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🌾 बैसाखी/विषू/बिहू/पुथांडू (मेष संक्रांति-सौर नवीन वर्ष) 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धती

13-14 अप्रैल — सूर्य चा मेष मध्ये प्रवेश; पंजाब ची बैसाखी (फ़सल-खालसा), केरल चा विषु (विषुक्कणि), असम चा बोहाग बिहू, तमिळ पुथांडु, बंगाल चा पोहेला बोइशाख, ओडिशा चा महा-विषुव (पणा) संक्रांति, बिहार-नेपाल चा सतुआनी/जुड़-शीतल; गंगा-स्नान, नया अन्न।

बैसाखी / विषु / बिहू / पुथांडु (मेष संक्रांति — सौर नववर्ष) 2027 ची तिथी
बुधवार, 14 एप्रिल 2027
🌅 सूर्योदय5:57 AM
⭐ अभिजित मुहूर्त
🌇 सूर्यास्त6:46 PM
⛔ राहुकाळ (टालें)12:21 PM – 01:57 PM
वेळ दिल्ली (IST) चे, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय प्रत्येक शहर मध्ये वेगळा होतो आहे —

प्रत्येक साल 13-14 अप्रैल ला सूर्य मेष राशी मध्ये प्रवेश करतो आहे — मेष संक्रांति; हे भारत चे सौर पंचांग चा नववर्ष आहे आणि आधे देश चा सर्वात बड़ा फ़सल-पर्व: पंजाब-हरियाणा मध्ये **बैसाखी** (रबी-कटाई, 1699 मध्ये खालसा-पंथ ची स्थापना), केरल मध्ये **विषु** (विषुक्कणि — सुबह आँख खोलते च शुभ-दर्शन, कैनीट्टम), असम मध्ये **बोहाग (रोंगाली) बिहू** (सात दिवस — गोरु, मानुह, गोसाईं बिहू), तमिलनाडु मध्ये **पुथांडु** (चित्तिरै 1), बंगाल मध्ये **पोहेला बोइशाख** (हालखाता), ओडिशा मध्ये **महा-विषुव/पणा संक्रांति**, बिहार-मिथिला-नेपाल मध्ये **सतुआनी/जुड़-शीतल**, नेपाल मध्ये **नववर्ष (बैसाख 1)**, हिमाचल मध्ये **बिशु**, उत्तराखंड मध्ये **बिखौती**।

घर ची स्त्रियाँ किंवा दिवस नया अन्न (गेहूँ-सत्तू-आम-पणा) बनाती आहेत, गंगा/नदी-स्नान, सूर्य-अर्घ्य, दान (सत्तू-जल-घड़ा — गर्मी चा दान), नए कपड़े; बैसाखी वर भाँगड़ा-गिद्दा व गुरुद्वारा, विषु वर विषुक्कणि-सद्या-पटाखे, बिहू वर पीठा-लारू व बिहू-नृत्य। ऊपर किंवा साल ची मेष संक्रांति ची तिथी (संक्रांति-काल चे नुसार 13 किंवा 14 अप्रैल); रिकामे प्रत्येक प्रदेश ची विधि, सामग्री, कथा, पकवान।

महत्त्व — हे व्रत चा

खगोल: सूर्य निरयण मेष मध्ये — वैदिक सौर-वर्ष चा आरंभ (महाविषुव — कभी दिवस-रात्र बरोबर चा बिंदू, अयनांश पासून अब 14 अप्रैल चे आसपास); सौर पंचांग (तमिळ, मलयालम, बंगाली, असमिया, ओडिया, पंजाबी-नानकशाही, नेपाली विक्रम-सौर) सर्व यहीं पासून गिनते आहेत; संक्रांति सूर्यास्त चे नंतर असो तर पर्व अगले दिवस (14) — ऊपर तिथी याच नियम पासून।

बैसाखी 1699: गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब मध्ये खालसा-पंथ ची स्थापना ची (पंज-प्यारे) — सिखों चे साठी धार्मिक नववर्ष-सा; 1919 जलियाँवाला बाग़ देखील बैसाखी ला; किसानों ची रबी-कटाई चा उत्सव — «जट्टा आई बैसाखी»; हरिद्वार-ऋषिकेश मध्ये मेष-संक्रांति चा गंगा-स्नान (सतयुग-आरंभ ची मान्यता), गंगा-अवतरण पासून जुड़ा गंगा-सप्तमी वेगळा।

