🪔 पूजा-विधि

🌾 बैसाखी / विषु / बिहू / पुथांडु (मेष संक्रांति — सौर नववर्ष) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

यह सौर-नववर्ष की घरेलू विधि है — सब प्रदेशों के साझा अंग (स्नान-सूर्य-नया अन्न-दान) पहले, फिर बैसाखी/विषु/बिहू/पुथांडु/पोहेला-बोइशाख/सतुआनी की अपनी रीत।

बैसाखी / विषु / बिहू / पुथांडु (मेष संक्रांति — सौर नववर्ष) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. साझा: ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय पर स्नान (नदी — गंगा-हरिद्वार, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, महानदी — या घर पर गंगाजल), सूर्य-अर्घ्य (जल-लाल फूल-अक्षत, «ॐ घृणि सूर्याय नमः»), नए/साफ़ वस्त्र; घर के मंदिर में कुल-देवता/विष्णु-सूर्य पूजा, नया पंचांग/कैलेंडर स्थापन (पंचांग-श्रवण — वर्ष-फल पढ़ना); पितरों को जल; दान — सत्तू, जल-घड़ा, पंखा, छाता, गुड़, चना (गर्मी-आरंभ का दान), अन्न-वस्त्र।
  2. बैसाखी (पंजाब-हरियाणा-दिल्ली): सुबह गुरुद्वारा — कीर्तन, अरदास, लंगर (खालसा-सिरजना दिवस — निशान साहिब बदलना, नगर-कीर्तन); खेतों में कटी फ़सल का पहला गट्ठर, «जट्टा आई बैसाखी» — भाँगड़ा-गिद्दा, ढोल, मेले (तलवंडी साबो, आनंदपुर); घर में खीर-कड़ाह प्रसाद-पीली सब्ज़ी (मीठे चावल), सरसों का साग-मक्की (अंतिम), लस्सी; हिंदू-परिवार सूर्य-पूजा, गंगा-स्नान, नई फ़सल का गेहूँ भगवान को।
  3. विषु (केरल): पिछली रात विषुक्कणि सजाना — उरुली (पीतल-थाल) में कच्चा चावल, कोन्ना-फूल (कणिक्कोन्ना — अमलतास), खीरा-कटहल-आम-केला, सोने का आभूषण, सिक्के, दर्पण (वाल्कण्णाड़ि), नया कपड़ा, ग्रंथ, निलविलक्कु — कृष्ण/गुरुवायूरप्पन की मूर्ति के सामने; सुबह घर की बड़ी स्त्री सबसे पहले कणि देखती है, फिर एक-एक को आँखें बंद कराकर कणि के सामने लाती है (पहला दर्शन); कैनीट्टम — बड़े छोटों को सिक्के; विषु-सद्या (विषुक्कट्टा, मांगा-पचड़ी — छह रस), पटाखे (विषुप्पड़क्कम), गाय-पक्षियों को कणि का अंश; शबरीमला-गुरुवायूर में विषुक्कणि-दर्शन।
  4. बोहाग/रोंगाली बिहू (असम): चैत्र-संक्रांति (13 अप्रैल — बिहू-1) «गोरु बिहू» — गाय-बैल को नदी में नहलाना, हल्दी-उड़द-लौकी-बैंगन से, नई रस्सी, «लाउ खा, बेंगेना खा…» गीत; मेष-संक्रांति (14 — बिहू-2) «मानुह बिहू» — स्नान, नए कपड़े, बड़ों को गमोसा-प्रणाम (बिहुवान), पीठा (तिल-नारियल), लारू, दही-चिड़ा; तीसरा «गोसाईं बिहू» — घर के देवता, नामघर; सात दिन बिहू-नृत्य (ढोल-पेपा-गगना), हुसोरी (घर-घर गीत-आशीर्वाद), मुकोली बिहू; बिहू-मंच।
  5. पुथांडु (तमिलनाडु): पिछली रात «कणि» — थाल में फल (आम-कटहल-केला), फूल, सुपारी, सोना-चाँदी, दर्पण, नया पंचांग; सुबह कणि-दर्शन, स्नान, मंदिर, «पंचांग-पड़नम» (वर्ष-फल श्रवण), मांगा-पचड़ी (कच्चा आम-नीम-गुड़-मिर्च-नमक-इमली — छह रस = जीवन के छह स्वाद), वड़ई-पायसम, मदुरै-मीनाक्षी में चित्तिरै-तिरुविळा आरंभ; तमिल नववर्ष «इनिय पुत्ताण्डु नल्वाळ्त्तुक्कळ्»।
  6. पोहेला बोइशाख (बंगाल-त्रिपुरा-बांग्लादेश): सुबह प्रभात-फेरी (रवीन्द्र-संगीत «एसो हे बोइशाख»), नए कपड़े (लाल-सफ़ेद साड़ी), लक्ष्मी-गणेश पूजा व **हालखाता** — व्यापारी नया बही-खाता (स्वस्तिक-सिंदूर), ग्राहकों को मिठाई-कैलेंडर; घर में पायेस-लुची-मिष्टि, कालीघाट-दक्षिणेश्वर; बांग्लादेश में मंगल-शोभायात्रा (ढाका), पंता-इलिश; «शुभो नोबोबोर्षो»।
  7. पणा/महा-विषुव संक्रांति (ओडिशा): «पणा» (बेल-दही-गुड़-दूध-केले का शरबत) बनाकर तुलसी-चौरा पर घड़ा टाँगना (बसुंधरा-थेकी — बूँद-बूँद पौधे को जल — गर्मी में), छतुआ (सत्तू) दान, हनुमान-जयंती (ओडिशा में इसी दिन), झामु-यात्रा (अग्नि-पथ), नया ओडिया वर्ष; सतुआनी/जुड़-शीतल (बिहार-मिथिला-नेपाल-तराई): सत्तू-गुड़-आम की चटनी-टिकोरा, «जुड़-शीतल» पर बड़े बच्चों के सिर पर बासी जल (शीतलता-आशीर्वाद), पेड़-पौधों को जल, घर की लिपाई; नेपाल में नववर्ष (बैसाख 1) — भक्तपुर बिस्केट-जात्रा, स्नान-दान।
  8. उत्तराखंड-हिमाचल-कश्मीर: बिखौती (उत्तराखंड — मेले, गंगा-अलकनंदा स्नान, नया अन्न), बिशु/बैसाखी (हिमाचल — देव-मेले), नवरेह (कश्मीरी पंडित — चैत्र में, सौर से अलग); तेलुगु-कन्नड़ में उगादी चैत्र-शुक्ल-प्रतिपदा (चंद्र) पर — इस पन्ने का नहीं; सब जगह सत्तू-जल-आम का नया अन्न।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

