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सिंगापुर में रक्षा बंधन 2026: शुक्रवार, 28 अगस्त — शहर-वार पूजा-समय

सिंगापुर में रक्षा बंधन 2026: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 (सिंगापुर)
राखी-समय (पूर्णिमा-अंत तक, भद्रा-रहित): 7:02 AM – 12:19 PM SGT
भारत के दिन ही। 2026 में रक्षा बंधन भारत और सिंगापुर में शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को है।

रक्षा बंधन 2026 — सिंगापुर

शहरतारीखराखी-समय (पूर्णिमा-अंत तक, भद्रा-रहित)तिथि (स्थानीय)
सिंगापुर
Singapore Time (SGT)
शुक्रवार, 28 अगस्त 20267:02 AM – 12:19 PM SGT27 अगस्त, 11:39 AM → 28 अगस्त, 12:19 PM SGT

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

रक्षा बंधन की तारीख कैसे तय होती है

श्रावण पूर्णिमा: दूसरे दिन सूर्योदय के बाद पूर्णिमा कम-से-कम 3 मुहूर्त (दिन का 1/5) रहे तो उसी दिन; नहीं तो पहले दिन — अपराह्न में, या भद्रा समाप्त होने के बाद प्रदोष में। भद्रा में राखी कभी नहीं।

महत्व

रक्षा-सूत्र: «येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल» — जिस सूत्र से लक्ष्मी ने राजा बलि को बाँधा, वही रक्षा-बंधन; बहन के साथ पुरोहित यजमान को, माँ पुत्र को, पत्नी पति को भी बाँध सकती है — मूल में यह «रक्षा» का सूत्र है, भाई-बहन का रूप लोक में सबसे प्रिय हुआ।

भद्रा (विष्टि-करण) श्रावण पूर्णिमा को प्रायः दिन के पहले भाग में होती है; भद्रा में राखी और होलिका-दहन दोनों वर्जित — शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी थी, कुल का नाश हुआ (लोक-कथा)। भद्रा-मुख/पुच्छ का भेद पंडित बताते हैं; सरल नियम — भद्रा समाप्त होने के बाद, पूर्णिमा रहते।

यही दिन श्रावणी-उपाकर्म (यजुर्वेदियों का नया यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन का आरंभ), हयग्रीव-जयंती, संस्कृत-दिवस (भारत), गायत्री-जयंती (कुछ परंपरा); अमरनाथ-यात्रा का समापन (छड़ी-मुबारक); उत्तराखंड में «जन्योपुन्यू», ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा (बलराम-जन्म), बंगाल-गुजरात में झूलन-पूर्णिमा (राधा-कृष्ण के झूले का समापन)।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. सुबह स्नान, नए/साफ़ वस्त्र; घर के मंदिर में पहली राखी भगवान (कृष्ण/गणेश/हनुमान) को, तुलसी-कलश को; कई घर पितरों को भी स्मरण।
  2. राखी की थाली: रोली, अक्षत, कुमकुम, दीपक, राखियाँ, मिठाई, नारियल/श्रीफल, कुछ पैसे, रक्षा-सूत्र, चंदन; थाली पर लाल कपड़ा।
  3. समय: ऊपर भद्रा-समाप्ति के बाद, अपराह्न (दोपहर बाद) या प्रदोष; भद्रा हो तो टालना — पूरे दिन भद्रा हो (दुर्लभ) तो भद्रा-पुच्छ या प्रदोष में पंडित की सलाह से।
  4. भाई पूर्व/उत्तर मुख बैठे, सिर पर रूमाल/टोपी; बहन तिलक (रोली-अक्षत), आरती, दाहिनी कलाई पर राखी बाँधते हुए रक्षा-मंत्र («येन बद्धो बली राजा…»), मिठाई खिलाना, नारियल देना; भाई बहन के पैर/सिर पर हाथ (छोटी हो तो) व उपहार/शगुन, रक्षा-वचन।
  5. बहन दूर हो तो डाक/कूरियर से राखी — भाई स्वयं या भाभी/माँ बाँधे, वीडियो-कॉल पर आरती; राखी भगवान को दिखाकर।
  6. राखी कब उतारें: कम-से-कम जन्माष्टमी तक या पितृ-पक्ष से पहले; उतारकर बहते जल/पेड़ की जड़ में या तिजोरी में — कूड़े में नहीं (कई घर)।
  7. श्रावणी-उपाकर्म (ब्राह्मण-परिवार): सुबह नदी/घर पर स्नान, दश-विध स्नान, ऋषि-तर्पण, नया जनेऊ; पुराना जल में; अगले दिन गायत्री-जप।
  8. शाम: परिवार का भोजन — खीर/सेवइयाँ-घेवर; बहन-भाई का उपहार-आदान; भाई ससुराल में बहन से मिलने जाए तो «सलोनो» (कुछ इलाक़े)।

प्रश्नोत्तर

क्या रक्षा बंधन 2026 सिंगापुर और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — शुक्रवार, 28 अगस्त 2026।

सिंगापुर में रक्षा बंधन 2026 का पूजा-समय?

राखी-समय (पूर्णिमा-अंत तक, भद्रा-रहित): 7:02 AM से 12:19 PM (SGT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (सिंगापुर के लिए Singapore Time (SGT))।

भद्रा में राखी क्यों नहीं?

भद्रा (विष्टि-करण) शनि की बहन मानी गईं — अशुभ-काल; लोक-कथा में शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी और लंका का नाश हुआ। भद्रा में राखी व होलिका-दहन वर्जित; भद्रा-पुच्छ में आपद्-धर्म से कुछ पंडित अनुमति देते हैं।

भाई न हो तो राखी किसे?

भगवान (कृष्ण/गणेश/हनुमान) को, पिता/चचेरे-ममेरे भाई, मुँहबोले भाई, या रक्षा-सूत्र किसी भी रक्षक को — पुरोहित यजमान को, पत्नी पति को, बहन बहन को भी; मूल भाव «रक्षा का बंधन» है।

श्रावणी-उपाकर्म क्या है?

यजुर्वेदी ब्राह्मणों का वर्ष का नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण, ऋषि-तर्पण और वेदाध्ययन का आरंभ — श्रावण पूर्णिमा को (दक्षिण में अवनि अवित्तम, ऋग्वेदी श्रवण-नक्षत्र के दिन); अगले दिन गायत्री-जप (1008)। भद्रा/ग्रहण हो तो तिथि बदलती है — पंचांग/पंडित।

नारियल पूर्णिमा क्या है?

महाराष्ट्र-गोवा-कोंकण में इसी श्रावण पूर्णिमा को मछुआरे समुद्र-देव वरुण को नारियल अर्पित करते हैं — मानसून के बाद समुद्र शांत, नौकाएँ फिर उतरतीं; नारळी-भात बनता है; राखी भी बाँधते हैं।

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