विषु: सुबह सर्वात आधी «कणि» (कृष्ण-प्रतिमा, कोन्ना (अमलतास) चे पीले फूल, चावल, फळ, सोना-सिक्के, दर्पण, दीप — उरुली मध्ये) देखना = साल-भर समृद्धी; बड़ों पासून कैनीट्टम (सिक्के); बिहू: गाय ची पूजा (गोरु बिहू — कटाई चे नंतर), नया साल (मानुह बिहू — बड़ों ला गमोसा), बिहू-गीत-नृत्य (ढोल-पेपा), पीठा; पुथांडु: कणि (तमिळ), मांगा-पचड़ी (छह रस), पंचांग-श्रवण; पोहेला बोइशाख: हालखाता (नया बही-खाता), प्रभात-फेरी (कोलकाता), पंता-भात (बांग्लादेश)।

पूजा-पद्धत (टप्प्याटप्प्याने)

हे सौर-नववर्ष ची घरेलू विधि आहे — सर्व प्रदेशों चे साझा अंग (स्नान-सूर्य-नया अन्न-दान) आधी, नंतर बैसाखी/विषु/बिहू/पुथांडु/पोहेला-बोइशाख/सतुआनी ची आपल्या रीत।

  1. साझा: ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय वर स्नान (नदी — गंगा-हरिद्वार, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, महानदी — किंवा घर वर गंगाजल), सूर्य-अर्घ्य (जल-लाल फूल-अक्षत, «ॐ घृणि सूर्याय नमः»), नए/साफ़ वस्त्र; घर चे मंदिर मध्ये कुल-देवता/विष्णु-सूर्य पूजा, नया पंचांग/कैलेंडर स्थापन (पंचांग-श्रवण — वर्ष-फल पढ़ना); पितरों ला जल; दान — सत्तू, जल-घड़ा, पंखा, छाता, गुड़, चना (गर्मी-आरंभ चा दान), अन्न-वस्त्र।
  2. बैसाखी (पंजाब-हरियाणा-दिल्ली): सुबह गुरुद्वारा — कीर्तन, अरदास, लंगर (खालसा-सिरजना दिवस — निशान साहिब बदलना, नगर-कीर्तन); खेतों मध्ये कटी फ़सल चा पहिला गट्ठर, «जट्टा आई बैसाखी» — भाँगड़ा-गिद्दा, ढोल, मेले (तलवंडी साबो, आनंदपुर); घर मध्ये खीर-कड़ाह प्रसाद-पीली सब्ज़ी (मीठे चावल), सरसों चा साग-मक्की (अंतिम), लस्सी; हिंदू-परिवार सूर्य-पूजा, गंगा-स्नान, नई फ़सल चा गेहूँ भगवान ला।
  3. विषु (केरल): पिछली रात्र विषुक्कणि सजाना — उरुली (पीतल-थाल) मध्ये कच्चा चावल, कोन्ना-फूल (कणिक्कोन्ना — अमलतास), खीरा-कटहल-आम-केला, सोने चा आभूषण, सिक्के, दर्पण (वाल्कण्णाड़ि), नया कपड़ा, ग्रंथ, निलविलक्कु — कृष्ण/गुरुवायूरप्पन ची मूर्ति चे सामने; सुबह घर ची बड़ी स्त्री सर्वात आधी कणि देखती आहे, नंतर एक-एक ला डोळे बंद कराकर कणि चे सामने लाती आहे (पहिला दर्शन); कैनीट्टम — बड़े छोटों ला सिक्के; विषु-सद्या (विषुक्कट्टा, मांगा-पचड़ी — छह रस), पटाखे (विषुप्पड़क्कम), गाय-पक्षियों ला कणि चा अंश; शबरीमला-गुरुवायूर मध्ये विषुक्कणि-दर्शन।
