 10:37 AM PDT |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 | 7:28 AM – 12:16 PM MDT | 24 सितंबर, 11:49 AM → 25 सितंबर, 11:37 AM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 | 7:25 AM – 12:13 PM MDT | 24 सितंबर, 11:49 AM → 25 सितंबर, 11:37 AM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 | 6:45 AM – 11:33 AM EDT | 24 सितंबर, 1:49 PM → 25 सितंबर, 1:37 PM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
अनंत = विष्णु का वह रूप जिसका आदि-अंत नहीं (शेषनाग भी «अनंत»); 14 गाँठें = 14 लोक (सात ऊपर, सात नीचे) — अनंत-सूत्र पहनने वाले पर विष्णु की सब लोकों में रक्षा; अग्नि-पुराण/भविष्य-पुराण में युधिष्ठिर को कृष्ण ने खोया राज्य पाने के लिए यह व्रत बताया — कठिनाई-ऋण-रोग से मुक्ति, खोया वैभव लौटना।
व्रत का नियम: 14 वर्ष लगातार, हर वर्ष नया सूत्र, पुराना जल में; बीच में छूटे तो दोबारा; 14वें वर्ष उद्यापन — 14 ब्राह्मण-भोजन, 14 वस्तुओं का दान; स्त्रियाँ पति-संतान की रक्षा व अखंड सौभाग्य के लिए, पुरुष खोए धन-पद-स्वास्थ्य के लिए; कथा में कौंडिन्य ऋषि ने पत्नी शीला का सूत्र फेंका, सब नष्ट — फिर अनंत की खोज (नीचे)।
गणेश-विसर्जन: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को पधारे गणपति का दसवें दिन (चतुर्दशी) विसर्जन — मुंबई-पुणे की विशाल शोभायात्राएँ (लालबागचा राजा), ढोल-ताशा-गुलाल; अनंत चतुर्दशी की पूजा सुबह, विसर्जन दोपहर-शाम; दोनों एक साथ होने से यह दिन उत्तर व पश्चिम भारत को जोड़ता है; अगले दिन से पितृ-पक्ष — इसलिए आज ही सब मांगलिक समापन।
हाँ — शुक्रवार, 25 सितंबर 2026।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 7:08 AM से 11:56 AM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
पुरुष दाहिने हाथ (बाजू/कलाई), स्त्री बाएँ हाथ; 14 गाँठें; कम-से-कम 14 दिन, शास्त्र में अगले वर्ष तक पहनें और नया बाँधते समय पुराना जल/पीपल में; टूट जाए तो जल में डालकर नया (पूजा किया हुआ) बाँधें।
14 लोक (इसीलिए 14 गाँठें) — कृष्ण ने युधिष्ठिर को 14 वर्ष का व्रत बताया; कौंडिन्य ने भी 14 वर्ष; छूट जाए तो अगले वर्ष प्रायश्चित्त (दान/ब्राह्मण-भोजन) करके फिर से गिनती; उद्यापन 14वें वर्ष — 14 ब्राह्मण, 14 वस्तु-दान।
कथा में शीला (कौंडिन्य-पत्नी) ने रखा — घर वैभव से भरा; पति-संतान की रक्षा, ऋण-रोग-कठिनाई से मुक्ति, खोया धन-पद लौटना; बिहार-कर्नाटक-महाराष्ट्र में स्त्री-पुरुष दोनों; नवविवाहिता पहला अनंत ससुराल में।
गणेशोत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से दस दिन — दसवाँ दिन यही चतुर्दशी; लोकमान्य तिलक (1893) ने सार्वजनिक गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर रखा; इसलिए महाराष्ट्र-गुजरात-तेलंगाना में यह विसर्जन-दिन; अनंत-पूजा (विष्णु) व विसर्जन (गणेश) अलग-अलग विधान, एक दिन।