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षोडशवर्ग: सोलह वर्ग-कुंडलियाँ और किससे क्या देखें

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति
⚡ सार 30 सेकंड में
  • सोलह वर्ग = एक ही कुंडली के सोलह सूक्ष्म-चित्र; हर वर्ग जीवन के एक क्षेत्र का (D9 जीवनसाथी, D10 करियर, D7 संतान)
  • वर्ग D1 के वादे की पुष्टि करता है, नया वादा नहीं बनाता — क्रम: पहले D1, फिर D9, फिर विषय का वर्ग
  • वर्ग जितना सूक्ष्म, जन्म-समय उतना शुद्ध चाहिए — D60 का लग्न लगभग 2 मिनट में बदलता है

जन्म-कुंडली (D1) पूरा चित्र देती है, पर हर विषय की बारीकी नहीं। इसीलिए पराशर ने हर राशि को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर सोलह «वर्ग-कुंडलियाँ» बताईं — हर एक जीवन के एक ख़ास क्षेत्र का सूक्ष्म-चित्र।

यह लेख सोलहों वर्गों की सूची, हर वर्ग का विषय, उन्हें पढ़ने का सही क्रम और वह सावधानी बताता है जिसके बिना वर्ग-कुंडली भ्रम देती है — जन्म-समय की शुद्धता।

वर्ग-कुंडली बनती कैसे है

हर राशि 30 अंश की होती है। उसे बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है — नवांश में 9 हिस्से (प्रत्येक 3°20′), दशांश में 10 (प्रत्येक 3°), षष्ट्यंश में 60 (प्रत्येक आधा अंश)। ग्रह जिस हिस्से में पड़ता है, नियम के अनुसार उसे उस वर्ग में एक नई राशि मिलती है।

इस तरह एक ही जन्म-समय से सोलह अलग कुंडलियाँ बनती हैं। नाम में «D» के बाद की संख्या बताती है कि राशि कितने हिस्सों में बँटी — D9 यानी नौ हिस्से।

सोलह वर्ग और उनके विषय

पराशर के अनुसार:

  • D1 राशि (लग्न-कुंडली) — शरीर और जीवन का समग्र चित्र
  • D2 होरा — धन-संपदा
  • D3 द्रेष्काण — भाई-बहन और पराक्रम
  • D4 चतुर्थांश — भाग्य, घर और अचल संपत्ति
  • D7 सप्तांश — संतान
  • D9 नवांश — जीवनसाथी, धर्म और ग्रहों का वास्तविक बल
  • D10 दशांश — कर्म, पद और आजीविका
  • D12 द्वादशांश — माता-पिता
  • D16 षोडशांश — वाहन और सुख-साधन
  • D20 विंशांश — उपासना और आध्यात्मिक प्रगति
  • D24 चतुर्विंशांश — विद्या और शिक्षा
  • D27 सप्तविंशांश (भांश) — बल और निर्बलता
  • D30 त्रिंशांश — अरिष्ट और कष्ट
  • D40 खवेदांश — शुभ-अशुभ फल
  • D45 अक्षवेदांश — सभी विषयों की सामान्य पुष्टि
  • D60 षष्ट्यंश — सभी विषय; पूर्व-कर्म की सबसे सूक्ष्म परत
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वर्गों के समूह

सोलहों हर बार नहीं देखे जाते; परंपरा में चार समूह चलते हैं:

  • षड्वर्ग (6) — D1, D2, D3, D9, D12, D30
  • सप्तवर्ग (7) — षड्वर्ग और D7
  • दशवर्ग (10) — सप्तवर्ग और D10, D16, D60
  • षोडशवर्ग (16) — सभी सोलह

पढ़ने का सही क्रम

वर्ग-कुंडली कभी अकेली नहीं पढ़ी जाती। नियम यह है: जो बात जन्म-कुंडली में है ही नहीं, उसे कोई वर्ग पैदा नहीं कर सकता — वर्ग केवल D1 के वादे को पक्का, कमज़ोर या सूक्ष्म करता है।

इसलिए क्रम यह रखिए — पहले D1 में सम्बन्धित भाव और भावेश देखिए, फिर D9 में उन्हीं ग्रहों का बल, और तब विषय का अपना वर्ग (करियर के लिए D10, संतान के लिए D7)। जो ग्रह D1 और D9 दोनों में एक ही राशि में हो, वह «वर्गोत्तम» कहलाता है और विशेष बली माना जाता है।

विंशोपक बल

ग्रह सोलहों वर्गों में कुल मिलाकर कितनी अच्छी स्थिति में है, इसका एक अंक निकलता है — विंशोपक बल, जो 20 में से गिना जाता है। हर वर्ग का भार अलग है, और ग्रह को उस वर्ग में स्व, मित्र या शत्रु राशि मिलने के अनुसार अंक मिलते हैं।

ऊँचा विंशोपक बल बताता है कि ग्रह का वादा केवल सतह पर नहीं, गहराई तक टिका है — ऐसे ग्रह की दशा में फल अधिक स्थिर मिलते हैं।

सबसे बड़ी सावधानी — जन्म-समय

वर्ग जितना सूक्ष्म, समय की ग़लती का असर उतना बड़ा। लग्न औसतन हर 4 मिनट में 1 अंश आगे बढ़ता है — इसलिए नवांश-लग्न लगभग 13 मिनट में, दशांश-लग्न लगभग 12 मिनट में और षष्ट्यंश-लग्न केवल 2 मिनट में बदल जाता है।

यदि जन्म-समय अनुमान से लिखा गया है, तो सूक्ष्म वर्गों पर निष्कर्ष टिकाने से पहले समय-शुद्धि करा लेनी चाहिए। हमारी निःशुल्क कुंडली में वर्ग-चार्ट एक ही सूची से चुनकर देखे जा सकते हैं।

❓ सामान्य प्रश्न

षोडशवर्ग में कौन-कौन से वर्ग आते हैं?
D1, D2, D3, D4, D7, D9, D10, D12, D16, D20, D24, D27, D30, D40, D45 और D60 — कुल सोलह, जिन्हें पराशर ने बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में बताया है।

सबसे महत्त्वपूर्ण वर्ग-कुंडली कौन-सी है?
जन्म-कुंडली (D1) के बाद नवांश (D9) सबसे महत्त्वपूर्ण मानी जाती है — उससे ग्रहों का वास्तविक बल और विवाह देखा जाता है। करियर के लिए दशांश (D10) और संतान के लिए सप्तांश (D7) देखे जाते हैं।

क्या वर्ग-कुंडली के लिए सटीक जन्म-समय ज़रूरी है?
हाँ। नवांश-लग्न लगभग 13 मिनट में और षष्ट्यंश-लग्न लगभग 2 मिनट में बदल जाता है, इसलिए समय अनुमानित हो तो सूक्ष्म वर्गों पर भरोसा करने से पहले समय-शुद्धि करानी चाहिए।

⚠️ वर्ग-कुंडली जन्म-समय पर बहुत निर्भर है; कुछ मिनट की अशुद्धि भी निष्कर्ष बदल सकती है। D1 की पुष्टि के बिना किसी वर्ग से अकेला निर्णय न लें।

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