| शहर | तारीख | सायंकाल पूजा मुहूर्त | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | 4:08 PM – 6:13 PM EDT | 29 अक्टूबर, 9:39 AM → 30 अक्टूबर, 8:22 AM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | 4:09 PM – 6:14 PM EDT | 29 अक्टूबर, 9:41 AM → 30 अक्टूबर, 8:22 AM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | 7:56 AM – 9:56 AM MST प्रातःकाल पूजा मुहूर्त | 29 अक्टूबर, 6:41 AM → 30 अक्टूबर, 5:22 AM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | 8:23 AM – 10:22 AM MDT प्रातःकाल पूजा मुहूर्त | 29 अक्टूबर, 7:38 AM → 30 अक्टूबर, 6:22 AM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | 8:28 AM – 10:24 AM MDT प्रातःकाल पूजा मुहूर्त | 29 अक्टूबर, 7:43 AM → 30 अक्टूबर, 6:22 AM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | 3:43 PM – 5:46 PM EDT | 29 अक्टूबर, 9:39 AM → 30 अक्टूबर, 8:22 AM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: दिवाली के अगले दिन पूरा सायंकाल प्रतिपदा में हो तो उसी शाम; नहीं तो अगले दिन प्रातःकाल (सूर्योदय पर प्रतिपदा)।
गोवर्धन-लीला की सीख यह है कि अहंकारी सत्ता (इंद्र) की नहीं, प्रकृति (पर्वत, गाय, वन) की पूजा करो — वही अन्न, जल, छाया देती है। इसीलिए इस दिन गाय-बैल का श्रृंगार और गोबर के गोवर्धन की पूजा है।
अन्नकूट का अर्थ है «अन्न का पर्वत» — नई फ़सल की सब्ज़ियों, अनाज, मिठाइयों से 56 (या जितने बन सकें) व्यंजन बनाकर ठाकुर जी (कृष्ण) को भोग लगाना और फिर सबको प्रसाद बाँटना — यह घर की स्त्रियों की सामूहिक रसोई का सबसे बड़ा दिन है।
इसी दिन बलि-प्रतिपदा (राजा बलि की पूजा) और गुजरात में नया साल (बेस्तु वर्ष) है; कई घरों में दीवाली की अगली सुबह इसी दिन दरिद्र-निकास (सूप बजाना) भी होता है। यदि अमावस्या दोपहर तक चले तो गोवर्धन पूजा एक दिन आगे भी हो सकती है — ऊपर की तिथि पंचांग से है।
नहीं। भारत: शनिवार, 30 अक्टूबर 2027; टोरंटो (कनाडा): शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
सायंकाल पूजा मुहूर्त: 4:08 PM से 6:13 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
कथा के अनुसार कृष्ण ने गोवर्धन उठाए सात दिन में आठ पहर × सात दिन = 56 बार भोजन नहीं किया, इसलिए 56 भोग। घर में जितने बन सकें उतने बनाएँ — भाव मुख्य है, गिनती नहीं।
मिट्टी, आटे या गोबर के उपले से भी प्रतीक बना सकते हैं; या गोवर्धन-चित्र/गोवर्धन-शिला (मथुरा से लाई) की पूजा। शहरों में गौशाला से थोड़ा गोबर मिल जाता है।
दोनों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को हैं — उत्तर-पश्चिम भारत में गोवर्धन-अन्नकूट और महाराष्ट्र-दक्षिण में राजा बलि का धरती पर आगमन; गुजरात में यही नया साल है।