🪔 पूजा-विधि

🐘 गणेश चतुर्थी (व ऋषि पंचमी) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

यह घरेलू विधि है — चतुर्थी को मध्याह्न में स्थापना-प्राणप्रतिष्ठा, रोज़ सुबह-शाम पूजा-आरती-मोदक, पंचमी को ऋषि-पूजा, अंत में विसर्जन।

गणेश चतुर्थी (व ऋषि पंचमी) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. तैयारी (एक दिन पहले/हरतालिका के साथ): मिट्टी (शाडू) की गणेश-मूर्ति (पर्यावरण-अनुकूल, बिना रासायनिक रंग, घर के लिए 1-2 फ़ुट), मंडप/चौकी-सजावट (फूल, केले के खंभे, बिजली-लड़ी, मखर), लाल/पीला कपड़ा, कलश; घर की सफ़ाई।
  2. चतुर्थी — मध्याह्न-मुहूर्त (ऊपर अभिजित/तिथि; मध्याह्न ≈ दिन का मध्य-भाग): मूर्ति लाते समय «गणपति बप्पा मोरया», मुख ढककर; स्थापना पूर्व/उत्तर-पूर्व मुख; गणपति के दाएँ रिद्धि-सिद्धि (या सुपारी); कलश-वरुण-पूजन; प्राण-प्रतिष्ठा — «ॐ गं गणपतये नमः» के साथ मूर्ति में प्राण-आवाहन (पंडित या घर का बड़ा — मंत्र पुस्तक से)।
  3. षोडशोपचार पूजा: स्नान (जल-पंचामृत), वस्त्र (जनेऊ, धोती-उपरना), सिंदूर/लाल चंदन, 21 दूर्वा-दल (तीन/पाँच पत्तियों वाली, जोड़े में), शमी-पत्र, लाल-पीले फूल (गुड़हल-गेंदा), 21 मोदक (या लड्डू), नारियल, पान-सुपारी, दीप-धूप; «वक्रतुंड महाकाय…», गणेश-अथर्वशीर्ष (हो सके तो), संकटनाशन गणेश-स्तोत्र; आरती «सुखकर्ता दुखहर्ता» / «जय गणेश देवा»।
  4. रोज़ (जितने दिन विराजें): सुबह-शाम आरती, दूर्वा, मोदक/लड्डू/फल का भोग, अथर्वशीर्ष या «ॐ गं गणपतये नमः» 108; परिवार-पड़ोस को प्रसाद; घर में गणपति रहते हुए तामसिक भोजन-कलह नहीं; मूर्ति को अकेला न छोड़ें (कोई घर में रहे)।
  5. चतुर्थी की रात चंद्रमा न देखें (पर्दा/नज़र नीचे); देख लें तो स्यमंतक-मंत्र «सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः, सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः» का पाठ।
  6. ऋषि पंचमी (अगला दिन, स्त्रियाँ): सुबह स्नान (नेपाल-राजस्थान में दतिवन/अपामार्ग की टहनी से दाँत-शुद्धि, मिट्टी-लेप), सप्तऋषि व अरुंधती की पूजा (चित्र/सात सुपारी), सात प्रकार का अन्न-दान, «बिना हल जोती» उपज (साँवा/मोरधन/भगर के चावल, फल, दूध) का एक समय भोजन; कथा (उत्तंक-विदर्भ); व्रत रजस्वला-दोष-शुद्धि व परिवार-कल्याण हेतु।
  7. विसर्जन (डेढ़/3/5/7/10वें दिन — ऊपर तिथियाँ): उत्तर-पूजा — आरती, नारियल, दक्षिणा, «पुढच्या वर्षी लवकर या»; मूर्ति को अक्षत-फूल के साथ थोड़ा हिलाकर (विदाई-संकेत), दही-शक्कर/मोदक साथ; घर के बड़े-बच्चे साथ; नदी-तालाब/कृत्रिम कुंड/घर की बाल्टी-टब में (मिट्टी की मूर्ति) विसर्जन — जल फिर पौधों में; विसर्जन का जल-मिट्टी सम्मान से।
  8. अनंत चतुर्दशी (दसवाँ दिन): विसर्जन-जुलूस (ढोल-गुलाल); उसी दिन अनंत-व्रत (विष्णु का 14 गाँठ का अनंत-सूत्र — अलग पन्ना); अगले दिन से पितृ पक्ष।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

