अक्षवेदांश (D45) — चरित्र व सर्वांगीण शुभता (पितृ-पक्ष)
क्या देखा जाता है
अक्षवेदांश (D45) में देखा जाता है: चरित्र व सर्वांगीण शुभता (पितृ-पक्ष)। षोडशवर्ग का नियम याद रखिए — जो वादा जन्म-कुंडली (D1) करती है, उसकी पुष्टि सम्बन्धित वर्ग में होती है; D1 का शुभ योग यहाँ भी बलवान हो तो फल पक्का, यहाँ निर्बल हो तो घटकर या देर से।
गणना-विधि
पैंतालीस भाग; चर राशि मेष से, स्थिर सिंह से, द्विस्वभाव धनु से। पितृ-पक्ष के संस्कारों की परत — D40 के साथ पढ़ी जाती है।
पढ़ने के सूत्र
पहले अक्षवेदांश-लग्न और उसका स्वामी देखिए, फिर सम्बन्धित कारक ग्रह की इस वर्ग में स्थिति। D1 में जो ग्रह इस विषय का काम करता है, उसकी D45-स्थिति ही अंतिम मुहर है। हमारी निःशुल्क कुंडली में सभी षोडशवर्ग स्वतः बनते हैं।
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