☀️ मासिक संक्रांति (सूर्य का राशि-प्रवेश) व्रत कथा
कथा
सूर्य के मकर-प्रवेश पर उत्तरायण और कर्क-प्रवेश पर दक्षिणायन आरंभ होता है — देव-दिन और देव-रात्रि की पौराणिक कल्पना इसी से जुड़ी है; भीष्म ने बाण-शय्या पर उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी।
कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा-जयंती (मुख्यतः बंगाल, ओडिशा, असम, झारखंड) — सृष्टि के शिल्पी विश्वकर्मा की पूजा; कारख़ाने-दुकानों में औज़ार व यंत्र इस दिन विश्राम पाते हैं।
तुला संक्रांति पर कावेरी-तट (दक्षिण) में तुला-स्नान की महिमा है; ओडिशा में यह «गर्भण संक्रांति» — धान की गर्भ-अवस्था का कृषि-पर्व है।
कथा का महत्व — यह व्रत क्यों
सूर्य आत्मा, आरोग्य, पिता-पक्ष और राज-कृपा का कारक है — उसके राशि-प्रवेश का दिन सौर-पंचांग की सबसे ठोस इकाई है; दक्षिण भारत व बंगाल-असम-केरल के सौर कैलेंडर मास इसी दिन से गिनते हैं।
पुराण-परम्परा में संक्रांति के दिन का दान (तिल, अन्न, वस्त्र, गुड़, घी) «अक्षय» कहा गया है — विशेषकर संक्रांति के आगे-पीछे के 16 घटी के पुण्यकाल में।
ज्योतिष-दृष्टि से सूर्य का राशि-बदल गोचर का बड़ा पड़ाव है — कुंडली में सूर्य जिस भाव में प्रवेश करता है, महीने-भर उसी क्षेत्र के फल सक्रिय रहते हैं (विस्तृत फल गोचर-पन्ने पर)।
कथा सुनने का नियम
- कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
- व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
- कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।
📿 मासिक संक्रांति (सूर्य का राशि-प्रवेश) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस महीने की संक्रांति कब है? {Y}
ऊपर तिथि-card में अगली संक्रांति की ठीक तारीख़ व दिन दिया है — यह सूर्य के राशि-प्रवेश की खगोलीय गणना (Swiss Ephemeris) से निकलती है।
संक्रांति का पुण्यकाल क्या होता है?
सूर्य के राशि-प्रवेश क्षण के आस-पास का समय — परम्परा में प्रायः प्रवेश से 16 घटी (लगभग 6.5 घंटे) आगे-पीछे; इसी में स्नान-दान का फल सबसे अधिक कहा गया है।
क्या हर संक्रांति पर व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं — संक्रांति मुख्यतः स्नान-दान का दिन है, कठोर व्रत की अनिवार्यता नहीं। जो रखते हैं वे एक समय सात्त्विक भोजन/फलाहार करते हैं।
मकर और मेष संक्रांति भी यहीं देखें?
उनके अपने विस्तृत पन्ने हैं — मकर संक्रांति (खिचड़ी/पोंगल/लोहड़ी) और मेष संक्रांति (बैसाखी/विशु/बिहू) — नीचे «यह भी पढ़ें» में link हैं।
कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा-पूजा कैसे करें?
औज़ार, मशीन, वाहन, computer आदि साफ़ करके फूल-माला, रोली-अक्षत, धूप-दीप से पूजें; उस दिन उनसे भारी काम न लें; मिठाई बाँटें — यही सरल घरेलू/दुकान-विधि है।
🏠 मासिक संक्रांति (सूर्य का राशि-प्रवेश) 2026 — तिथि, मुहूर्त, पूरा पन्ना · सभी व्रत-त्योहार