मिट्टी की मूर्ति, 21 दूर्वा, 21 मोदक, लाल फूल — गणपति की पूजा का सार; ऋषि पंचमी के लिए बिना-हल का अन्न।

  • गणेश की मिट्टी (शाडू) की मूर्ति, चौकी/मंडप, लाल-पीला कपड़ा, मखर/सजावट, केले के खंभे, फूल-लड़ी
  • कलश, नारियल, आम के पत्ते, सुपारी (रिद्धि-सिद्धि), सिक्का, मौली, अक्षत
  • दूर्वा (21 जोड़े, 3/5 पत्तियों वाली), शमी-पत्र, लाल-पीले फूल (गुड़हल-गेंदा-कनेर), फूल-माला, पत्री (21 पत्तियाँ — महाराष्ट्र)
  • सिंदूर, लाल चंदन, हल्दी, कुमकुम, जनेऊ, वस्त्र (धोती-उपरना/पीला-लाल), इत्र
  • भोग: 21 मोदक (उकडीचे/तले), बेसन-बूंदी लड्डू, पंचामृत, फल (केला-सेब-अनार), नारियल, पान-सुपारी-लौंग-इलायची, पंचखाद्य
  • दीपक (घी), धूप, कपूर, अगरबत्ती, आरती-थाली, घंटी, शंख
  • गणेश-अथर्वशीर्ष/स्तोत्र/आरती पुस्तक, संकष्ट-नाशन स्तोत्र
  • ऋषि पंचमी: सप्तऋषि-चित्र/7 सुपारी, अरुंधती-प्रतीक, दतिवन/अपामार्ग की टहनी, सात प्रकार का अन्न (दान), साँवा/मोरधन/भगर के चावल, दूध-फल
  • विसर्जन: दही-शक्कर/मोदक (साथ), अक्षत-फूल, नारियल, कृत्रिम कुंड/टब (घर पर), गुलाल

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मोदक — बप्पा का प्रिय; ऋषि पंचमी का बिना-हल भोजन

उकडीचे मोदक (चावल के आटे की भाप-पकी थैली में नारियल-गुड़ का भरावन) महाराष्ट्र की पहचान; उत्तर में तले मोदक/बेसन-बूंदी लड्डू; 21 की संख्या। ऋषि पंचमी को साँवा/मोरधन (भगर) के चावल — बिना बैल-हल की उपज।

  • उकडीचे मोदक (21): भरावन — 1 नारियल कद्दूकस + 1 कप गुड़ + इलायची-खसखस, धीमी आँच पर; आवरण — 1 कप चावल का आटा, 1¼ कप उबलते पानी-घी-नमक में गूँथकर; थैली बनाकर भाप में 10-12 मिनट; घी के साथ
  • तले मोदक (मैदा-मावा), बेसन-बूंदी लड्डू, पंचखाद्य (नारियल-खसखस-मेवे-शक्कर-घी), पूरनपोली, श्रीखंड-पूरी, वरण-भात (महाराष्ट्र का नैवेद्य)
  • रोज़ का भोग: मोदक/लड्डू, फल, दूर्वा; विसर्जन-दिन दही-शक्कर या मोदक साथ
  • ऋषि पंचमी: साँवा/मोरधन/भगर के चावल (बिना हल की उपज), दूध-दही, फल, बिना-हल की सब्ज़ियाँ (कंद-मूल), सेंधा नमक — एक समय; बैल-हल से उगा अन्न नहीं
  • गणपति-काल: सात्विक भोजन, प्याज़-लहसुन-मांस नहीं; प्रसाद रोज़ बाँटना