स्नान-सूर्य-दान की सामग्री + विषुक्कणि की उरुली + बिहू का गमोसा-पीठा + बैसाखी की कड़ाह — प्रदेश-अनुसार सूची।

  • साझा: गंगाजल, सूर्य-अर्घ्य का लोटा, लाल फूल-अक्षत, नया पंचांग/कैलेंडर, नए वस्त्र, दान — सत्तू, जल-घड़ा (मिट्टी), पंखा, छाता, गुड़-चना, अन्न
  • बैसाखी: कड़ाह-प्रसाद (आटा-घी-चीनी), पीले चावल (केसर), खीर, लस्सी, नई फ़सल का गेहूँ; गुरुद्वारा-सेवा; भाँगड़ा-ढोल
  • विषुक्कणि: उरुली/पीतल-थाल, कच्चा चावल, कोन्ना (अमलतास) फूल, खीरा-कटहल-आम-केला-नारियल, सोना (आभूषण), सिक्के, दर्पण (वाल्कण्णाड़ि), नया मुंडु/कसवु, ग्रंथ, निलविलक्कु, कृष्ण-मूर्ति; कैनीट्टम के सिक्के; पटाखे; सद्या-सामग्री, मांगा-पचड़ी (आम-गुड़-नीम-मिर्च)
  • बिहू: गमोसा (लाल-सफ़ेद बुना अंगोछा — बड़ों/अतिथियों को), पीठा (तिल-पीठा, नारियल-पीठा, घिला), लारू (नारियल-तिल लड्डू), दही-चिड़ा-गुड़, गाय के लिए हल्दी-उड़द-लौकी-बैंगन-नई रस्सी (गोरु बिहू), ढोल-पेपा-गगना-ताल, मेखेला-चादर
  • पुथांडु: कणि-थाल (फल-फूल-सुपारी-सोना-दर्पण-पंचांग), मांगा-पचड़ी (कच्चा आम, नीम-फूल, गुड़, मिर्च, नमक, इमली), वड़ई, पायसम, नया पंचांग
  • पोहेला बोइशाख: नया बही-खाता (हालखाता — लाल कपड़ा), स्वस्तिक-सिंदूर, लक्ष्मी-गणेश, मिठाई-कैलेंडर (ग्राहकों को), पायेस-लुची, लाल-सफ़ेद साड़ी
  • पणा संक्रांति/सतुआनी: बेल-दही-गुड़-दूध-केला (पणा), मिट्टी का घड़ा (बसुंधरा-थेकी — तुलसी पर), छतुआ/सत्तू, आम-टिकोरा-चटनी, गुड़; जुड़-शीतल का बासी जल