  4. बोहाग/रोंगाली बिहू (असम): चैत्र-संक्रांति (13 अप्रैल — बिहू-1) «गोरु बिहू» — गाय-बैल ला नदी मध्ये नहलाना, हल्दी-उड़द-लौकी-बैंगन पासून, नई रस्सी, «लाउ खा, बेंगेना खा…» गीत; मेष-संक्रांति (14 — बिहू-2) «मानुह बिहू» — स्नान, नए कपड़े, बड़ों ला गमोसा-प्रणाम (बिहुवान), पीठा (तिल-नारियल), लारू, दही-चिड़ा; तिसरा «गोसाईं बिहू» — घर चे देवता, नामघर; सात दिवस बिहू-नृत्य (ढोल-पेपा-गगना), हुसोरी (घर-घर गीत-आशीर्वाद), मुकोली बिहू; बिहू-मंच।
  5. पुथांडु (तमिलनाडु): पिछली रात्र «कणि» — थाल मध्ये फळ (आम-कटहल-केला), फूल, सुपारी, सोना-चाँदी, दर्पण, नया पंचांग; सुबह कणि-दर्शन, स्नान, मंदिर, «पंचांग-पड़नम» (वर्ष-फल श्रवण), मांगा-पचड़ी (कच्चा आम-नीम-गुड़-मिर्च-नमक-इमली — छह रस = जीवन चे छह स्वाद), वड़ई-पायसम, मदुरै-मीनाक्षी मध्ये चित्तिरै-तिरुविळा आरंभ; तमिळ नववर्ष «इनिय पुत्ताण्डु नल्वाळ्त्तुक्कळ्»।
  6. पोहेला बोइशाख (बंगाल-त्रिपुरा-बांग्लादेश): सुबह प्रभात-फेरी (रवीन्द्र-संगीत «एसो हे बोइशाख»), नए कपड़े (लाल-सफ़ेद साड़ी), लक्ष्मी-गणेश पूजा व **हालखाता** — व्यापारी नया बही-खाता (स्वस्तिक-सिंदूर), ग्राहकों ला मिठाई-कैलेंडर; घर मध्ये पायेस-लुची-मिष्टि, कालीघाट-दक्षिणेश्वर; बांग्लादेश मध्ये मंगल-शोभायात्रा (ढाका), पंता-इलिश; «शुभो नोबोबोर्षो»।
  7. पणा/महा-विषुव संक्रांति (ओडिशा): «पणा» (बेल-दही-गुड़-दूध-केले चा शरबत) बनाकर तुलसी-चौरा वर घड़ा टाँगना (बसुंधरा-थेकी — बूँद-बूँद पौधे ला जल — गर्मी मध्ये), छतुआ (सत्तू) दान, हनुमान-जयंती (ओडिशा मध्ये याच दिवस), झामु-यात्रा (अग्नि-पथ), नया ओडिया वर्ष; सतुआनी/जुड़-शीतल (बिहार-मिथिला-नेपाल-तराई): सत्तू-गुड़-आम ची चटनी-टिकोरा, «जुड़-शीतल» वर बड़े बच्चों चे सिर वर बासी जल (शीतलता-आशीर्वाद), पेड़-पौधों ला जल, घर ची लिपाई; नेपाल मध्ये नववर्ष (बैसाख 1) — भक्तपुर बिस्केट-जात्रा, स्नान-दान।
  8. उत्तराखंड-हिमाचल-कश्मीर: बिखौती (उत्तराखंड — मेले, गंगा-अलकनंदा स्नान, नया अन्न), बिशु/बैसाखी (हिमाचल — देव-मेले), नवरेह (कश्मीरी पंडित — चैत्र मध्ये, सौर पासून वेगळा); तेलुगु-कन्नड़ मध्ये उगादी चैत्र-शुक्ल-प्रतिपदा (चंद्र) वर — किंवा पन्ने चा नाही; सर्व जगह सत्तू-जल-आम चा नया अन्न।

पूजा-सामग्री ची सूची

स्नान-सूर्य-दान ची सामग्री + विषुक्कणि ची उरुली + बिहू चा गमोसा-पीठा + बैसाखी ची कड़ाह — प्रदेश-अनुसार सूची।

