| शहर | तारीख | राखी-समय — अपराह्न | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | 2:39 PM – 5:20 PM EDT भद्रा तक 12:03 PM | 26 अगस्त, 11:39 PM → 28 अगस्त, 12:19 AM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | 2:41 PM – 5:22 PM EDT भद्रा तक 12:03 PM | 26 अगस्त, 11:39 PM → 28 अगस्त, 12:19 AM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | 2:36 PM – 5:20 PM PDT भद्रा तक 9:03 AM | 26 अगस्त, 8:39 PM → 27 अगस्त, 9:19 PM PDT |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | 3:00 PM – 5:46 PM MDT भद्रा तक 10:03 AM | 26 अगस्त, 9:39 PM → 27 अगस्त, 10:19 PM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | 2:59 PM – 5:47 PM MDT भद्रा तक 10:03 AM | 26 अगस्त, 9:39 PM → 27 अगस्त, 10:19 PM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | 2:17 PM – 4:59 PM EDT भद्रा तक 12:03 PM | 26 अगस्त, 11:39 PM → 28 अगस्त, 12:19 AM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
श्रावण पूर्णिमा: दूसरे दिन सूर्योदय के बाद पूर्णिमा कम-से-कम 3 मुहूर्त (दिन का 1/5) रहे तो उसी दिन; नहीं तो पहले दिन — अपराह्न में, या भद्रा समाप्त होने के बाद प्रदोष में। भद्रा में राखी कभी नहीं।
रक्षा-सूत्र: «येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल» — जिस सूत्र से लक्ष्मी ने राजा बलि को बाँधा, वही रक्षा-बंधन; बहन के साथ पुरोहित यजमान को, माँ पुत्र को, पत्नी पति को भी बाँध सकती है — मूल में यह «रक्षा» का सूत्र है, भाई-बहन का रूप लोक में सबसे प्रिय हुआ।
भद्रा (विष्टि-करण) श्रावण पूर्णिमा को प्रायः दिन के पहले भाग में होती है; भद्रा में राखी और होलिका-दहन दोनों वर्जित — शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी थी, कुल का नाश हुआ (लोक-कथा)। भद्रा-मुख/पुच्छ का भेद पंडित बताते हैं; सरल नियम — भद्रा समाप्त होने के बाद, पूर्णिमा रहते।
यही दिन श्रावणी-उपाकर्म (यजुर्वेदियों का नया यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन का आरंभ), हयग्रीव-जयंती, संस्कृत-दिवस (भारत), गायत्री-जयंती (कुछ परंपरा); अमरनाथ-यात्रा का समापन (छड़ी-मुबारक); उत्तराखंड में «जन्योपुन्यू», ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा (बलराम-जन्म), बंगाल-गुजरात में झूलन-पूर्णिमा (राधा-कृष्ण के झूले का समापन)।
नहीं। भारत: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026; टोरंटो (कनाडा): गुरुवार, 27 अगस्त 2026। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
राखी-समय — अपराह्न: 2:39 PM से 5:20 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
भद्रा (विष्टि-करण) शनि की बहन मानी गईं — अशुभ-काल; लोक-कथा में शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी और लंका का नाश हुआ। भद्रा में राखी व होलिका-दहन वर्जित; भद्रा-पुच्छ में आपद्-धर्म से कुछ पंडित अनुमति देते हैं।
भगवान (कृष्ण/गणेश/हनुमान) को, पिता/चचेरे-ममेरे भाई, मुँहबोले भाई, या रक्षा-सूत्र किसी भी रक्षक को — पुरोहित यजमान को, पत्नी पति को, बहन बहन को भी; मूल भाव «रक्षा का बंधन» है।
यजुर्वेदी ब्राह्मणों का वर्ष का नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण, ऋषि-तर्पण और वेदाध्ययन का आरंभ — श्रावण पूर्णिमा को (दक्षिण में अवनि अवित्तम, ऋग्वेदी श्रवण-नक्षत्र के दिन); अगले दिन गायत्री-जप (1008)। भद्रा/ग्रहण हो तो तिथि बदलती है — पंचांग/पंडित।
महाराष्ट्र-गोवा-कोंकण में इसी श्रावण पूर्णिमा को मछुआरे समुद्र-देव वरुण को नारियल अर्पित करते हैं — मानसून के बाद समुद्र शांत, नौकाएँ फिर उतरतीं; नारळी-भात बनता है; राखी भी बाँधते हैं।