| शहर | तारीख | प्रातःकाल पूजा मुहूर्त | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 | 7:04 AM – 9:03 AM EST | 9 नवंबर, 2:04 AM → 10 नवंबर, 3:31 AM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 | 7:06 AM – 9:05 AM EST | 9 नवंबर, 2:06 AM → 10 नवंबर, 3:31 AM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 | 8:14 AM – 10:07 AM MST | 9 नवंबर, 12:14 AM → 10 नवंबर, 1:31 AM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 | 7:43 AM – 9:34 AM MST | 9 नवंबर, 12:13 AM → 10 नवंबर, 1:31 AM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 | 7:49 AM – 9:36 AM MST | 9 नवंबर, 12:04 AM → 10 नवंबर, 1:31 AM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 | 6:45 AM – 8:42 AM EST | 9 नवंबर, 2:15 AM → 10 नवंबर, 3:31 AM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: दिवाली के अगले दिन पूरा सायंकाल प्रतिपदा में हो तो उसी शाम; नहीं तो अगले दिन प्रातःकाल (सूर्योदय पर प्रतिपदा)।
गोवर्धन-लीला की सीख यह है कि अहंकारी सत्ता (इंद्र) की नहीं, प्रकृति (पर्वत, गाय, वन) की पूजा करो — वही अन्न, जल, छाया देती है। इसीलिए इस दिन गाय-बैल का श्रृंगार और गोबर के गोवर्धन की पूजा है।
अन्नकूट का अर्थ है «अन्न का पर्वत» — नई फ़सल की सब्ज़ियों, अनाज, मिठाइयों से 56 (या जितने बन सकें) व्यंजन बनाकर ठाकुर जी (कृष्ण) को भोग लगाना और फिर सबको प्रसाद बाँटना — यह घर की स्त्रियों की सामूहिक रसोई का सबसे बड़ा दिन है।
इसी दिन बलि-प्रतिपदा (राजा बलि की पूजा) और गुजरात में नया साल (बेस्तु वर्ष) है; कई घरों में दीवाली की अगली सुबह इसी दिन दरिद्र-निकास (सूप बजाना) भी होता है। यदि अमावस्या दोपहर तक चले तो गोवर्धन पूजा एक दिन आगे भी हो सकती है — ऊपर की तिथि पंचांग से है।
नहीं। भारत: मंगलवार, 10 नवंबर 2026; टोरंटो (कनाडा): सोमवार, 9 नवंबर 2026। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: 7:04 AM से 9:03 AM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
कथा के अनुसार कृष्ण ने गोवर्धन उठाए सात दिन में आठ पहर × सात दिन = 56 बार भोजन नहीं किया, इसलिए 56 भोग। घर में जितने बन सकें उतने बनाएँ — भाव मुख्य है, गिनती नहीं।
मिट्टी, आटे या गोबर के उपले से भी प्रतीक बना सकते हैं; या गोवर्धन-चित्र/गोवर्धन-शिला (मथुरा से लाई) की पूजा। शहरों में गौशाला से थोड़ा गोबर मिल जाता है।
दोनों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को हैं — उत्तर-पश्चिम भारत में गोवर्धन-अन्नकूट और महाराष्ट्र-दक्षिण में राजा बलि का धरती पर आगमन; गुजरात में यही नया साल है।