कनाडा में छठ पूजा 2027: गुरुवार, 4 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय
कनाडा में छठ पूजा 2027: गुरुवार, 4 नवंबर 2027 (टोरंटो)
संध्या अर्घ्य — सूर्यास्त: 6:05 PM EDT
भारत से अलग। भारत में छठ पूजा 2027 गुरुवार, 4 नवंबर 2027 को है; टोरंटो (कनाडा) में गुरुवार, 4 नवंबर 2027 — +0 दिन। कारण: संध्या अर्घ्य स्थानीय सूर्यास्त पर षष्ठी; उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर। टोरंटो में तिथि स्थानीय समय 12:09 PM EDT पर ख़त्म होती है, इसलिए निर्णायक क्षण दूसरे दिन पड़ता है। ध्यान दें: इस वर्ष सब शहरों की तारीख एक नहीं — सारणी देखें।
छठ पूजा 2027 — कनाडा के सब शहर
| शहर | तारीख | संध्या अर्घ्य — सूर्यास्त | तिथि (स्थानीय) |
|---|
टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 4 नवंबर 2027 | 6:05 PM EDT | 3 नवंबर, 10:02 AM → 4 नवंबर, 12:09 PM EDT |
ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 4 नवंबर 2027 | 6:06 PM EDT | 3 नवंबर, 10:02 AM → 4 नवंबर, 12:09 PM EDT |
वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | बुधवार, 3 नवंबर 2027 | 5:48 PM MST | 3 नवंबर, 7:02 AM → 4 नवंबर, 9:09 AM MST |
कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 3 नवंबर 2027 | 6:07 PM MDT | 3 नवंबर, 8:02 AM → 4 नवंबर, 10:09 AM MDT |
एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 3 नवंबर 2027 | 5:57 PM MDT | 3 नवंबर, 8:02 AM → 4 नवंबर, 10:09 AM MDT |
मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 4 नवंबर 2027 | 5:37 PM EDT | 3 नवंबर, 10:02 AM → 4 नवंबर, 12:09 PM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जुड़े दिन (टोरंटो)
| नहाय-खाय | मंगलवार, 2 नवंबर 2027 |
| खरना | बुधवार, 3 नवंबर 2027 |
| उषा अर्घ्य (प्रातः) | शुक्रवार, 5 नवंबर 2027 |
अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।
छठ पूजा की तारीख कैसे तय होती है
संध्या अर्घ्य स्थानीय सूर्यास्त पर षष्ठी; उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर।
महत्व
छठ में सूर्य देव और छठी मैया (षष्ठी देवी — ब्रह्मा की मानस-पुत्री, संतान की रक्षक) की पूजा होती है। मान्यता है कि छठ का व्रत संतान-सुख, परिवार के आरोग्य और सौभाग्य के लिए सबसे फलदायी है — और यह उन गिने-चुने पर्वों में है जहाँ डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है, यानी उतार में भी कृतज्ञता।
इसमें कोई पंडित, मूर्ति, मंदिर नहीं — सिर्फ़ जल, सूर्य, बाँस का सूप-दउरा, मिट्टी का चूल्हा, गेहूँ-गुड़-घी का ठेकुआ और लोकगीत। शुद्धता का नियम कड़ा है: चार दिन लहसुन-प्याज़ नहीं, नया चूल्हा, ज़मीन पर सोना, हाथ से बना प्रसाद।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- दिन 1 — नहाय-खाय (चतुर्थी): व्रती सुबह नदी/तालाब या घर में स्नान, घर की धुलाई-लिपाई; दोपहर में नए/मिट्टी के चूल्हे पर एक बार का सात्विक भोजन — कद्दू (लौकी) की सब्ज़ी, चने की दाल, अरवा चावल, सेंधा नमक, घी — पहले सूर्य को भोग, फिर व्रती, फिर परिवार। इसी दिन से लहसुन-प्याज़-मांस बंद।
