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फ़िजी में गोवर्धन पूजा 2026: मंगलवार, 10 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय

फ़िजी में गोवर्धन पूजा 2026: मंगलवार, 10 नवंबर 2026 (सुवा)
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: 5:23 AM – 7:58 AM FJT
भारत के दिन ही। 2026 में गोवर्धन पूजा भारत और सुवा में मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है।

गोवर्धन पूजा 2026 — सुवा

शहरतारीखप्रातःकाल पूजा मुहूर्ततिथि (स्थानीय)
सुवा
Fiji Time (FJT)
मंगलवार, 10 नवंबर 20265:23 AM – 7:58 AM FJT9 नवंबर, 7:08 PM → 10 नवंबर, 8:31 PM FJT

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

गोवर्धन पूजा की तारीख कैसे तय होती है

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: दिवाली के अगले दिन पूरा सायंकाल प्रतिपदा में हो तो उसी शाम; नहीं तो अगले दिन प्रातःकाल (सूर्योदय पर प्रतिपदा)।

महत्व

गोवर्धन-लीला की सीख यह है कि अहंकारी सत्ता (इंद्र) की नहीं, प्रकृति (पर्वत, गाय, वन) की पूजा करो — वही अन्न, जल, छाया देती है। इसीलिए इस दिन गाय-बैल का श्रृंगार और गोबर के गोवर्धन की पूजा है।

अन्नकूट का अर्थ है «अन्न का पर्वत» — नई फ़सल की सब्ज़ियों, अनाज, मिठाइयों से 56 (या जितने बन सकें) व्यंजन बनाकर ठाकुर जी (कृष्ण) को भोग लगाना और फिर सबको प्रसाद बाँटना — यह घर की स्त्रियों की सामूहिक रसोई का सबसे बड़ा दिन है।

इसी दिन बलि-प्रतिपदा (राजा बलि की पूजा) और गुजरात में नया साल (बेस्तु वर्ष) है; कई घरों में दीवाली की अगली सुबह इसी दिन दरिद्र-निकास (सूप बजाना) भी होता है। यदि अमावस्या दोपहर तक चले तो गोवर्धन पूजा एक दिन आगे भी हो सकती है — ऊपर की तिथि पंचांग से है।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. सुबह स्नान करके घर के आँगन/द्वार पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ — लेटे हुए पुरुष-सी आकृति या ढेर के रूप में; उसे फूल, खील-बताशे, दीये, हरी घास, गन्ने के टुकड़ों और छोटे झंडों से सजाएँ; बीच में श्रीकृष्ण की मूर्ति/चित्र या मिट्टी का ग्वाल-बाल रखें।
  2. गाय-बैल (या गौशाला की गाय) को नहलाकर सींगों पर तेल-रंग, गले में फूल-माला, माथे पर हल्दी-रोली का टीका; उन्हें गुड़-चना-हरा चारा खिलाएँ — गाय गोवर्धन-लीला की केंद्र हैं।
  3. पूजा-मुहूर्त (सुबह प्रतिपदा में, या अभिजित — ऊपर समय) में गोवर्धन-आकृति की पूजा: रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप, नैवेद्य; «गोवर्धन धराधार गोकुल त्राण-कारक, विष्णु-बाहु-कृतोच्छ्राय गवां कोटि प्रदो भव» का पाठ या «श्री गोवर्धन महाराज की जय».
  4. अन्नकूट: दिन में रसोई में नई फ़सल की सब्ज़ियाँ (मिली-जुली सब्ज़ी — «अन्नकूट की सब्ज़ी»), कढ़ी-चावल, पूड़ी, बाजरे/मक्का की रोटी, खीर, हलवा, लड्डू, मालपुआ, फल, मेवे — जितने व्यंजन बन सकें (परंपरा में 56); उन्हें थालियों/पत्तलों में पर्वत-सा सजाकर ठाकुर जी के सामने रखें।
  5. शाम को (गोधूलि बेला में) ठाकुर जी और गोवर्धन को अन्नकूट का भोग लगाएँ, आरती करें — «आरती कुंजबिहारी की»; दीपक जलाएँ।
  6. परिवार सहित गोवर्धन की सात परिक्रमा करें — हाथ में जल का लोटा, जल की धार गिराते हुए (ब्रज में यही रीत), «गोवर्धन महाराज की जय» बोलते हुए; बच्चे-बुज़ुर्ग सब।
  7. भोग लगा अन्नकूट-प्रसाद परिवार, पड़ोसियों, गौशाला और ज़रूरतमंदों में बाँटें — इस दिन प्रसाद किसी को न लौटाएँ।
  8. गोबर का गोवर्धन अगले दिन सूखने पर उपले बनाकर या खेत/पौधे में डाल दें — कूड़े में नहीं।

प्रश्नोत्तर

क्या गोवर्धन पूजा 2026 फ़िजी और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — मंगलवार, 10 नवंबर 2026।

सुवा में गोवर्धन पूजा 2026 का पूजा-समय?

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: 5:23 AM से 7:58 AM (FJT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (सुवा के लिए Fiji Time (FJT))।

अन्नकूट में 56 भोग ही क्यों?

कथा के अनुसार कृष्ण ने गोवर्धन उठाए सात दिन में आठ पहर × सात दिन = 56 बार भोजन नहीं किया, इसलिए 56 भोग। घर में जितने बन सकें उतने बनाएँ — भाव मुख्य है, गिनती नहीं।

गोबर न मिले तो गोवर्धन कैसे बनाएँ?

मिट्टी, आटे या गोबर के उपले से भी प्रतीक बना सकते हैं; या गोवर्धन-चित्र/गोवर्धन-शिला (मथुरा से लाई) की पूजा। शहरों में गौशाला से थोड़ा गोबर मिल जाता है।

गोवर्धन पूजा और बलि-प्रतिपदा एक ही दिन क्यों?

दोनों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को हैं — उत्तर-पश्चिम भारत में गोवर्धन-अन्नकूट और महाराष्ट्र-दक्षिण में राजा बलि का धरती पर आगमन; गुजरात में यही नया साल है।

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