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🪔 पूजा-विधि

💚 हरियाली तीज (श्रावणी / छोटी तीज) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

यह उत्तर-भारतीय घरेलू विधि है — एक दिन पहले सिंजारा-मेहंदी, तीज को हरा श्रृंगार, शिव-पार्वती पूजा, झूला-गीत।

हरियाली तीज (श्रावणी / छोटी तीज) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. एक दिन पहले (द्वितीया — सिंजारा): मायके से बेटी (नई विवाहिता) को मेहंदी, हरी चूड़ी, लहरिया साड़ी, घेवर-फीणी, श्रृंगार; शाम को हाथों-पैरों में मेहंदी, सहेलियों के साथ गीत।
  2. तीज की सुबह: स्नान, हरी/लहरिया साड़ी, सोलह श्रृंगार, हरी चूड़ियाँ (पुरानी उतारकर नई), बिंदी-सिंदूर; संकल्प — «मैं पति की दीर्घायु/उत्तम वर व सौभाग्य हेतु हरियाली तीज का व्रत करती हूँ» — निर्जला/फलाहार।
  3. पूजा (दिन में या प्रदोष — ऊपर समय): चौकी पर हरा/लाल कपड़ा, मिट्टी/रेत या चित्र की शिव-पार्वती-गणेश की प्रतिमा (कई घर तीज माता की मिट्टी की मूर्ति); कलश; पार्वती को सोलह श्रृंगार — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, काजल, चुनरी, कंघी, शीशा, फूल-माला (हरे बेल-आम के पत्ते); शिव को बेलपत्र-धतूरा-जल।
  4. मंत्र — «ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः»; तीज की कथा (नीचे) सुहागिनें मिलकर सुनें; आरती; घेवर-मालपुआ-खीर का भोग।
  5. बाया/सिंधारा: कथा के बाद सास (या घर की बड़ी) को श्रृंगार-वस्त्र-घेवर देकर पैर छूना; सुहागिनों को हरी चूड़ी-मेहंदी बाँटना; कन्याएँ बड़ी स्त्रियों से आशीर्वाद।
  6. झूला: घर/मोहल्ले में आम-नीम पर झूला, सावन-गीत (कजरी/झूला/मल्हार), बच्चियाँ-सहेलियाँ; शाम को तीज माता की सवारी/मेला (जयपुर-आगरा-बनारस)।
  7. व्रत खोलना: प्रदोष-पूजा के बाद (चंद्र-अर्घ्य की रीत नहीं — यह चतुर्थी/चौथ नहीं); पति के हाथ से जल-मिठाई; नई बहू मायके से लौटे तो सिंधारे के साथ।
  8. दो दिन बाद नाग पंचमी, पंद्रह दिन बाद कजरी तीज (भाद्रपद कृष्ण तृतीया) और एक महीने बाद हरतालिका (भाद्रपद शुक्ल तृतीया) — तीज-त्रयी।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

हरी चूड़ी-मेहंदी-लहरिया-घेवर सिंजारे में; पूजा में शिव-पार्वती व सुहाग की 16 वस्तुएँ।

  • शिव-पार्वती-गणेश की प्रतिमा (मिट्टी/रेत/चित्र) या तीज माता की मूर्ति, चौकी, हरा-लाल कपड़ा, कलश
  • पार्वती का सोलह श्रृंगार: हरी चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, काजल, चुनरी (हरी/लाल), कंघी, शीशा, आलता, पायल/बिछिया (प्रतीक), फूल-माला
  • शिव को: बेलपत्र, धतूरा, आक, जल-दूध, चंदन, भस्म; गणेश को दूर्वा
  • रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, मौली, हरे पत्ते (बेल-आम-नीम), फूल (गेंदा-गुलाब-मोगरा)
  • भोग: घेवर, फीणी, मालपुआ, खीर, पूड़ी, हलवा, फल (जामुन-आम-खीरा)
  • सिंजारा/बाया: मेहंदी, हरी चूड़ी, लहरिया/हरी साड़ी, घेवर, मिठाई, श्रृंगार-सामान, दक्षिणा
  • झूला: रस्सी, पटरा; कजरी/झूला-गीत
  • दीपक, धूप, कपूर, आरती-थाली; तीज-कथा पुस्तक

🛍 पूजा-सामग्री देखें

घेवर, फीणी, मालपुआ — सावन की तीज-रसोई

हरियाली तीज का पर्याय है घेवर — मैदा-घी की जालीदार मिठाई, चाशनी में, ऊपर रबड़ी-मेवा; सिंजारे में घेवर-फीणी मायके से; व्रत फलाहार/निर्जला, पूजा के बाद पूड़ी-खीर।

