| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 18 जनवरी 2026 | 7:46 AM – 11:32 AM EST | 17 जनवरी, 1:34 PM → 18 जनवरी, 2:56 PM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 18 जनवरी 2026 | 7:48 AM – 11:33 AM EST | 17 जनवरी, 1:34 PM → 18 जनवरी, 2:58 PM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | रविवार, 18 जनवरी 2026 | 8:00 AM – 11:31 AM PST | 17 जनवरी, 10:34 AM → 18 जनवरी, 12:00 PM PST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | रविवार, 18 जनवरी 2026 | 8:30 AM – 11:56 AM MST | 17 जनवरी, 11:34 AM → 18 जनवरी, 1:00 PM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | रविवार, 18 जनवरी 2026 | 8:39 AM – 11:56 AM MST | 17 जनवरी, 11:34 AM → 18 जनवरी, 12:59 PM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 18 जनवरी 2026 | 7:29 AM – 11:10 AM EST | 17 जनवरी, 1:34 PM → 18 जनवरी, 2:59 PM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
माघ-स्नान (पूरे माघ भोर में स्नान) का सबसे फलदायी दिन; शास्त्रों में मौनी अमावस्या के स्नान को हज़ार गंगा-स्नान के बराबर कहा गया। इसी दिन मनु ऋषि का जन्म माना जाता है — «मनु» से «मौनी»।
अमावस्या पितरों की तिथि है — तर्पण, पिंडदान/अन्न-दान से पितर तृप्त होते हैं; कालसर्प/पितृ-दोष के उपाय इस दिन विशेष; शनि-संबंधी दान (तिल, काला कपड़ा, तेल) भी।
मौन का नियम: कम-से-कम स्नान-पूजा-दान तक न बोलें (मन में जप); पूरा दिन मौन रख सकें तो उत्तम — यह घर की स्त्री के लिए दुर्लभ शांति का दिन भी है।
हाँ — रविवार, 18 जनवरी 2026।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 7:46 AM से 11:32 AM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
शास्त्र-विधान पूरे दिन का है; व्यवहार में सुबह उठने से स्नान-पूजा-दान पूरा होने तक (कम-से-कम 2-3 घंटे) मौन; मन में जप। जो पूरा दिन रख सकें, उत्तम।
हाँ — जिनके घर में पुरुष न हों या अपने माता-पिता के लिए, स्त्रियाँ तर्पण कर सकती हैं (कुश की जगह अक्षत-तिल-जल); पीपल-पूजा और दान तो मुख्य रूप से स्त्रियाँ ही करती हैं।
अमावस्या शनि-प्रिय तिथि है — काले तिल, सरसों तेल, काला वस्त्र, जूते-छाता, लोहा का दान; शनिवार को पड़े (शनि-अमावस्या) तो विशेष।
प्रयाग के माघ-मेले/कुंभ/अर्धकुंभ में मौनी अमावस्या मुख्य शाही-स्नान है — मान्यता है कि इस दिन संगम में अमृत-बूँदें उतरती हैं; 2025 महाकुंभ में इसी दिन सबसे बड़ा स्नान था।