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कड़ाह-पीले चावल, विषु-सद्या-मांगा-पचड़ी, बिहू-पीठा-लारू, पणा-सत्तू, पंता-इलिश — सौर-नववर्ष की थालियाँ

मेष संक्रांति पर हर प्रदेश का «नया अन्न» — पंजाब में नई गेहूँ की कड़ाह-खीर, केरल में विषु-सद्या व मांगा-पचड़ी (छह रस — जीवन के सब स्वाद), असम में पीठा-लारू-दही-चिड़ा, तमिलनाडु में पुथांडु-सद्या, बंगाल में पायेस-लुची, ओडिशा में पणा-छतुआ, बिहार-नेपाल में सत्तू-आम; गर्मी-आरंभ — ठंडी, कच्ची, सत्तू-दही-बेल की चीज़ें।

  • बैसाखी: कड़ाह-प्रसाद (आटा-घी-चीनी बराबर), पीले मीठे चावल (केसर-किशमिश), खीर, छोले-भटूरे/पूड़ी, लस्सी, सरसों-साग (आख़िरी), नई गेहूँ की रोटी-गुड़
  • विषु: विषुक्कट्टा (चावल-नारियल-दूध की भाप-पकवान — पहला व्यंजन), मांगा-पचड़ी/वेप्पम्पू-पचड़ी (कच्चा आम-नीम-गुड़-मिर्च — छह रस), विषु-सद्या (परिप्पु-सांबर-अवियल-थोरन-कालन-एरिश्शेरी-पायसम), कटहल-आम के व्यंजन (चक्का-प्रधमन), पप्पड़म-केला
  • बिहू: पीठा — तिल-पीठा (चावल-आटे की रोल में तिल-गुड़), नारियल-पीठा, घिला-पीठा, सुंगा-पीठा (बाँस में); लारू (नारियल/तिल के लड्डू), दही-चिड़ा-गुड़, मुरमुरे, बोरा-चावल, मासोर-टेंगा (मछली — कुछ घर), बिहू-भोज
  • पुथांडु: मांगा-पचड़ी (कच्चा आम + नीम-फूल + गुड़ + मिर्च + नमक + इमली — मीठा-कड़वा-खट्टा-तीखा-नमकीन-कसैला), वड़ई, पायसम, पोली, चावल-सांबर-रसम-अवियल; कटहल-आम
  • पोहेला बोइशाख: पायेस, लुची-आलूर दम, संदेश-रसगुल्ला-मिष्टि दोई, माछ (बंगाल में उत्सव-भोज), बांग्लादेश में पंता-भात (बासी चावल-पानी) + इलिश + भर्ता
  • पणा संक्रांति/सतुआनी/जुड़-शीतल: पणा (बेल-दही-गुड़-दूध-केला-काली मिर्च), छतुआ/सत्तू (जौ-चना — गुड़/नमक-प्याज़ से), आम की चटनी-टिकोरा, बासी भात-दही (जुड़-शीतल — बासी खाना ठंडक), खीर; नेपाल: सेल-रोटी, दही-चिउरा

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • संक्रांति-दिन नदी/घर-स्नान, सूर्य-अर्घ्य, नया पंचांग, नए वस्त्र; बड़ों से आशीर्वाद (कैनीट्टम/गमोसा/शगुन)
  • नया अन्न पहले भगवान-पितरों को — गेहूँ/सत्तू/चावल; गर्मी का दान — सत्तू, जल-घड़ा, पंखा, छाता
  • अपने प्रदेश की रीत — विषुक्कणि भोर में सबसे पहले, गोरु बिहू पर गाय-पूजा, हालखाता पर लक्ष्मी-गणेश, पणा-थेकी तुलसी पर
  • गुरुद्वारा/मंदिर-सेवा, लंगर-सद्या में ग़रीब को भोजन; बिहू-भाँगड़ा-नृत्य में परिवार
  • फ़सल-किसान का सम्मान — नई फ़सल के लिए कृतज्ञता

❌ क्या न करें

  • संक्रांति-काल के आसपास (पुण्य-काल) झगड़ा-झूठ-ऋण-लेन (लोक-मान्यता); विषु पर कणि से पहले कुछ और देखना
  • पटाखे (विषु) व नृत्य-मेलों में असुरक्षा-नशा; गाय-बैल को कष्ट (बिहू पर तो उनका सम्मान)
  • बासी/माँस पूजा-थाली में (उत्सव-भोज अलग); पंचांग-कैलेंडर का अनादर
  • मेष-संक्रांति को «चंद्र-नववर्ष» (उगादी/गुड़ी पड़वा/नवसंवत्सर) से मिलाना — वे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के, यह सौर
  • गर्मी में दान-भूल — सत्तू-जल-घड़ा-छाता इस दिन का मुख्य पुण्य

