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कनाडा में गणेश चतुर्थी 2027: शुक्रवार, 3 सितंबर — शहर-वार पूजा-समय

कनाडा में गणेश चतुर्थी 2027: शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 (टोरंटो)
मध्याह्न पूजा मुहूर्त: 11:58 AM – 2:35 PM EDT
भारत से अलग। भारत में गणेश चतुर्थी 2027 शनिवार, 4 सितंबर 2027 को है; टोरंटो (कनाडा) में शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 — एक दिन पहले। कारण: जिस दिन स्थानीय मध्याह्न में तिथि हो। टोरंटो में तिथि स्थानीय समय 2:56 AM EDT पर ख़त्म होती है, इसलिए निर्णायक क्षण दूसरे दिन पड़ता है।

गणेश चतुर्थी 2027 — कनाडा के सब शहर

शहरतारीखमध्याह्न पूजा मुहूर्ततिथि (स्थानीय)
टोरंटो
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 3 सितंबर 202711:58 AM – 2:35 PM EDT3 सितंबर, 4:50 AM → 4 सितंबर, 2:56 AM EDT
ब्रैम्पटन
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 3 सितंबर 202711:59 AM – 2:37 PM EDT3 सितंबर, 4:50 AM → 4 सितंबर, 2:56 AM EDT
वैंकूवर
Pacific Time (PST/PDT)
शुक्रवार, 3 सितंबर 202711:52 AM – 2:31 PM MST3 सितंबर, 1:50 AM → 3 सितंबर, 11:56 PM MST
कैलगरी
Mountain Time (MST/MDT)
शुक्रवार, 3 सितंबर 202712:15 PM – 2:55 PM MDT3 सितंबर, 2:50 AM → 4 सितंबर, 12:56 AM MDT
एडमंटन
Mountain Time (MST/MDT)
शुक्रवार, 3 सितंबर 202712:12 PM – 2:54 PM MDT3 सितंबर, 2:50 AM → 4 सितंबर, 12:56 AM MDT
मॉन्ट्रियल
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 3 सितंबर 202711:34 AM – 2:12 PM EDT3 सितंबर, 4:50 AM → 4 सितंबर, 2:56 AM EDT

समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

जुड़े दिन (टोरंटो)

अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन)मंगलवार, 14 सितंबर 2027

अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।

गणेश चतुर्थी की तारीख कैसे तय होती है

जिस दिन स्थानीय मध्याह्न में तिथि हो।

महत्व

गणेश विघ्नहर्ता व मंगल-कर्ता — हर कार्य का आरंभ; भाद्रपद चतुर्थी उनकी जन्म-तिथि — स्थापना मध्याह्न (सूर्योदय से दिन का दूसरा भाग, दोपहर 11-1:30 लगभग) में; लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सार्वजनिक उत्सव बनाया (महाराष्ट्र)।

इस रात चंद्र-दर्शन वर्जित — गणेश के शाप से «मिथ्या-दोष» (झूठा कलंक); देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» (स्यमंतक-कथा) का पाठ; कृष्ण पर भी यही कलंक लगा था। संकष्टी चतुर्थी (हर माह कृष्ण-चतुर्थी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है, इस चतुर्थी पर नहीं।

