| शहर | तारीख | चंद्रोदय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 25 अक्टूबर 2026 | 5:47 PM EDT | 25 अक्टूबर, 2:27 AM → 26 अक्टूबर, 12:12 AM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 25 अक्टूबर 2026 | 5:48 PM EDT | 25 अक्टूबर, 2:27 AM → 26 अक्टूबर, 12:12 AM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 5:12 PM PDT | 24 अक्टूबर, 11:27 PM → 25 अक्टूबर, 9:12 PM PDT |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 5:33 PM MDT | 25 अक्टूबर, 12:27 AM → 25 अक्टूबर, 10:12 PM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 5:26 PM MDT | 25 अक्टूबर, 12:27 AM → 25 अक्टूबर, 10:12 PM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 25 अक्टूबर 2026 | 5:19 PM EDT | 25 अक्टूबर, 2:27 AM → 26 अक्टूबर, 12:12 AM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस रात निशीथ (स्थानीय अर्धरात्रि) में पूर्णिमा हो — कोजागरी रात; दो रातों के निशीथ में हो तो दूसरी (जब संध्या में भी पूर्णिमा हो)। चंद्रोदय के बाद खीर चाँदनी में रखी जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार शरद ऋतु पित्त-प्रधान है और इस रात की चाँदनी शीतल-औषधीय मानी गई — दूध-चावल की खीर चाँदनी में रखने से उसके गुण बढ़ते हैं। इसी से अस्थमा-रोगियों को इस रात खीर खिलाने की लोक-परंपरा है।
यह लक्ष्मी-प्राप्ति का व्रत है — पूर्णिमा को स्त्रियाँ व्रत रखती हैं, शाम को चंद्रोदय पर चंद्र-अर्घ्य, रात में लक्ष्मी-पूजन और जागरण; अगले दिन सुबह खीर का प्रसाद बाँटकर व्रत खोलती हैं।
ब्रज में यह श्रीकृष्ण के महारास की रात है — इसी पूर्णिमा को कृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था; इसलिए रास-पूर्णिमा भी।
नहीं। भारत: रविवार, 25 अक्टूबर 2026; टोरंटो (कनाडा): रविवार, 25 अक्टूबर 2026। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
चंद्रोदय: 5:47 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
चंद्रोदय के बाद से कम-से-कम आधी रात (12 बजे) तक; परंपरा में पूरी रात और सुबह प्रसाद। जाली से ढककर रखें।
यह लोक और आयुर्वेदिक मान्यता है — शरद की शीतल चाँदनी और दूध-चावल का संयोग पित्त-शामक माना गया। इसे श्रद्धा और परंपरा के रूप में लें; किसी रोग का इलाज चिकित्सक से ही कराएँ।
दोनों एक ही तिथि हैं — आश्विन पूर्णिमा। उत्तर भारत में खीर-चंद्रमा पर ज़ोर है, बंगाल-ओडिशा-मिथिला-महाराष्ट्र में «कोजागरी» नाम से लक्ष्मी-पूजन व जागरण पर।
अगली सुबह चाँदनी में रखी खीर लक्ष्मी-चंद्रमा को भोग लगाकर, उसी के प्रसाद से व्रत खोलें; रात में जागरण किया हो तो आधी रात के बाद भी प्रसाद ले सकते हैं।