  • साझा: गंगाजल, सूर्य-अर्घ्य चा लोटा, लाल फूल-अक्षत, नया पंचांग/कैलेंडर, नए वस्त्र, दान — सत्तू, जल-घड़ा (मिट्टी), पंखा, छाता, गुड़-चना, अन्न
  • बैसाखी: कड़ाह-प्रसाद (आटा-घी-चीनी), पीले चावल (केसर), खीर, लस्सी, नई फ़सल चा गेहूँ; गुरुद्वारा-सेवा; भाँगड़ा-ढोल
  • विषुक्कणि: उरुली/पीतल-थाल, कच्चा चावल, कोन्ना (अमलतास) फूल, खीरा-कटहल-आम-केला-नारियल, सोना (आभूषण), सिक्के, दर्पण (वाल्कण्णाड़ि), नया मुंडु/कसवु, ग्रंथ, निलविलक्कु, कृष्ण-मूर्ति; कैनीट्टम चे सिक्के; पटाखे; सद्या-सामग्री, मांगा-पचड़ी (आम-गुड़-नीम-मिर्च)
  • बिहू: गमोसा (लाल-सफ़ेद बुना अंगोछा — बड़ों/अतिथियों ला), पीठा (तिल-पीठा, नारियल-पीठा, घिला), लारू (नारियल-तिल लड्डू), दही-चिड़ा-गुड़, गाय चे साठी हल्दी-उड़द-लौकी-बैंगन-नई रस्सी (गोरु बिहू), ढोल-पेपा-गगना-ताल, मेखेला-चादर
  • पुथांडूः कन्नी-थाल (फळ-फूल-सुपारी-सोन्याचे आरसे-पंचांग), मंगा-पचारी (कच्चे आंब्याचे पीठ, निम्बू-फूल, गूळ, मिरची, मीठ, इमली), वडई, पायसम, नवीन पंचांग
  • पोहेला बोइशाख: नया बही-खाता (हालखाता — लाल कपड़ा), स्वस्तिक-सिंदूर, लक्ष्मी-गणेश, मिठाई-कैलेंडर (ग्राहकों ला), पायेस-लुची, लाल-सफ़ेद साड़ी
  • पणा संक्रांति/सतुआनी: बेल-दही-गुड़-दूध-केला (पणा), मिट्टी चा घड़ा (बसुंधरा-थेकी — तुलसी वर), छतुआ/सत्तू, आम-टिकोरा-चटनी, गुड़; जुड़-शीतल चा बासी जल

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प्रतिज्ञा-कथा

बैसाखी 1699: गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब मध्ये सभा बुलाई आणि तलवार लेकर «एक सिर चाहिए» कहा — पाँच ने बारी-बारी सिर दिया (दया राम, धरम दास, हिम्मत राय, मोहकम चंद, साहिब चंद) — तंबू पासून जीवित लौटे, गुरु ने अमृत (खंडे-बाटे चा पाहुल) छकाकर «पंज प्यारे» व खालसा-पंथ ची स्थापना ची, «सिंह» नाव, पाँच ककार; नंतर स्वतः उनसे अमृत लिया — «आपे गुर चेला»; म्हणून बैसाखी खालसा-सिरजना दिवस। 1919 मध्ये याच दिवस जलियाँवाला बाग़ (अमृतसर) चा नरसंहार — स्मृति-दिवस देखील।

विषु: कृष्ण ने नरकासुर चा वध किया/राम ने रावण-वध करून सूर्य ला पूर्व पासून उगने दिया (लोक-मान्यताएँ) — विषु चे दिवस सूर्य ठीक पूर्व मध्ये (विषुव); विषुक्कणि ची परंपरा — साल चा पहिला दर्शन शुभ असो तर पूरा साल शुभ; कोन्ना (कणिक्कोन्ना) श्रीकृष्ण ला प्रिय — अप्रैल मध्ये खिलता पीला अमलतास «केरल चा स्वर्ण»; कैनीट्टम = बड़ों चा आशीर्वाद-धन।

