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अमेरिका में पितृ पक्ष 2026: 27 सितंबर – 9 अक्टूबर — शहर-वार पूजा-समय

अमेरिका में पितृ पक्ष 2026: रविवार, 27 सितंबर 2026 – शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 (न्यूयॉर्क)
कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध): 12:20 PM – 1:06 PM EDT
भारत से अलग। भारत में पितृ पक्ष 2026 शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को है; न्यूयॉर्क (अमेरिका) में शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 — एक दिन पहले। कारण: पितृ पक्ष आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक। सर्व पितृ अमावस्या = जिस दिन अपराह्न (श्राद्ध-काल) में अमावस्या अधिक हो; श्राद्ध कुतुप मुहूर्त में। न्यूयॉर्क में तिथि स्थानीय समय 11:56 AM EDT पर ख़त्म होती है, इसलिए निर्णायक क्षण दूसरे दिन पड़ता है।

पितृ पक्ष 2026 — अमेरिका के सब शहर

शहरतारीखकुतुप मुहूर्त (श्राद्ध)तिथि (स्थानीय)
न्यूयॉर्क
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:20 PM – 1:06 PM EDT9 अक्टूबर, 12:06 PM → 10 अक्टूबर, 11:56 AM EDT
न्यू जर्सी (एडिसन)
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:22 PM – 1:07 PM EDT9 अक्टूबर, 12:06 PM → 10 अक्टूबर, 11:56 AM EDT
शिकागो
Central Time (CST/CDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:14 PM – 1:00 PM CDT9 अक्टूबर, 11:06 AM → 10 अक्टूबर, 10:56 AM CDT
ह्यूस्टन
Central Time (CST/CDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:45 PM – 1:32 PM CDT9 अक्टूबर, 11:06 AM → 10 अक्टूबर, 10:56 AM CDT
डलास
Central Time (CST/CDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:51 PM – 1:37 PM CDT9 अक्टूबर, 11:06 AM → 10 अक्टूबर, 10:56 AM CDT
अटलांटा
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 20261:01 PM – 1:48 PM EDT9 अक्टूबर, 12:06 PM → 10 अक्टूबर, 11:56 AM EDT
वॉशिंगटन डीसी
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:32 PM – 1:18 PM EDT9 अक्टूबर, 12:06 PM → 10 अक्टूबर, 11:56 AM EDT
लॉस एंजेलेस
Pacific Time (PST/PDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:17 PM – 1:03 PM PDT9 अक्टूबर, 9:06 AM → 10 अक्टूबर, 8:56 AM PDT
सैन होज़े (बे एरिया)
Pacific Time (PST/PDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:32 PM – 1:17 PM PDT9 अक्टूबर, 9:06 AM → 10 अक्टूबर, 8:56 AM PDT
सिएटल
Pacific Time (PST/PDT)
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 202612:34 PM – 1:18 PM PDT9 अक्टूबर, 9:06 AM → 10 अक्टूबर, 8:56 AM PDT

समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

जुड़े दिन (न्यूयॉर्क)

आरंभरविवार, 27 सितंबर 2026

अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।

पितृ पक्ष की तारीख कैसे तय होती है

पितृ पक्ष आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक। सर्व पितृ अमावस्या = जिस दिन अपराह्न (श्राद्ध-काल) में अमावस्या अधिक हो; श्राद्ध कुतुप मुहूर्त में।

महत्व

ऋण-सिद्धांत: मनुष्य पर देव-ऋषि-पितृ तीन ऋण; पितृ-ऋण संतान-परंपरा व श्राद्ध से चुकता; गरुड़/मार्कंडेय-पुराण, मनुस्मृति में श्राद्ध का विधान — «पितरों की तृप्ति से आयु, संतान, धन, विद्या, स्वर्ग»; श्राद्ध न करने से पितृ-दोष (कुंडली में सूर्य-राहु/केतु/शनि के योग) — संतान-बाधा, रोग, कलह — माना जाता है; पितृ-पक्ष उसकी शांति का श्रेष्ठ काल।

