| शहर | तारीख | प्रातःकाल पूजा मुहूर्त | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 5:57 AM – 8:38 AM AEDT | 30 अक्टूबर, 12:42 AM → 30 अक्टूबर, 11:22 PM AEDT |
| मेलबर्न AEST/AEDT | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 6:16 AM – 8:59 AM AEDT | 30 अक्टूबर, 12:46 AM → 30 अक्टूबर, 11:22 PM AEDT |
| ब्रिस्बेन AEST | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 4:59 AM – 7:36 AM AEST | 29 अक्टूबर, 11:44 PM → 30 अक्टूबर, 10:22 PM AEST |
| पर्थ AWST | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 5:22 AM – 8:01 AM AWST | 29 अक्टूबर, 9:37 PM → 30 अक्टूबर, 8:22 PM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | 6:16 AM – 8:57 AM ACDT | 30 अक्टूबर, 12:16 AM → 30 अक्टूबर, 10:52 PM ACDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: दिवाली के अगले दिन पूरा सायंकाल प्रतिपदा में हो तो उसी शाम; नहीं तो अगले दिन प्रातःकाल (सूर्योदय पर प्रतिपदा)।
गोवर्धन-लीला की सीख यह है कि अहंकारी सत्ता (इंद्र) की नहीं, प्रकृति (पर्वत, गाय, वन) की पूजा करो — वही अन्न, जल, छाया देती है। इसीलिए इस दिन गाय-बैल का श्रृंगार और गोबर के गोवर्धन की पूजा है।
अन्नकूट का अर्थ है «अन्न का पर्वत» — नई फ़सल की सब्ज़ियों, अनाज, मिठाइयों से 56 (या जितने बन सकें) व्यंजन बनाकर ठाकुर जी (कृष्ण) को भोग लगाना और फिर सबको प्रसाद बाँटना — यह घर की स्त्रियों की सामूहिक रसोई का सबसे बड़ा दिन है।
इसी दिन बलि-प्रतिपदा (राजा बलि की पूजा) और गुजरात में नया साल (बेस्तु वर्ष) है; कई घरों में दीवाली की अगली सुबह इसी दिन दरिद्र-निकास (सूप बजाना) भी होता है। यदि अमावस्या दोपहर तक चले तो गोवर्धन पूजा एक दिन आगे भी हो सकती है — ऊपर की तिथि पंचांग से है।
हाँ — शनिवार, 30 अक्टूबर 2027।
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: 5:57 AM से 8:38 AM (AEDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
कथा के अनुसार कृष्ण ने गोवर्धन उठाए सात दिन में आठ पहर × सात दिन = 56 बार भोजन नहीं किया, इसलिए 56 भोग। घर में जितने बन सकें उतने बनाएँ — भाव मुख्य है, गिनती नहीं।
मिट्टी, आटे या गोबर के उपले से भी प्रतीक बना सकते हैं; या गोवर्धन-चित्र/गोवर्धन-शिला (मथुरा से लाई) की पूजा। शहरों में गौशाला से थोड़ा गोबर मिल जाता है।
दोनों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को हैं — उत्तर-पश्चिम भारत में गोवर्धन-अन्नकूट और महाराष्ट्र-दक्षिण में राजा बलि का धरती पर आगमन; गुजरात में यही नया साल है।