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दक्षिण अफ़्रीका में शरद पूर्णिमा 2026: रविवार, 25 अक्टूबर — शहर-वार पूजा-समय

दक्षिण अफ़्रीका में शरद पूर्णिमा 2026: रविवार, 25 अक्टूबर 2026 (डरबन)
चंद्रोदय: 5:44 PM SAST
भारत के दिन ही। 2026 में शरद पूर्णिमा भारत और दक्षिण अफ़्रीका के सब शहरों में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को है।

शरद पूर्णिमा 2026 — दक्षिण अफ़्रीका के सब शहर

शहरतारीखचंद्रोदयतिथि (स्थानीय)
डरबन
South Africa Time (SAST)
रविवार, 25 अक्टूबर 20265:44 PM SAST25 अक्टूबर, 8:27 AM → 26 अक्टूबर, 6:12 AM SAST
जोहान्सबर्ग
South Africa Time (SAST)
रविवार, 25 अक्टूबर 20265:52 PM SAST25 अक्टूबर, 8:27 AM → 26 अक्टूबर, 6:12 AM SAST

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

शरद पूर्णिमा की तारीख कैसे तय होती है

जिस रात निशीथ (स्थानीय अर्धरात्रि) में पूर्णिमा हो — कोजागरी रात; दो रातों के निशीथ में हो तो दूसरी (जब संध्या में भी पूर्णिमा हो)। चंद्रोदय के बाद खीर चाँदनी में रखी जाती है।

महत्व

आयुर्वेद के अनुसार शरद ऋतु पित्त-प्रधान है और इस रात की चाँदनी शीतल-औषधीय मानी गई — दूध-चावल की खीर चाँदनी में रखने से उसके गुण बढ़ते हैं। इसी से अस्थमा-रोगियों को इस रात खीर खिलाने की लोक-परंपरा है।

यह लक्ष्मी-प्राप्ति का व्रत है — पूर्णिमा को स्त्रियाँ व्रत रखती हैं, शाम को चंद्रोदय पर चंद्र-अर्घ्य, रात में लक्ष्मी-पूजन और जागरण; अगले दिन सुबह खीर का प्रसाद बाँटकर व्रत खोलती हैं।

ब्रज में यह श्रीकृष्ण के महारास की रात है — इसी पूर्णिमा को कृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था; इसलिए रास-पूर्णिमा भी।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें — «मैं शरद पूर्णिमा का व्रत लक्ष्मी-प्राप्ति व परिवार की समृद्धि के लिए करती हूँ।» दिन में फलाहार।
  2. शाम को घर के मंदिर या पूजा-स्थान की सफ़ाई; लक्ष्मी जी व श्रीकृष्ण/राधा-कृष्ण की मूर्ति/चित्र स्थापित करें, लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
  3. दूध-चावल-शक्कर की खीर बनाएँ (केसर-इलायची-मेवा से) — पीतल या चाँदी के बर्तन में, ढक्कन नहीं, महीन कपड़ा/जाली से ढककर।
  4. चंद्रोदय (ऊपर समय) पर छत/आँगन में चंद्रमा को जल-दूध का अर्घ्य दें, दीप दिखाएँ; «ॐ सोम सोमाय नमः» या चंद्र-मंत्र का जप।
  5. खीर का पात्र खुली छत या आँगन में चाँदनी में रखें — जहाँ सीधी चाँदनी पड़े; ऊपर जाली ताकि कीड़े-पक्षी न बैठें। कम-से-कम रात 12 बजे तक, परंपरा में पूरी रात।
  6. रात में लक्ष्मी-पूजन: दीप, फूल, कमल (मिले तो), खील-बताशे, सफ़ेद मिठाई, इत्र; श्रीसूक्त, लक्ष्मी-चालीसा या «ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः» का जप। घर के द्वार-खिड़कियाँ खुली रखें, दीये जलाएँ।
  7. जागरण: रात में भजन-कीर्तन, कथा, या कम-से-कम आधी रात तक जागकर लक्ष्मी-स्मरण — «को जागर्ति» की परंपरा।
  8. सुबह (या आधी रात के बाद) चाँदनी में रखी खीर पहले लक्ष्मी जी व चंद्रमा को भोग लगाएँ, फिर परिवार में प्रसाद बाँटें और व्रत खोलें। रोगी, बच्चे, बुज़ुर्ग सबको दें।

प्रश्नोत्तर

क्या शरद पूर्णिमा 2026 दक्षिण अफ़्रीका और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — रविवार, 25 अक्टूबर 2026।

डरबन में शरद पूर्णिमा 2026 का पूजा-समय?

चंद्रोदय: 5:44 PM (SAST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (डरबन के लिए South Africa Time (SAST))।

खीर चाँदनी में कितनी देर रखें?

चंद्रोदय के बाद से कम-से-कम आधी रात (12 बजे) तक; परंपरा में पूरी रात और सुबह प्रसाद। जाली से ढककर रखें।

क्या खीर सचमुच औषधि बन जाती है?

यह लोक और आयुर्वेदिक मान्यता है — शरद की शीतल चाँदनी और दूध-चावल का संयोग पित्त-शामक माना गया। इसे श्रद्धा और परंपरा के रूप में लें; किसी रोग का इलाज चिकित्सक से ही कराएँ।

शरद पूर्णिमा और कोजागरी में क्या अंतर है?

दोनों एक ही तिथि हैं — आश्विन पूर्णिमा। उत्तर भारत में खीर-चंद्रमा पर ज़ोर है, बंगाल-ओडिशा-मिथिला-महाराष्ट्र में «कोजागरी» नाम से लक्ष्मी-पूजन व जागरण पर।

शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे खोलें?

अगली सुबह चाँदनी में रखी खीर लक्ष्मी-चंद्रमा को भोग लगाकर, उसी के प्रसाद से व्रत खोलें; रात में जागरण किया हो तो आधी रात के बाद भी प्रसाद ले सकते हैं।

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