श्राद्ध का समय: अपराह्न (दोपहर 12-1:30 — कुतुप-रौहिण मुहूर्त, ऊपर अपराह्न) श्रेष्ठ; दिशा दक्षिण (पितर-दिशा), जनेऊ दाहिने कंधे पर (अपसव्य), तिल-कुशा-जल, चावल-जौ-तिल के पिंड; कौआ यम का दूत, गाय-कुत्ता-चींटी-देवता — पंच-बलि (पंचग्रास) श्राद्ध का हिस्सा; ब्राह्मण/बेटी-दामाद/भांजा को भोजन = पितरों का भोजन।

गया (बिहार) — विष्णुपद पर पिंडदान पितृ-पक्ष का सबसे बड़ा तीर्थ (पितृपक्ष मेला, 17 दिन), फिर हरिद्वार (नारायणी-शिला), प्रयाग, काशी (पिशाच-मोचन), सिद्धपुर (गुजरात — मातृ-गया), बद्रीनाथ (ब्रह्म-कपाल), रामेश्वरम्, नासिक-त्र्यंबक (पंचवटी), पुष्कर, लोहार्गल; बंगाल में महालय-अमावस्या को «महालया» — दुर्गा का आगमन (आकाशवाणी का «महिषासुरमर्दिनी»), तर्पण गंगा-घाटों पर।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. पक्ष-आरंभ (पूर्णिमा/प्रतिपदा): घर की सफ़ाई, दक्षिण दिशा में पितरों का चित्र/स्थान — जल, दीपक, फूल, तुलसी; संकल्प — «इस पितृ-पक्ष में (नाम) गोत्र के पितरों का श्राद्ध-तर्पण»; पूरे पक्ष रोज़ सुबह तर्पण (हो सके तो) — तांबे के लोटे में जल-तिल-कुशा, दक्षिण मुख, अंगूठे की ओर से जल छोड़ना (पितृ-तीर्थ), «(नाम) गोत्र (पितर-नाम) तृप्यताम्» तीन बार।
  2. तिथि-श्राद्ध (जिस दिन पितर की मृत्यु-तिथि): सुबह स्नान, घर के पुरुष (बेटा/पोता — न हों तो बेटी/पत्नी भी कर सकते हैं, नीचे FAQ) दक्षिण मुख; पितरों का आवाहन — कुशा का आसन, तिल-जल-जौ; ब्राह्मण (या पितर-प्रतीक) को पाद्य-अर्घ्य; पिंडदान — पके चावल-जौ-तिल-घी-शहद के 3 (या 1) पिंड — पिता-दादा-परदादा; पितृ-सूक्त/गजेंद्र-मोक्ष/गीता-7 पाठ।
  3. पंचबलि (पंचग्रास): श्राद्ध-भोजन के पाँच ग्रास पत्ते पर — गाय (गो-बलि), कुत्ता (श्वान), कौआ (काक — छत/खुले में रखें, कौआ आए तो पितर तृप्त), चींटी (पिपीलिका — आटा-चीनी), देवता (अग्नि — घी-भोजन का अंश); पहले ये, फिर ब्राह्मण, फिर परिवार।
  4. ब्राह्मण-भोजन: 1-3 ब्राह्मण (या बेटी-दामाद/भांजा/बहन — पितर-तुल्य) को श्राद्ध-भोजन (खीर-पूड़ी-सब्ज़ी-पितर की प्रिय वस्तु), दक्षिणा, वस्त्र-छाता-जूते-अन्न का दान; भोजन कराते समय मौन, पंखा नहीं झलना (कुछ रीत), भोजन के बाद तिल-जल से विदा — «पितरः प्रीयन्ताम्»।
  5. स्त्रियाँ: श्राद्ध का भोजन स्नान करके, चुपचाप, बिना चखे (पितर पहले); लहसुन-प्याज़-मसूर-बैंगन नहीं; तुलसी-केले के पत्ते; सास/माँ/दादी की मृत्यु-तिथि या मातृ-नवमी पर सुहागिन-ब्राह्मणी/बेटी को भोजन-सुहाग-सामग्री।
  6. सर्व पितृ अमावस्या (महालय): जिनकी तिथि ज्ञात नहीं, सब पितर, विवाहित बेटियाँ, गुरु, मित्र, अकाल-मृत्यु वाले — सबका श्राद्ध-तर्पण; अपराह्न में पिंडदान, पंचबलि, ब्राह्मण-भोजन, दान (अन्न-वस्त्र-छाता-जूते-गाय); शाम दक्षिण में दीपक — पितरों की विदाई «पुनरागमनाय»; अगले दिन प्रतिपदा से नवरात्रि — घट-स्थापना।
  7. पितृ-दोष-शांति: अमावस्या को पीपल में जल-दूध-तिल, «ॐ पितृभ्यः नमः» 108, गीता-7/पितृ-सूक्त, गाय-कुत्ते-कौए को रोज़ ग्रास, ग़रीब को भोजन; गया-श्राद्ध का संकल्प (सामर्थ्य से); कुंडली में दोष हो या न हो — पितृ-पक्ष का श्राद्ध सबके लिए।
  8. पूरे पक्ष: विवाह-सगाई-गृह-प्रवेश-नई ख़रीद (गहने-वाहन-घर — लोक-रीत, शास्त्र में केवल शुभ-संस्कार वर्जित) नहीं; बाल-नाख़ून-दाढ़ी न कटवाना (पुरुष — कई घर), ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन, पितरों का स्मरण, दान।