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • स्थापना मध्याह्न में (ऊपर अभिजित/तिथि), मिट्टी की मूर्ति, पूर्व/उत्तर-पूर्व मुख
  • 21 दूर्वा, 21 मोदक, लाल फूल; रोज़ सुबह-शाम आरती; मूर्ति अकेली न रहे
  • चतुर्थी की रात चंद्रमा न देखें; देख लें तो स्यमंतक-मंत्र
  • ऋषि पंचमी को स्त्रियाँ सप्तऋषि-पूजा, बिना-हल का भोजन, दान
  • विसर्जन घर के टब/कृत्रिम कुंड में — जल पौधों में; प्लास्टर-मूर्ति नहीं

❌ क्या न करें

  • प्लास्टर-ऑफ़-पेरिस/रासायनिक रंग की मूर्ति — नदी-तालाब प्रदूषित; थर्मोकोल सजावट नहीं
  • गणपति को तुलसी नहीं (एक विशेष कथा — शाप); केतकी नहीं; टूटी दूर्वा नहीं
  • गणपति-काल में तामसिक भोजन, कलह, घर ख़ाली छोड़ना
  • विसर्जन-जुलूस में नशा, तेज़ आवाज़ रात 10 के बाद, बच्चों को गहरे पानी में — नहीं
  • ऋषि पंचमी को हल-जोता अन्न (गेहूँ-चावल-दाल) — व्रतियों को नहीं

व्रत-कथा

पार्वती ने स्नान से पहले अपने उबटन (मैल) से एक बालक बनाया, प्राण फूँके और द्वार पर पहरा बिठाया — «किसी को अंदर न आने देना»। शिव आए, बालक ने रोका; क्रोध में शिव ने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया। पार्वती के विलाप और रौद्र-र… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश चतुर्थी {Y} में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है — पंचांग-गणना से; स्थापना का मध्याह्न-मुहूर्त (अभिजित/तिथि-खिड़की), ऋषि पंचमी और डेढ़/5/7/10 दिन के विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) की तिथियाँ भी तालिका में।

स्थापना का सही समय?

मध्याह्न-काल — दिन के तीन भागों में बीच वाला (लगभग सुबह 10:30-दोपहर 1:30), उसमें अभिजित (~11:40-12:30) श्रेष्ठ; चतुर्थी तिथि मध्याह्न में जिस दिन हो, वही दिन; राहुकाल टालें — ऊपर समय।

इस रात चाँद क्यों नहीं देखते?

गणेश जी के शाप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चंद्र-दर्शन से मिथ्या-कलंक (झूठा आरोप) लगता है — कृष्ण पर स्यमंतक-मणि का लगा था; भूल से देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» मंत्र/स्यमंतक-कथा पढ़ लें। बाक़ी चतुर्थियों (संकष्टी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है।

गणपति कितने दिन रखें?

डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन (अनंत चतुर्दशी) — कुल-परंपरा/सुविधा से; एक बार जो दिन तय हों वही हर साल रखना अच्छा; डेढ़ दिन घर के लिए सबसे सरल। ऊपर सब विसर्जन-तिथियाँ।

ऋषि पंचमी का व्रत कौन और क्यों?

स्त्रियाँ — रजस्वला-अवस्था में अनजाने हुए दोषों की शुद्धि व सप्तऋषियों की कृतज्ञता के लिए; बिना हल-जुते अन्न (साँवा/मोरधन) का एक समय भोजन, सप्तऋषि-अरुंधती पूजा, दान; नेपाल-महाराष्ट्र-राजस्थान-यूपी में प्रचलित; पुरुष भी रख सकते हैं।

घर पर विसर्जन कैसे करें?

मिट्टी की मूर्ति बड़े टब/बाल्टी/ड्रम में — उत्तर-पूजा के बाद धीरे-धीरे जल में; घुलने पर वह मिट्टी-जल गमलों/बगीचे में; प्लास्टर की हो तो नगर-निगम के कृत्रिम कुंड में। नदी में सिर्फ़ मिट्टी की, बिना सजावट-प्लास्टिक।

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