बिहू व सूर्य/कृषि: बोहाग बिहू असम ची कृषि-ऋतु चा आरंभ — गाय ची पूजा (गोरु बिहू) क्योंकि वही खेत-जीवन चा आधार; मेष-संक्रांति ला महाविषुव — सूर्य विषुवत् रेखा वर, दिवस-रात्र बरोबर (प्राचीन गणना); ओडिशा चा पणा संक्रांति = हनुमान-जयंती (ओडिया परंपरा) व बसुंधरा-थेकी — धरती-माँ (बसुंधरा) ला गर्मी मध्ये जल-अर्पण; सतुआनी चा सत्तू — नई फ़सल चा पहिला अन्न सूर्य-पितरों ला, नंतर स्वतः (ठंडक); जुड़-शीतल — बड़े जल-छिड़ककर «शीतल रहो» चा आशीर्वाद।

कड़ाह-पीले चावल, विषु-सद्या-मांगा-पचड़ी, बिहू-पीठा-लारू, पणा-सत्तू, पंता-इलिश — सौर-नववर्ष ची थालियाँ

मेष संक्रांति वर प्रत्येक प्रदेश चा «नया अन्न» — पंजाब मध्ये नई गेहूँ ची कड़ाह-खीर, केरल मध्ये विषु-सद्या व मांगा-पचड़ी (छह रस — जीवन चे सर्व स्वाद), असम मध्ये पीठा-लारू-दही-चिड़ा, तमिलनाडु मध्ये पुथांडु-सद्या, बंगाल मध्ये पायेस-लुची, ओडिशा मध्ये पणा-छतुआ, बिहार-नेपाल मध्ये सत्तू-आम; गर्मी-आरंभ — ठंडी, कच्ची, सत्तू-दही-बेल ची चीज़ें।

  • बैसाखी: कड़ाह-प्रसाद (आटा-घी-चीनी बरोबर), पीले मीठे चावल (केसर-किशमिश), खीर, छोले-भटूरे/पूड़ी, लस्सी, सरसों-साग (आख़िरी), नई गेहूँ ची रोटी-गुड़
  • विषु: विषुक्कट्टा (चावल-नारियल-दूध ची भाप-पकवान — पहिला व्यंजन), मांगा-पचड़ी/वेप्पम्पू-पचड़ी (कच्चा आम-नीम-गुड़-मिर्च — छह रस), विषु-सद्या (परिप्पु-सांबर-अवियल-थोरन-कालन-एरिश्शेरी-पायसम), कटहल-आम चे व्यंजन (चक्का-प्रधमन), पप्पड़म-केला
  • बिहू: पीठा — तिल-पीठा (चावल-आटे ची रोल मध्ये तिल-गुड़), नारियल-पीठा, घिला-पीठा, सुंगा-पीठा (बाँस मध्ये); लारू (नारियल/तिल चे लड्डू), दही-चिड़ा-गुड़, मुरमुरे, बोरा-चावल, मासोर-टेंगा (मछली — काही घर), बिहू-भोज
  • पुथांडूः मंगा-पचारी (कच्चे आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट आंबट
  • पोहेला बोइशाख: पायेस, लुची-आलूर दम, संदेश-रसगुल्ला-मिष्टि दोई, माछ (बंगाल मध्ये उत्सव-भोज), बांग्लादेश मध्ये पंता-भात (बासी चावल-पानी) + इलिश + भर्ता
  • पणा संक्रांति/सतुआनी/जुड़-शीतल: पणा (बेल-दही-गुड़-दूध-केला-काली मिर्च), छतुआ/सत्तू (जौ-चना — गुड़/नमक-प्याज़ पासून), आम ची चटनी-टिकोरा, बासी भात-दही (जुड़-शीतल — बासी खाना ठंडक), खीर; नेपाल: सेल-रोटी, दही-चिउरा

वेगळा-वेगळा इलाक़ों ची रीत

एक च सूर्य-संक्रांति, आठ नाव — पंजाब चा ढोल, केरल ची कणि, असम चा गमोसा, बंगाल चा हालखाता, ओडिशा चा पणा, बिहार चा सत्तू, तमिळ चा पचड़ी, नेपाल चा नववर्ष।