प्रश्नोत्तर

क्या पितृ पक्ष 2026 अमेरिका और भारत में एक ही दिन है?

नहीं। भारत: शनिवार, 10 अक्टूबर 2026; न्यूयॉर्क (अमेरिका): शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।

न्यूयॉर्क में पितृ पक्ष 2026 का पूजा-समय?

कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध): 12:20 PM से 1:06 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (न्यूयॉर्क के लिए Eastern Time (EST/EDT))।

स्त्री/बेटी श्राद्ध कर सकती है?

हाँ — पुत्र न हो तो पत्नी, बेटी, पोती, बहू, भाई-भतीजा कर सकते हैं (धर्म-सिंधु/गरुड़-पुराण में पुत्र-हीन के लिए); सीता ने दशरथ का पिंडदान गया में किया; आधुनिक पंडित बेटियों को गया में पिंडदान कराते हैं; श्रद्धा मुख्य, लिंग नहीं।

पितृ-पक्ष में नई चीज़ ख़रीदना/शुभ-कार्य क्यों नहीं?

शास्त्र में केवल शुभ-संस्कार (विवाह-मुंडन-यज्ञोपवीत-गृह-प्रवेश) वर्जित — क्योंकि यह पितरों का काल है, उत्सव का नहीं; नई ख़रीद (गहने-वाहन-घर) की मनाही लोक-रीत है — कुछ पंडित कहते हैं पितर आशीर्वाद देते हैं, ख़रीद शुभ; अपने घर की रीत मानें; नवरात्रि से सब खुल जाता है।

कौआ न आए तो?

कौआ यम का दूत, ग्रास लेने से पितर तृप्त — लोक-भाव; न आए तो ग्रास छत/खुले में रखकर प्रतीक्षा, «काकाय नमः» — फिर गाय/कुत्ते को दे दें; शास्त्र में पंचबलि का भाव «सब जीवों को भोजन» है — कौआ न मिले तो चिड़िया/कोई पक्षी; पितर नाराज़ नहीं होते, श्रद्धा देखी जाती है।

पितृ-दोष क्या है और पितृ-पक्ष में उपाय?

कुंडली में सूर्य-राहु/केतु/शनि के कुछ योग (9वें भाव/सूर्य पीड़ित) को पितृ-दोष कहते हैं — संतान-विलंब, रोग, कलह का लोक-कारण; उपाय — पितृ-पक्ष में तिथि-श्राद्ध व अमावस्या-श्राद्ध, पीपल-सेवा, गीता-7/पितृ-सूक्त, गाय-कौए-कुत्ते को रोज़ ग्रास, ग़रीब-भोजन, गया/त्र्यंबक में नारायण-बलि (पंडित से); कुंडली-जाँच (दोष-रिपोर्ट) से पहले पुष्टि; श्रद्धा से श्राद्ध सबसे बड़ा उपाय।

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