ऋषि पंचमी — कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ (सप्तऋषि) + अरुंधती की पूजा; मासिक-धर्म में अनजाने हुए दोष की शुद्धि का स्त्री-व्रत; «बिना जोते» उपज (साँवा-मोरधन-फल) का एक समय भोजन; नेपाल में तीज के तीसरे दिन दतिवन-स्नान।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. तैयारी (एक दिन पहले/हरतालिका के साथ): मिट्टी (शाडू) की गणेश-मूर्ति (पर्यावरण-अनुकूल, बिना रासायनिक रंग, घर के लिए 1-2 फ़ुट), मंडप/चौकी-सजावट (फूल, केले के खंभे, बिजली-लड़ी, मखर), लाल/पीला कपड़ा, कलश; घर की सफ़ाई।
  2. चतुर्थी — मध्याह्न-मुहूर्त (ऊपर अभिजित/तिथि; मध्याह्न ≈ दिन का मध्य-भाग): मूर्ति लाते समय «गणपति बप्पा मोरया», मुख ढककर; स्थापना पूर्व/उत्तर-पूर्व मुख; गणपति के दाएँ रिद्धि-सिद्धि (या सुपारी); कलश-वरुण-पूजन; प्राण-प्रतिष्ठा — «ॐ गं गणपतये नमः» के साथ मूर्ति में प्राण-आवाहन (पंडित या घर का बड़ा — मंत्र पुस्तक से)।
  3. षोडशोपचार पूजा: स्नान (जल-पंचामृत), वस्त्र (जनेऊ, धोती-उपरना), सिंदूर/लाल चंदन, 21 दूर्वा-दल (तीन/पाँच पत्तियों वाली, जोड़े में), शमी-पत्र, लाल-पीले फूल (गुड़हल-गेंदा), 21 मोदक (या लड्डू), नारियल, पान-सुपारी, दीप-धूप; «वक्रतुंड महाकाय…», गणेश-अथर्वशीर्ष (हो सके तो), संकटनाशन गणेश-स्तोत्र; आरती «सुखकर्ता दुखहर्ता» / «जय गणेश देवा»।
  4. रोज़ (जितने दिन विराजें): सुबह-शाम आरती, दूर्वा, मोदक/लड्डू/फल का भोग, अथर्वशीर्ष या «ॐ गं गणपतये नमः» 108; परिवार-पड़ोस को प्रसाद; घर में गणपति रहते हुए तामसिक भोजन-कलह नहीं; मूर्ति को अकेला न छोड़ें (कोई घर में रहे)।
  5. चतुर्थी की रात चंद्रमा न देखें (पर्दा/नज़र नीचे); देख लें तो स्यमंतक-मंत्र «सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः, सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः» का पाठ।
  6. ऋषि पंचमी (अगला दिन, स्त्रियाँ): सुबह स्नान (नेपाल-राजस्थान में दतिवन/अपामार्ग की टहनी से दाँत-शुद्धि, मिट्टी-लेप), सप्तऋषि व अरुंधती की पूजा (चित्र/सात सुपारी), सात प्रकार का अन्न-दान, «बिना हल जोती» उपज (साँवा/मोरधन/भगर के चावल, फल, दूध) का एक समय भोजन; कथा (उत्तंक-विदर्भ); व्रत रजस्वला-दोष-शुद्धि व परिवार-कल्याण हेतु।
  7. विसर्जन (डेढ़/3/5/7/10वें दिन — ऊपर तिथियाँ): उत्तर-पूजा — आरती, नारियल, दक्षिणा, «पुढच्या वर्षी लवकर या»; मूर्ति को अक्षत-फूल के साथ थोड़ा हिलाकर (विदाई-संकेत), दही-शक्कर/मोदक साथ; घर के बड़े-बच्चे साथ; नदी-तालाब/कृत्रिम कुंड/घर की बाल्टी-टब में (मिट्टी की मूर्ति) विसर्जन — जल फिर पौधों में; विसर्जन का जल-मिट्टी सम्मान से।
  8. अनंत चतुर्दशी (दसवाँ दिन): विसर्जन-जुलूस (ढोल-गुलाल); उसी दिन अनंत-व्रत (विष्णु का 14 गाँठ का अनंत-सूत्र — अलग पन्ना); अगले दिन से पितृ पक्ष।

प्रश्नोत्तर

क्या गणेश चतुर्थी 2027 कनाडा और भारत में एक ही दिन है?

नहीं। भारत: शनिवार, 4 सितंबर 2027; टोरंटो (कनाडा): शुक्रवार, 3 सितंबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।

टोरंटो में गणेश चतुर्थी 2027 का पूजा-समय?

मध्याह्न पूजा मुहूर्त: 11:58 AM से 2:35 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।

इस रात चाँद क्यों नहीं देखते?

गणेश जी के शाप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चंद्र-दर्शन से मिथ्या-कलंक (झूठा आरोप) लगता है — कृष्ण पर स्यमंतक-मणि का लगा था; भूल से देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» मंत्र/स्यमंतक-कथा पढ़ लें। बाक़ी चतुर्थियों (संकष्टी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है।

गणपति कितने दिन रखें?

डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन (अनंत चतुर्दशी) — कुल-परंपरा/सुविधा से; एक बार जो दिन तय हों वही हर साल रखना अच्छा; डेढ़ दिन घर के लिए सबसे सरल। ऊपर सब विसर्जन-तिथियाँ।

ऋषि पंचमी का व्रत कौन और क्यों?

स्त्रियाँ — रजस्वला-अवस्था में अनजाने हुए दोषों की शुद्धि व सप्तऋषियों की कृतज्ञता के लिए; बिना हल-जुते अन्न (साँवा/मोरधन) का एक समय भोजन, सप्तऋषि-अरुंधती पूजा, दान; नेपाल-महाराष्ट्र-राजस्थान-यूपी में प्रचलित; पुरुष भी रख सकते हैं।

घर पर विसर्जन कैसे करें?

मिट्टी की मूर्ति बड़े टब/बाल्टी/ड्रम में — उत्तर-पूजा के बाद धीरे-धीरे जल में; घुलने पर वह मिट्टी-जल गमलों/बगीचे में; प्लास्टर की हो तो नगर-निगम के कृत्रिम कुंड में। नदी में सिर्फ़ मिट्टी की, बिना सजावट-प्लास्टिक।

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