पंजाब-हरियाणा-दिल्ली-हिमाचल (बैसाखी): गुरुद्वारों मध्ये खालसा-सिरजना — नगर-कीर्तन, निशान-साहिब सेवा, अखंड-पाठ, लंगर (आनंदपुर साहिब, तलवंडी साबो-दमदमा साहिब, अमृतसर); किसानों चा भाँगड़ा-गिद्दा, मेले (पिंजौर, हरियाणा चे जींद-करनाल), «जट्टा आई बैसाखी»; हिंदू-परिवार हरिद्वार-गंगा-स्नान (मेष-संक्रांति महास्नान), सूर्य-पूजा, नया गेहूँ; हिमाचल मध्ये «बिशु/बैसाखी» — देव-मेले (कुल्लू-मंडी), रिवालसर; दिल्ली-गुड़गाँव मध्ये गुरुद्वारा व बैसाखी-मेले।
केरळ (विषु): विषुक्कणि — उरुली मध्ये चावल-कोन्ना-फल-सोना-दर्पण-दीप कृष्ण चे सामने, भोर मध्ये आँख बंद करके कणि-दर्शन (घर ची बड़ी माँ सबको लाती आहे), कैनीट्टम (बड़े छोटों ला सिक्के — मंदिर मध्ये देखील), विषुप्पड़क्कम (पटाखे), विषु-सद्या (विषुक्कट्टा-मांगा-पचड़ी), पक्षियों-गायों ला कणि चा चावल; शबरीमला (विषु-दर्शन — मंदिर खुलता), गुरुवायूर, तृश्शूर-वडक्कुन्नाथन मध्ये विषुक्कणि; मालाबार मध्ये विषु + «विषु-वेला» (मंदिर-उत्सव)।
आसाम-ईशान्य (बोहाग बिहू): रोंगाली/बोहाग बिहू — सात दिवस (चैत्र-संक्रांति गोरु बिहू पासून): गोरु बिहू (गाय-स्नान-पूजा), मानुह बिहू (नववर्ष — गमोसा, बड़ों ला प्रणाम, नए कपड़े, पीठा-लारू), गोसाईं बिहू, कुटुम-बिहू (रिश्तेदार), मेला-बिहू; बिहू-नृत्य (मेखेला-चादर, ढोल-पेपा-गगना-ताल-टोका), हुसोरी (घर-घर आशीर्वाद-गीत), मुकोली बिहू (खुले मैदान), बिहू-मंच (गुवाहाटी लताशिल); मिश्र — बंगाली (पोहेला बोइशाख), मणिपुर (चैराओबा — सौर नववर्ष, खाद्य-चढ़ावा), त्रिपुरा (बुइसु), अरुणाचल-मिज़ोरम मध्ये आपल्या वसंत-पर्व।
तामिळनाडू-कर्नाटक-आंध्र (पुथंडू): तमिळ पुथांडु (चित्तिरै-1) — कणि-दर्शन, मंदिर (मीनाक्षी-चित्तिरै तिरुविळा, श्रीरंगम), पंचांग-पड़नम (वर्ष-फल), मांगा-पचड़ी, नए कपड़े, बड़ों पासून आशीर्वाद, कोलम; श्रीलंका-सिंगापुर-मलेशिया चे तमिळ देखील; कर्नाटक-आंध्र-तेलंगाना मध्ये नववर्ष **उगादी** (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — चंद्र, मार्च-अप्रैल) वर — मेष-संक्रांति ला «विषु/सौर संक्रमण» वर तुलु-कोडव «बिसु परबा» (मंगलुरु-कोडगु — कणि-सा «बिसु-कणि»)।
बंगाल-ओडिशा-त्रिपुरा-बांगलादेश (पोहेला बोइशाख/पाना संक्रांती): बंगाल: पोहेला बोइशाख — प्रभात-फेरी, हालखाता (व्यापारी — कालीघाट-दक्षिणेश्वर मध्ये बही-पूजा), नए कपड़े, «शुभो नोबोबोर्षो», मिष्टि, बंगाली-भोज; बांग्लादेश (राष्ट्रीय पर्व) — ढाका ची मंगल-शोभायात्रा (यूनेस्को), रमना-बटमूल चा छायानट-गान, पंता-इलिश, बोइशाखी-मेला; ओडिशा: महा-विषुव/पणा संक्रांति — पणा, बसुंधरा-थेकी, छतुआ-दान, हनुमान-जयंती, झामु-यात्रा (दंड-नाच), मेरु-यात्रा (चैत्र-दंड चा अंत), नया ओडिया वर्ष; त्रिपुरा: बुइसु/पोहेला बोइशाख।
बिहार-झारखंड-उत्तराखंड-नेपाळ (हुल्लडी/जुडा-शीतला/शहनीती/नववर्ष): बिहार-झारखंड: सतुआनी (सतुआ संक्रांति — सत्तू-गुड़-आम-टिकोरा, गंगा-स्नान, सूर्य-पितरों ला सत्तू), मिथिला मध्ये «जुड़-शीतल» (अगले दिवस — बड़े बच्चों चे सिर वर बासी जल, पेड़-पौधों ला पानी, बासी भात-दही, घर-लिपाई, «शीतल रहो»); उत्तराखंड: बिखौती (बिखोत) — गंगा-अलकनंदा स्नान, द्वाराहाट-स्याल्दे मेला, नया अन्न; नेपाल: नववर्ष (बैसाख-1, विक्रम-संवत् सौर) — राष्ट्रीय छुट्टी, भक्तपुर बिस्केट-जात्रा (रथ-यात्रा, लिंगो-स्तंभ), थिमि सिंदूर-जात्रा, स्नान-दान; तराई मध्ये सतुआनी-जुड़-शीतल।
🙏 तुमचे घर ची रीत इससे वेगळा आहे? येथे लिखिए

