| शहर | तारीख | राखी-समय — अपराह्न (भद्रा-समाप्ति के बाद) | तिथि (स्थानीय) |
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| डबलिन Irish time (GMT/GMT+1) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | 5:03 PM – 5:38 PM GMT+1 भद्रा तक 5:03 PM | 27 अगस्त, 4:39 AM → 28 अगस्त, 5:19 AM GMT+1 |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
श्रावण पूर्णिमा: दूसरे दिन सूर्योदय के बाद पूर्णिमा कम-से-कम 3 मुहूर्त (दिन का 1/5) रहे तो उसी दिन; नहीं तो पहले दिन — अपराह्न में, या भद्रा समाप्त होने के बाद प्रदोष में। भद्रा में राखी कभी नहीं।
रक्षा-सूत्र: «येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल» — जिस सूत्र से लक्ष्मी ने राजा बलि को बाँधा, वही रक्षा-बंधन; बहन के साथ पुरोहित यजमान को, माँ पुत्र को, पत्नी पति को भी बाँध सकती है — मूल में यह «रक्षा» का सूत्र है, भाई-बहन का रूप लोक में सबसे प्रिय हुआ।
भद्रा (विष्टि-करण) श्रावण पूर्णिमा को प्रायः दिन के पहले भाग में होती है; भद्रा में राखी और होलिका-दहन दोनों वर्जित — शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी थी, कुल का नाश हुआ (लोक-कथा)। भद्रा-मुख/पुच्छ का भेद पंडित बताते हैं; सरल नियम — भद्रा समाप्त होने के बाद, पूर्णिमा रहते।
यही दिन श्रावणी-उपाकर्म (यजुर्वेदियों का नया यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन का आरंभ), हयग्रीव-जयंती, संस्कृत-दिवस (भारत), गायत्री-जयंती (कुछ परंपरा); अमरनाथ-यात्रा का समापन (छड़ी-मुबारक); उत्तराखंड में «जन्योपुन्यू», ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा (बलराम-जन्म), बंगाल-गुजरात में झूलन-पूर्णिमा (राधा-कृष्ण के झूले का समापन)।
नहीं। भारत: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026; डबलिन (आयरलैंड): गुरुवार, 27 अगस्त 2026। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
राखी-समय — अपराह्न (भद्रा-समाप्ति के बाद): 5:03 PM से 5:38 PM (GMT+1)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (डबलिन के लिए Irish time (GMT/GMT+1))।
भद्रा (विष्टि-करण) शनि की बहन मानी गईं — अशुभ-काल; लोक-कथा में शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी और लंका का नाश हुआ। भद्रा में राखी व होलिका-दहन वर्जित; भद्रा-पुच्छ में आपद्-धर्म से कुछ पंडित अनुमति देते हैं।
भगवान (कृष्ण/गणेश/हनुमान) को, पिता/चचेरे-ममेरे भाई, मुँहबोले भाई, या रक्षा-सूत्र किसी भी रक्षक को — पुरोहित यजमान को, पत्नी पति को, बहन बहन को भी; मूल भाव «रक्षा का बंधन» है।
यजुर्वेदी ब्राह्मणों का वर्ष का नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण, ऋषि-तर्पण और वेदाध्ययन का आरंभ — श्रावण पूर्णिमा को (दक्षिण में अवनि अवित्तम, ऋग्वेदी श्रवण-नक्षत्र के दिन); अगले दिन गायत्री-जप (1008)। भद्रा/ग्रहण हो तो तिथि बदलती है — पंचांग/पंडित।
महाराष्ट्र-गोवा-कोंकण में इसी श्रावण पूर्णिमा को मछुआरे समुद्र-देव वरुण को नारियल अर्पित करते हैं — मानसून के बाद समुद्र शांत, नौकाएँ फिर उतरतीं; नारळी-भात बनता है; राखी भी बाँधते हैं।