व्रत-कथा

बैसाखी 1699: गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में सभा बुलाई और तलवार लेकर «एक सिर चाहिए» कहा — पाँच ने बारी-बारी सिर दिया (दया राम, धरम दास, हिम्मत राय, मोहकम चंद, साहिब चंद) — तंबू से जीवित लौटे, गुरु ने अमृत (खंडे-बाट… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बैसाखी/विषु/बिहू {Y} में कब है — 13 या 14 अप्रैल?

ऊपर इस साल की मेष संक्रांति की तिथि है — सूर्य के मेष-प्रवेश का क्षण यदि सूर्यास्त के बाद हो तो पर्व अगले दिन (प्रायः 14 अप्रैल; कभी 13); बैसाखी-विषु-पुथांडु-पोहेला बोइशाख-पणा संक्रांति एक ही दिन; बोहाग बिहू का गोरु बिहू एक दिन पहले (चैत्र-संक्रांति) और मानुह बिहू मेष-संक्रांति को; जुड़-शीतल सतुआनी के अगले दिन; अपने प्रदेश का पंचांग मिला लें।

बैसाखी और खालसा का क्या संबंध?

1699 की बैसाखी को गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में पंज-प्यारों को अमृत छकाकर खालसा-पंथ की स्थापना की — इसलिए सिखों के लिए बैसाखी खालसा-सिरजना दिवस (नानकशाही कैलेंडर में वैसाख-1); गुरुद्वारों में नगर-कीर्तन, अखंड-पाठ, लंगर; साथ ही रबी-कटाई का किसान-पर्व — दोनों एक दिन।

विषुक्कणि क्या है और कैसे सजाएँ?

«कणि» = साल का पहला दर्शन — विषु की भोर में आँख खोलते ही शुभ-वस्तुएँ देखना ताकि साल शुभ हो; रात को उरुली (पीतल-थाल) में कच्चा चावल, कोन्ना (अमलतास) के पीले फूल, खीरा-कटहल-आम-केला-नारियल, सोने का गहना, सिक्के, दर्पण (जिसमें कणि व अपना चेहरा), नया कपड़ा, ग्रंथ, जलता निलविलक्कु — कृष्ण/गुरुवायूरप्पन की मूर्ति के सामने; भोर में घर की बड़ी स्त्री पहले देखती है, फिर सबको आँख बंद कराकर लाती है; फिर कैनीट्टम (सिक्के)।

बिहू के सात दिन कौन-से हैं?

बोहाग/रोंगाली बिहू: 1 गोरु बिहू (चैत्र-संक्रांति — गाय-बैल को नहलाना-पूजना), 2 मानुह बिहू (मेष-संक्रांति — नववर्ष, स्नान, नए कपड़े, गमोसा-प्रणाम, पीठा), 3 गोसाईं बिहू (घर-देवता/नामघर), 4 तातोर बिहू (करघा-वस्त्र), 5 नांगोलोर बिहू (हल-औज़ार), 6 घरोसिया-जीबोर बिहू (पालतू पशु), 7 चेरा बिहू (समापन) — क्रम-नाम इलाक़े से बदलते; पूरे सात दिन बिहू-नृत्य-हुसोरी।

मांगा-पचड़ी में छह रस क्यों?

तमिल पुथांडु व केरल-विषु की पचड़ी में कच्चा आम (खट्टा), नीम-फूल (कड़वा), गुड़ (मीठा), मिर्च (तीखा), नमक (नमकीन), इमली/कच्चा केला (कसैला) — छह स्वाद = जीवन के सुख-दुःख-सब का स्वीकार; नए साल के पहले कौर में — उगादी-पचड़ी (तेलुगु-कन्नड़) भी यही भाव (नीम-गुड़)।

हालखाता क्या है?

बंगाल के व्यापारियों का पोहेला बोइशाख पर नया बही-खाता (लाल कपड़े में बँधा «हालखाता») — लक्ष्मी-गणेश पूजा के साथ पहला पन्ना स्वस्तिक-सिंदूर से, पुराने उधार का हिसाब बंद, ग्राहकों को दुकान पर बुलाकर मिठाई-कैलेंडर; कालीघाट-दक्षिणेश्वर में खाता-पूजा; उत्तर-भारत की दीवाली-चोपड़ा-पूजा का बंगाली रूप।

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