- दिन 2 — खरना/लोहंडा (पंचमी): व्रती पूरे दिन निर्जला; शाम को सूर्यास्त के बाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़-चावल की खीर (रसियाव), घी लगी रोटी और केला बनाकर छठी मैया को भोग; व्रती एकांत में प्रसाद खाती है (शोर हुआ तो वहीं रुक जाती है), फिर सबको प्रसाद। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू।
- दिन 3 — संध्या अर्घ्य (षष्ठी): दिन में ठेकुआ, कसार (चावल के लड्डू), फल, नारियल, गन्ना, हल्दी-अदरक की गाँठ, सिंघाड़ा, केला का घवद, नींबू (डाभ), सुथनी, मूली आदि बाँस के सूप और दउरा (टोकरी) में सजाएँ; दउरा घर का पुरुष सिर पर उठाकर घाट ले जाता है।
- घाट पर मिट्टी की सूर्य-वेदी/कोसी (हाथी वाला मिट्टी का दीप-स्तंभ, मन्नत पूरी होने पर) सजाएँ; सूर्यास्त (ऊपर समय) से पहले व्रती जल में कमर तक खड़ी होकर सूप उठाए; परिवार के लोग दूध-जल से डूबते सूर्य को अर्घ्य दें — «ॐ घृणि सूर्याय नमः» या छठ के गीत; सूप की पाँच/सात परिक्रमा।
- रात में घाट या घर पर जागरण, कोसी भरना (मन्नत वालों के लिए — गन्नों के मंडप में मिट्टी के 12/24 दीये), छठ के लोकगीत — «केलवा के पात पर उगेलन सूरज मल झुके-झुके», «काँच ही बाँस के बहँगिया»।
- दिन 4 — उषा अर्घ्य व पारण (सप्तमी): भोर में (ब्रह्म मुहूर्त में) वही सूप-दउरा लेकर घाट; सूर्योदय (ऊपर समय) पर उगते सूर्य को अर्घ्य; व्रती जल से निकलकर बड़ों के पैर छूए, प्रसाद (ठेकुआ) बाँटे।
- पारण: घाट से लौटकर व्रती छठी मैया को प्रणाम कर अदरक-गुड़/ठेकुआ-जल से 36 घंटे का व्रत खोले; फिर हल्का भोजन। सूप का प्रसाद मोहल्ले-रिश्तेदारों में बाँटना अनिवार्य — छठ का प्रसाद माँगकर खाना भी शुभ माना जाता है।
- व्रत का संकल्प प्रायः मन्नत या परिवार की परंपरा से लिया जाता है और फिर हर साल निभाया जाता है; कोई साल छूटे तो किसी और परवैतिन से सूप उठवाकर पूजा पूरी की जाती है।
प्रश्नोत्तर
क्या छठ पूजा 2027 कनाडा और भारत में एक ही दिन है?
नहीं। भारत: गुरुवार, 4 नवंबर 2027; टोरंटो (कनाडा): गुरुवार, 4 नवंबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
टोरंटो में छठ पूजा 2027 का पूजा-समय?
संध्या अर्घ्य — सूर्यास्त: 6:05 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
छठी मैया कौन हैं?
षष्ठी देवी — ब्रह्मा की मानस-पुत्री और सूर्य देव की बहन मानी जाती हैं; बालकों की रक्षक देवी। छठ में सूर्य और छठी मैया दोनों की पूजा है।
क्या पुरुष छठ का व्रत रख सकते हैं?
हाँ — छठ में स्त्री-पुरुष दोनों व्रती होते हैं; बिहार में बहुत-से पुरुष परवैत हैं। मन्नत और शुद्धता का नियम सबके लिए एक है।
डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों?
छठ उन इने-गिने पर्वों में है जहाँ अस्त होते सूर्य की भी पूजा है — सिखाता है कि उतार में भी कृतज्ञ रहो; शाम का अर्घ्य सूर्य की पत्नी प्रत्यूषा और सुबह का उषा को समर्पित माना जाता है।
ठेकुआ कैसे बनता है?
गेहूँ का आटा, पिघला गुड़, घी का मोयन, सौंफ-नारियल कड़ा गूँथकर लकड़ी के साँचे में दबाएँ और धीमी आँच पर घी में सुनहरा तलें — ऊपर भोग-खंड में मात्रा दी है। बाज़ार का आटा नहीं, घर में धोकर-सुखाकर पिसवाया आटा।
🧙
कनाडा से भारतीय ज्योतिषी से बात करें — चैट, कॉल या वीडियो; email से login, अंतरराष्ट्रीय कॉल-शुल्क नहीं।
ज्योतिषी देखें →