| शहर | तारीख | अपराह्न पूजा मुहूर्त | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 2:03 PM – 4:07 PM EDT | 30 अक्टूबर, 8:22 AM → 31 अक्टूबर, 7:44 AM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 2:05 PM – 4:09 PM EDT | 30 अक्टूबर, 8:22 AM → 31 अक्टूबर, 7:44 AM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 1:55 PM – 3:55 PM MST | 30 अक्टूबर, 5:22 AM → 31 अक्टूबर, 4:44 AM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 2:18 PM – 4:16 PM MDT | 30 अक्टूबर, 6:22 AM → 31 अक्टूबर, 5:44 AM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 2:15 PM – 4:10 PM MDT | 30 अक्टूबर, 6:22 AM → 31 अक्टूबर, 5:44 AM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 1:39 PM – 3:41 PM EDT | 30 अक्टूबर, 8:22 AM → 31 अक्टूबर, 7:44 AM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन अपराह्न में तिथि हो।
रक्षाबंधन में बहन भाई से रक्षा माँगती है; भाई दूज में बहन भाई की रक्षा (आयु) के लिए प्रार्थना करती है — यह बहन के आशीर्वाद का पर्व है। इसीलिए तिलक बहन के हाथ से और भोजन बहन के घर या हाथ का।
तिलक का शुभ समय अपराह्न (दोपहर बाद) है — द्वितीया तिथि दोपहर में हो तो श्रेष्ठ; अभिजित मुहूर्त (ऊपर) भी उत्तम। यदि द्वितीया दो दिन अपराह्न को छुए तो दूसरा दिन लिया जाता है।
जिनके भाई नहीं हैं, वे चंद्रमा को (या मामा/चचेरे भाई को) तिलक करती हैं; जिनकी बहन नहीं, वे बुआ/बहन-समान स्त्री से तिलक कराते हैं — रिश्ता भाव का है, ख़ून का नहीं।
नहीं। भारत: रविवार, 31 अक्टूबर 2027; टोरंटो (कनाडा): शनिवार, 30 अक्टूबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
अपराह्न पूजा मुहूर्त: 2:03 PM से 4:07 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) में बहन राखी बाँधकर भाई से रक्षा का वचन लेती है; भाई दूज में बहन तिलक कर भाई की आयु के लिए यमराज से प्रार्थना करती है — यहाँ बहन आशीर्वाद देती है।
चंद्रमा को तिलक/अर्घ्य दे (महाराष्ट्र में यही रीत), या मामा/चचेरे-ममेरे भाई या भाई-समान को तिलक करे। जिसकी बहन न हो, वह बुआ-मौसी की बेटी या बहन-समान स्त्री से तिलक कराए।
«भाइयेर कपाले दिलाम फोंटा, जमेर दुयारे पड़लो काँटा» — भाई के माथे पर तिलक लगा, यम के द्वार पर काँटा पड़ गया; तीन बार बोलकर बहन धान-दूब से आशीर्वाद देती है।