दादी-नानी पासून सुनी रीत, कथा, गीत किंवा पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर तुमचे इलाक़े चे नाव पासून याच पन्ने वर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नाही — सिर्फ़ पूछने चे साठी)।

प्रत्येक भेजी रीत आधी वाचली जाते आहे — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नाही जुड़ती।

क्या करा, क्या न करा

✅ क्या करा

  • संक्रांति-दिन नदी/घर-स्नान, सूर्य-अर्घ्य, नया पंचांग, नए वस्त्र; बड़ों पासून आशीर्वाद (कैनीट्टम/गमोसा/शगुन)
  • नया अन्न आधी भगवान-पितरों ला — गेहूँ/सत्तू/चावल; गर्मी चा दान — सत्तू, जल-घड़ा, पंखा, छाता
  • आपल्या प्रदेश ची रीत — विषुक्कणि भोर मध्ये सर्वात आधी, गोरु बिहू वर गाय-पूजा, हालखाता वर लक्ष्मी-गणेश, पणा-थेकी तुलसी वर
  • गुरुद्वारा/मंदिर-सेवा, लंगर-सद्या मध्ये ग़रीब ला भोजन; बिहू-भाँगड़ा-नृत्य मध्ये कुटुंब
  • फ़सल-किसान चा सन्मान — नई फ़सल चे साठी कृतज्ञता

❌ क्या न करा

  • संक्रांति-काल चे आसपास (पुण्य-काल) झगड़ा-झूठ-ऋण-लेन (लोक-मान्यता); विषु वर कणि पासून आधी काही आणि देखना
  • पटाखे (विषु) व नृत्य-मेलों मध्ये असुरक्षा-नशा; गाय-बैल ला कष्ट (बिहू वर तर उनका सन्मान)
  • बासी/माँस पूजा-थाली मध्ये (उत्सव-भोज वेगळा); पंचांग-कैलेंडर चा अनादर
  • मेष-संक्रांति ला «चंद्र-नववर्ष» (उगादी/गुड़ी पड़वा/नवसंवत्सर) पासून मिलाना — ते चैत्र शुक्ल प्रतिपदा चे, हे सौर
  • गर्मी मध्ये दान-भूल — सत्तू-जल-घड़ा-छाता या दिवस चा मुख्य पुण्य

वारंवार विचारले जाणारे प्रश्न

बैसाखी/विषु/बिहू 2027 मध्ये केव्हा आहे — 13 किंवा 14 अप्रैल?

