📖 व्रत-कथा

🐘 गणेश चतुर्थी (व ऋषि पंचमी) व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

पार्वती ने स्नान से पहले अपने उबटन (मैल) से एक बालक बनाया, प्राण फूँके और द्वार पर पहरा बिठाया — «किसी को अंदर न आने देना»। शिव आए, बालक ने रोका; क्रोध में शिव ने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया। पार्वती के विलाप और रौद्र-रूप पर शिव ने गणों को भेजा — «जो पहला जीव उत्तर-दिशा में सिर करके सोता मिले, उसका सिर लाओ» — हाथी का सिर आया; शिव ने बालक को गज-मुख से जिलाया, गणों का अधिपति (गणपति) बनाया और वर दिया — «हर पूजा में पहले तुम्हारा नाम»। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, मध्याह्न।

चंद्र-कथा — एक चतुर्थी की रात गणेश मोदक खाकर मूषक पर लौट रहे थे, गिरे; चंद्रमा हँसा। गणेश ने शाप दिया — «जो तुम्हें इस रात देखेगा, मिथ्या-कलंक पाएगा»। चंद्रमा की क्षमा पर शाप को इसी एक रात (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) तक सीमित किया। द्वापर में कृष्ण ने इस रात दूध में चंद्र-छाया देखी और स्यमंतक-मणि चुराने का झूठा आरोप लगा — जांबवान से युद्ध कर मणि लौटाई, तब कलंक मिटा; इसीलिए दर्शन हो जाए तो स्यमंतक-कथा/मंत्र।

ऋषि पंचमी की कथा — विदर्भ में उत्तंक ब्राह्मण की पत्नी सुशीला; उनकी पुत्री विधवा होकर घर आई, एक दिन उसके शरीर में कीड़े पड़ गए। पिता ने ध्यान से देखा — पूर्वजन्म में रजस्वला-अवस्था में उसने रसोई-बर्तन छुए थे, उसी दोष से यह। उत्तंक ने पुत्री से ऋषि पंचमी का व्रत कराया — सप्तऋषि-पूजा, बिना हल का अन्न, दान — दोष मिटा। इसलिए स्त्रियाँ इस दिन अनजाने दोषों की शुद्धि व ऋषियों (ज्ञान-परंपरा) के प्रति कृतज्ञता का व्रत रखती हैं।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

गणेश विघ्नहर्ता व मंगल-कर्ता — हर कार्य का आरंभ; भाद्रपद चतुर्थी उनकी जन्म-तिथि — स्थापना मध्याह्न (सूर्योदय से दिन का दूसरा भाग, दोपहर 11-1:30 लगभग) में; लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सार्वजनिक उत्सव बनाया (महाराष्ट्र)।

इस रात चंद्र-दर्शन वर्जित — गणेश के शाप से «मिथ्या-दोष» (झूठा कलंक); देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» (स्यमंतक-कथा) का पाठ; कृष्ण पर भी यही कलंक लगा था। संकष्टी चतुर्थी (हर माह कृष्ण-चतुर्थी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है, इस चतुर्थी पर नहीं।

ऋषि पंचमी — कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ (सप्तऋषि) + अरुंधती की पूजा; मासिक-धर्म में अनजाने हुए दोष की शुद्धि का स्त्री-व्रत; «बिना जोते» उपज (साँवा-मोरधन-फल) का एक समय भोजन; नेपाल में तीज के तीसरे दिन दतिवन-स्नान।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 गणेश चतुर्थी (व ऋषि पंचमी) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश चतुर्थी {Y} में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है — पंचांग-गणना से; स्थापना का मध्याह्न-मुहूर्त (अभिजित/तिथि-खिड़की), ऋषि पंचमी और डेढ़/5/7/10 दिन के विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) की तिथियाँ भी तालिका में।

स्थापना का सही समय?

मध्याह्न-काल — दिन के तीन भागों में बीच वाला (लगभग सुबह 10:30-दोपहर 1:30), उसमें अभिजित (~11:40-12:30) श्रेष्ठ; चतुर्थी तिथि मध्याह्न में जिस दिन हो, वही दिन; राहुकाल टालें — ऊपर समय।

इस रात चाँद क्यों नहीं देखते?

गणेश जी के शाप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चंद्र-दर्शन से मिथ्या-कलंक (झूठा आरोप) लगता है — कृष्ण पर स्यमंतक-मणि का लगा था; भूल से देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» मंत्र/स्यमंतक-कथा पढ़ लें। बाक़ी चतुर्थियों (संकष्टी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है।

गणपति कितने दिन रखें?

डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन (अनंत चतुर्दशी) — कुल-परंपरा/सुविधा से; एक बार जो दिन तय हों वही हर साल रखना अच्छा; डेढ़ दिन घर के लिए सबसे सरल। ऊपर सब विसर्जन-तिथियाँ।

ऋषि पंचमी का व्रत कौन और क्यों?

स्त्रियाँ — रजस्वला-अवस्था में अनजाने हुए दोषों की शुद्धि व सप्तऋषियों की कृतज्ञता के लिए; बिना हल-जुते अन्न (साँवा/मोरधन) का एक समय भोजन, सप्तऋषि-अरुंधती पूजा, दान; नेपाल-महाराष्ट्र-राजस्थान-यूपी में प्रचलित; पुरुष भी रख सकते हैं।

घर पर विसर्जन कैसे करें?

मिट्टी की मूर्ति बड़े टब/बाल्टी/ड्रम में — उत्तर-पूजा के बाद धीरे-धीरे जल में; घुलने पर वह मिट्टी-जल गमलों/बगीचे में; प्लास्टर की हो तो नगर-निगम के कृत्रिम कुंड में। नदी में सिर्फ़ मिट्टी की, बिना सजावट-प्लास्टिक।

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