🪔 पूजा-विधि

🐘 संकष्टी चतुर्थी (और विनायक चतुर्थी) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

यह संकष्टी की घरेलू विधि है — दिन का व्रत, शाम गणेश-पूजा व कथा, चंद्रोदय पर अर्घ्य व पारण; विनायक चतुर्थी की दोपहर-पूजा अंत में।

संकष्टी चतुर्थी (और विनायक चतुर्थी) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. सुबह स्नान, लाल/पीले वस्त्र; संकल्प — «(नाम) संकष्टी चतुर्थी व्रत, संकट-निवारण/संतान-सुख हेतु, चंद्र-दर्शन-अर्घ्य के बाद पारण»; दिन-भर निर्जला (कठोर) या फलाहार (दूध-फल-साबूदाना); गणेश-स्मरण «ॐ गं गणपतये नमः»।
  2. शाम (सूर्यास्त के बाद, चंद्रोदय से पहले): गणेश-प्रतिमा/चित्र को स्नान (पंचामृत-जल), लाल वस्त्र, चंदन-सिंदूर, दूब (21 दूर्वा — 3 या 5 पत्ती वाली), लाल फूल (जासवंद/गुड़हल), शमी-पत्र, मोदक/लड्डू (21), फल, पान-सुपारी; धूप-दीप; गणेश-अथर्वशीर्ष/संकटनाशन गणेश-स्तोत्र («प्रणम्य शिरसा देवं…»), गणेश-चालीसा।
  3. कथा (नीचे — उस माह की संकष्टी कथा या सामान्य गणेश-चंद्र कथा) सुनना; आरती «सुखकर्ता दुःखहर्ता» / «जय गणेश देवा»; कपूर-आरती।
  4. चंद्रोदय (ऊपर समय — कृष्ण चतुर्थी का चाँद रात 8:30-10 के बीच निकलता है): चाँद को जल-दूध-अक्षत-फूल से अर्घ्य, «ॐ सोमाय नमः», चाँद के दर्शन; फिर गणेश को नैवेद्य; बादल हों तो चंद्रोदय-समय के बाद दिशा में अर्घ्य।
  5. पारण: अर्घ्य के बाद गणेश-प्रसाद (मोदक/लड्डू), फिर भोजन — सात्विक (महाराष्ट्र में उकडीचे मोदक, वरण-भात; उत्तर में तिल-गुड़/लड्डू-खीर); कई घर बिना नमक/एक बार।
  6. अंगारकी संकष्टी: वही विधि, गणेश-मंदिर दर्शन, लाल फूल-गुड़-चना, मंगल-शांति हेतु मसूर-गुड़ दान; 21 मोदक।
  7. विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष): व्रत सुबह से दोपहर तक; मध्याह्न (11-1:30, अभिजित ऊपर) में गणेश-पूजा, दूर्वा-मोदक, कथा; दोपहर बाद पारण; इस दिन चाँद न देखें (देख लें तो स्यमंतक-कथा पढ़ें); भाद्रपद की विनायक = गणेश चतुर्थी (अलग पन्ना)।
  8. स्त्री-रीत: संतान-कामना हेतु 12 संकष्टी (एक वर्ष) का संकल्प; बच्चों के कल्याण हेतु माताएँ; उद्यापन — 12 पूरी होने पर गणेश-हवन, 21 दूर्वा, ब्राह्मण-भोजन, दान (महाराष्ट्र में «संकष्टी उद्यापन»)।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

दूर्वा, मोदक, लाल फूल, सिंदूर, चंद्र-अर्घ्य का लोटा — संकष्टी की सूची।

  • गणेश-प्रतिमा/चित्र, चौकी, लाल कपड़ा, कलश, नारियल, आम के पत्ते
  • दूर्वा (21 — 3/5 पत्ती), लाल फूल (जासवंद-गुड़हल-गेंदा), शमी-पत्र, बेलपत्र (कुछ रीत)
  • चंदन, सिंदूर, रोली, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, मौली, जनेऊ, इत्र, पान-सुपारी-लौंग-इलायची
  • पंचामृत, गंगाजल; दीपक-घी, धूप, कपूर, आरती-थाली, घंटी
  • नैवेद्य: मोदक (उकडीचे/तले) 21, बेसन/बूँदी/तिल के लड्डू, फल (केला-अमरूद-सेब), गुड़-चना, खीर, पंचमेवा
  • चंद्र-अर्घ्य: तांबे का लोटा, जल-दूध-अक्षत-फूल
  • गणेश-अथर्वशीर्ष/संकटनाशन-स्तोत्र/संकष्टी-कथा पुस्तक, रुद्राक्ष/चंदन माला
  • अंगारकी/मंगल-शांति: लाल वस्त्र, गुड़-चना, मसूर (दान)

🛍 पूजा-सामग्री देखें

मोदक, दूर्वा, गुड़-चना, तिल-लड्डू — गणपति की थाली; चाँद के बाद भोजन

संकष्टी को दिन-भर व्रत, चंद्र-अर्घ्य के बाद मोदक-प्रसाद व भोजन; गणेश को मोदक (उकडीचे — भाप के — महाराष्ट्र की पहचान), लड्डू (बेसन-बूँदी-तिल), गुड़-चना, केला; सकट चौथ पर तिलकुट; उत्तर में लड्डू-खीर-पूड़ी; व्रत-दिन दूध-फल-साबूदाना।

