| शहर | तारीख | मध्याह्न पूजा मुहूर्त | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 14 सितंबर 2026 | 11:57 AM – 2:28 PM EDT | 13 सितंबर, 9:37 PM → 14 सितंबर, 10:15 PM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 14 सितंबर 2026 | 11:59 AM – 2:29 PM EDT | 13 सितंबर, 9:37 PM → 14 सितंबर, 10:15 PM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | सोमवार, 14 सितंबर 2026 | 11:52 AM – 2:23 PM PDT | 13 सितंबर, 6:37 PM → 14 सितंबर, 7:15 PM PDT |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 14 सितंबर 2026 | 12:15 PM – 2:47 PM MDT | 13 सितंबर, 7:37 PM → 14 सितंबर, 8:15 PM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 14 सितंबर 2026 | 12:12 PM – 2:46 PM MDT | 13 सितंबर, 7:37 PM → 14 सितंबर, 8:15 PM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 14 सितंबर 2026 | 11:34 AM – 2:05 PM EDT | 13 सितंबर, 9:37 PM → 14 सितंबर, 10:15 PM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
| अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन) | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 |
अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।
जिस दिन स्थानीय मध्याह्न में तिथि हो।
गणेश विघ्नहर्ता व मंगल-कर्ता — हर कार्य का आरंभ; भाद्रपद चतुर्थी उनकी जन्म-तिथि — स्थापना मध्याह्न (सूर्योदय से दिन का दूसरा भाग, दोपहर 11-1:30 लगभग) में; लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सार्वजनिक उत्सव बनाया (महाराष्ट्र)।
इस रात चंद्र-दर्शन वर्जित — गणेश के शाप से «मिथ्या-दोष» (झूठा कलंक); देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» (स्यमंतक-कथा) का पाठ; कृष्ण पर भी यही कलंक लगा था। संकष्टी चतुर्थी (हर माह कृष्ण-चतुर्थी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है, इस चतुर्थी पर नहीं।
ऋषि पंचमी — कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ (सप्तऋषि) + अरुंधती की पूजा; मासिक-धर्म में अनजाने हुए दोष की शुद्धि का स्त्री-व्रत; «बिना जोते» उपज (साँवा-मोरधन-फल) का एक समय भोजन; नेपाल में तीज के तीसरे दिन दतिवन-स्नान।
हाँ — सोमवार, 14 सितंबर 2026।
मध्याह्न पूजा मुहूर्त: 11:57 AM से 2:28 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
गणेश जी के शाप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चंद्र-दर्शन से मिथ्या-कलंक (झूठा आरोप) लगता है — कृष्ण पर स्यमंतक-मणि का लगा था; भूल से देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» मंत्र/स्यमंतक-कथा पढ़ लें। बाक़ी चतुर्थियों (संकष्टी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है।
डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन (अनंत चतुर्दशी) — कुल-परंपरा/सुविधा से; एक बार जो दिन तय हों वही हर साल रखना अच्छा; डेढ़ दिन घर के लिए सबसे सरल। ऊपर सब विसर्जन-तिथियाँ।
स्त्रियाँ — रजस्वला-अवस्था में अनजाने हुए दोषों की शुद्धि व सप्तऋषियों की कृतज्ञता के लिए; बिना हल-जुते अन्न (साँवा/मोरधन) का एक समय भोजन, सप्तऋषि-अरुंधती पूजा, दान; नेपाल-महाराष्ट्र-राजस्थान-यूपी में प्रचलित; पुरुष भी रख सकते हैं।
मिट्टी की मूर्ति बड़े टब/बाल्टी/ड्रम में — उत्तर-पूजा के बाद धीरे-धीरे जल में; घुलने पर वह मिट्टी-जल गमलों/बगीचे में; प्लास्टर की हो तो नगर-निगम के कृत्रिम कुंड में। नदी में सिर्फ़ मिट्टी की, बिना सजावट-प्लास्टिक।