  • घेवर (मालवा/रबड़ी घेवर): मैदा-घी-ठंडे पानी का पतला घोल, गर्म घी में गोल साँचे में धार से डालकर जाली बनाना, चाशनी में डुबोना, रबड़ी-पिस्ता — बाज़ार से भी (सावन में हर हलवाई)
  • फीणी (सूत की-सी मीठी), मालपुआ, खीर, बालूशाही, गुझिया (कुछ इलाक़े)
  • व्रत-दिन: फल (आम-जामुन-केला), दूध, नारियल-पानी; निर्जला वाली प्रदोष-पूजा के बाद
  • पूजा के बाद: पूड़ी-आलू-कद्दू, खीर, हलवा, खीरा; पंजाब-हरियाणा की तीयाँ में खीर-पूड़ी-मालपुए; बिहार-यूपी में ठेकुआ-खीर (कजरी-तीज तक)
  • सुहागिनों को बाँटना: घेवर + हरी चूड़ी + मेहंदी — तीज का «बायना»

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • हरा — साड़ी, चूड़ी, मेहंदी: तीज की पहचान; नई चूड़ियाँ इसी दिन
  • शिव-पार्वती को सोलह श्रृंगार, कथा सुहागिनों के साथ; सास को बाया
  • झूला, कजरी-गीत, सहेलियों-बहनों के साथ उत्सव — व्रत का अंग
  • नई बहू मायके में, ससुराल से सिंधारा — दोनों ओर उपहार
  • कन्याएँ भी व्रत रखें — मनचाहे वर के लिए

❌ क्या न करें

  • काले-सफ़ेद वस्त्र, टूटी चूड़ियाँ — तीज पर नहीं
  • झूले की रस्सी-डाल पुरानी/कमज़ोर नहीं — बच्चियों के लिए सुरक्षा
  • निर्जला की ज़िद गर्भवती/रोगी नहीं — फलाहार
  • कलह, बड़ों का अनादर — सौभाग्य का पर्व है
  • सावन की बारिश में मेहंदी/चूड़ी के बाज़ार में बच्चों को अकेला नहीं

व्रत-कथा

पार्वती हिमालय की पुत्री थीं; बचपन से शिव को पति मानतीं। पिता हिमवान ने नारद के कहने पर विष्णु से विवाह तय किया; पार्वती ने सखी की सहायता से वन (हरित) में जाकर गुफा में रेत का शिवलिंग बनाया और घोर तप किया — इसी सखी-हरण स… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हरियाली तीज {Y} में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की श्रावण शुक्ल तृतीया है — पंचांग-गणना से; पूजा का अभिजित/प्रदोष-समय (दिल्ली) भी वहीं। तृतीया किसी सूर्योदय को न छुए (तिथि-क्षय) तो जिस दिन तृतीया रहे, वही दिन।

हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज में क्या अंतर?

तीनों गौरी-तृतीया व्रत — हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया (सावन, झूले-मेहंदी, उत्सव-प्रधान); कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया (15 दिन बाद — नीम-पूजा, चंद्र-अर्घ्य, बुंदेलखंड-राजस्थान); हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया (एक महीने बाद — निर्जला, सबसे कठोर, यूपी-बिहार-महाराष्ट्र)।

सिंजारा/सिंधारा क्या है?

तीज से एक दिन पहले (या तीज पर) मायके से बेटी/बहू को भेजा जाने वाला उपहार — मेहंदी, हरी चूड़ी, लहरिया, घेवर-फीणी, श्रृंगार; ससुराल से नई बहू को «सिंधारा» — दोनों ओर से प्रेम का सूत्र।

क्या तीज पर चाँद को अर्घ्य देते हैं?

हरियाली तीज पर नहीं — यह चौथ नहीं है; प्रदोष-पूजा के बाद व्रत खुलता है। कजरी तीज पर चंद्र-अर्घ्य की रीत है (कृष्ण तृतीया — चाँद देर से)।

हरी चूड़ी ही क्यों?

हरा सावन-हरियाली, समृद्धि और सुहाग का रंग — इस दिन पुरानी चूड़ियाँ उतारकर नई हरी पहनना पार्वती का श्रृंगार दोहराना है; मेहंदी जितनी रचे, उतना प्रेम — लोक-विश्वास।

मंगलागौर और हरियाली तीज एक ही?

भाव एक — नई विवाहिता का सावन-व्रत; महाराष्ट्र में श्रावण के हर मंगलवार मंगलागौर (गौरी-पूजा, रात-भर फुगड़ी-झिम्मा), उत्तर में तृतीया की तीज; मराठी घर तीज की जगह मंगलागौर मानते हैं।

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