  • उकडीचे मोदक (चावल-आटे की भाप की परत, नारियल-गुड़ भरावन — 21), तले मोदक, बेसन/बूँदी/मोतीचूर लड्डू, तिल-गुड़ लड्डू (माघ-संकष्टी/सकट)
  • गुड़-चना (भीगा/भुना), केला-अमरूद-सेब, पंचमेवा, खीर, पूड़ी-हलवा (उत्तर), दूर्वा-जल
  • व्रत-फलाहार: दूध, फल, साबूदाना-खिचड़ी, मखाना, नारियल-पानी; निर्जला रखने वाले — कुछ नहीं
  • पारण-भोजन: महाराष्ट्र — वरण-भात-मोदक, पुरण-पोली (अंगारकी); कर्नाटक — कडुबु-पायसम; तमिल (संकटहर चतुर्थी) — कोळुक्कट्टै (मोदक), सुंडल; गुजरात — लापसी-लड्डू; उत्तर — लड्डू-खीर-पूड़ी, तिलकुट (सकट)
  • अंगारकी: 21 मोदक व लाल फूल, मंगल-शांति हेतु गुड़-चना दान; विनायक चतुर्थी (दोपहर): मोदक-केला-पंचमेवा, मध्याह्न-भोजन

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • संकष्टी: चंद्रोदय (ऊपर समय) के बाद अर्घ्य देकर ही पारण; विनायक: दोपहर पूजा, चाँद नहीं
  • गणेश को दूर्वा (21), मोदक, लाल फूल-सिंदूर; संकटनाशन-स्तोत्र/अथर्वशीर्ष
  • अंगारकी पर मंदिर-दर्शन, 21 मोदक, मंगल-शांति दान (गुड़-चना-मसूर)
  • 12 संकष्टी का संकल्प → उद्यापन; संतान/संकट-निवारण की कामना
  • गर्भवती/रोगी फलाहार; बच्चों को मोदक-प्रसाद

❌ क्या न करें

  • संकष्टी पर चाँद देखे बिना व्रत खोलना; विनायक चतुर्थी पर चाँद देखना (कलंक — देख लें तो स्यमंतक-कथा)
  • गणेश को तुलसी (वर्जित — केवल गणेश चतुर्थी को छोड़कर कुछ रीत में), सूखी/कटी दूर्वा, केतकी
  • व्रत-दिन तामसिक भोजन, क्रोध, झूठ; काले वस्त्र
  • जबरन निर्जला; बच्चों-बुज़ुर्गों पर कठोर व्रत
  • प्लास्टर की मूर्ति नदी में (विसर्जन नहीं — संकष्टी पर मूर्ति स्थायी घर की)

व्रत-कथा

गणेश-चंद्र कलंक: गणेश की रूप-रचना (लंबोदर, गज-मुख) पर चंद्रमा हँसा; गणेश ने शाप दिया — «जो तुझे देखेगा, कलंक पाएगा»; देवताओं की प्रार्थना पर शाप घटा — केवल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) का चंद्र-दर्शन कलंक देगा, औ… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगली संकष्टी चतुर्थी कब है और चाँद कब निकलेगा? {Y}

ऊपर अगली संकष्टी की तिथि, चंद्रोदय-समय (दिल्ली) व आने वाली 12 तिथियाँ नाम-सहित (अंगारकी हो तो लिखा है) दी हैं; कृष्ण चतुर्थी का चाँद रात 8:30-10 बजे के बीच; अपने शहर में ±10-20 मिनट — पंचांग से मिला लें।

संकष्टी और विनायक चतुर्थी में अंतर?

संकष्टी = कृष्ण पक्ष चतुर्थी (पूर्णिमा के बाद) — व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय, चाँद को अर्घ्य देकर पारण, संकट-निवारण; विनायक = शुक्ल पक्ष चतुर्थी (अमावस्या के बाद) — दोपहर में पूजा, चाँद न देखें (कलंक-कथा); भाद्रपद की विनायक ही गणेश चतुर्थी, माघ की संकष्टी ही सकट चौथ; ऊपर सूची में दोनों।

अंगारकी संकष्टी क्या है, इतनी बड़ी क्यों?

मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी — अंगारक (मंगल) की तपस्या से गणेश का वर कि मंगलवार की संकष्टी का फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर; साल में 1-3 बार; महाराष्ट्र में लाखों उपवास व मंदिर-कतार; मंगल-दोष वालों के लिए विशेष; ऊपर सूची में «(अंगारकी)» लिखा मिलेगा।

बादल हों, चाँद न दिखे तो?

चंद्रोदय-समय (ऊपर) के बाद चाँद की दिशा (पूर्व) में अर्घ्य दें या थाली में दर्पण/जल में प्रतिबिंब मानकर — पारण मान्य; व्रत पूरा; रात बहुत देर न करें; चंद्रोदय बहुत देर (10 बजे बाद) हो तो रोगी-गर्भवती पहले फलाहार लें।

संकष्टी किस कामना से और कितनी बार?

संकट-निवारण, ऋण-रोग-मुक्ति, संतान-सुख, विघ्न-हरण, कार्य-सिद्धि; माताएँ बच्चों के लिए; संकल्प 12 (एक वर्ष) या 21 संकष्टी का, फिर उद्यापन (गणेश-हवन, 21 दूर्वा, ब्राह्मण-भोजन); बीच में छूटे तो अगली अंगारकी से फिर।

गणेश को दूर्वा और मोदक ही क्यों?

अनलासुर-कथा — अग्नि-दैत्य को निगलकर गणेश के पेट में जलन हुई, ऋषियों ने 21 दूर्वा खिलाकर शांत की — तभी से दूर्वा प्रिय (3 या 5 पत्ती की, 21 जुड़ी); मोदक (मोद = आनंद) पार्वती ने बनाया, गणेश का प्रिय — 21 मोदक; लाल फूल-सिंदूर गणेश के रजोगुण-तेज के प्रतीक; तुलसी गणेश को वर्जित (शाप-कथा)।

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