ऊपर किंवा साल ची मेष संक्रांति ची तिथी आहे — सूर्य चे मेष-प्रवेश चा क्षण यदि सूर्यास्त चे नंतर असो तर पर्व अगले दिवस (प्रायः 14 अप्रैल; कभी 13); बैसाखी-विषु-पुथांडु-पोहेला बोइशाख-पणा संक्रांति एक च दिवस; बोहाग बिहू चा गोरु बिहू एक दिवस आधी (चैत्र-संक्रांति) आणि मानुह बिहू मेष-संक्रांति ला; जुड़-शीतल सतुआनी चे अगले दिवस; आपल्या प्रदेश चा पंचांग मिला लें।

बैसाखी आणि खालसा चा क्या संबंध?

1699 ची बैसाखी ला गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब मध्ये पंज-प्यारों ला अमृत छकाकर खालसा-पंथ ची स्थापना ची — म्हणून सिखों चे साठी बैसाखी खालसा-सिरजना दिवस (नानकशाही कैलेंडर मध्ये वैसाख-1); गुरुद्वारों मध्ये नगर-कीर्तन, अखंड-पाठ, लंगर; सोबत च रबी-कटाई चा किसान-पर्व — दोन्ही एक दिवस।

विषुक्कणि क्या आहे आणि कैसे सजाएँ?

«कणि» = साल चा पहिला दर्शन — विषु ची भोर मध्ये आँख खोलते च शुभ-वस्तुएँ देखना ताकि साल शुभ असो; रात्र ला उरुली (पीतल-थाल) मध्ये कच्चा चावल, कोन्ना (अमलतास) चे पीले फूल, खीरा-कटहल-आम-केला-नारियल, सोने चा गहना, सिक्के, दर्पण (जिसमें कणि व आपला चेहरा), नया कपड़ा, ग्रंथ, जलता निलविलक्कु — कृष्ण/गुरुवायूरप्पन ची मूर्ति चे सामने; भोर मध्ये घर ची बड़ी स्त्री आधी देखती आहे, नंतर सबको आँख बंद कराकर लाती आहे; नंतर कैनीट्टम (सिक्के)।

बिहू चे सात दिवस कौन-से आहेत?

बोहाग/रोंगाली बिहू: 1 गोरु बिहू (चैत्र-संक्रांति — गाय-बैल ला नहलाना-पूजना), 2 मानुह बिहू (मेष-संक्रांति — नववर्ष, स्नान, नए कपड़े, गमोसा-प्रणाम, पीठा), 3 गोसाईं बिहू (घर-देवता/नामघर), 4 तातोर बिहू (करघा-वस्त्र), 5 नांगोलोर बिहू (हल-औज़ार), 6 घरोसिया-जीबोर बिहू (पालतू पशु), 7 चेरा बिहू (समापन) — क्रम-नाम इलाक़े पासून बदलते; पूरे सात दिवस बिहू-नृत्य-हुसोरी।

मांगा-पचड़ी मध्ये छह रस का?

तमिळ पुथांडु व केरल-विषु ची पचड़ी मध्ये कच्चा आम (खट्टा), नीम-फूल (कड़वा), गुड़ (मीठा), मिर्च (तीखा), नमक (नमकीन), इमली/कच्चा केला (कसैला) — छह स्वाद = जीवन चे सुख-दुःख-सब चा स्वीकार; नए साल चे आधी कौर मध्ये — उगादी-पचड़ी (तेलुगु-कन्नड़) देखील हेच भाव (नीम-गुड़)।

हालखाता क्या आहे?

बंगाल चे व्यापारियों चा पोहेला बोइशाख वर नया बही-खाता (लाल कपड़े मध्ये बँधा «हालखाता») — लक्ष्मी-गणेश पूजा चे सोबत पहिला पन्ना स्वस्तिक-सिंदूर पासून, पुराने उधार चा हिसाब बंद, ग्राहकों ला दुकान वर बुलाकर मिठाई-कैलेंडर; कालीघाट-दक्षिणेश्वर मध्ये खाता-पूजा; उत्तर-भारत ची दीवाली-चोपड़ा-पूजा चा बंगाली रूप।

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⚠️ हे तपशील विभिन्न प्रदेशों ची पारंपरिक रीत व लोक-मान्यता वर आधारित आहे; आपल्या एकूण-कुटुंब व इलाक़े ची रीत सर्वोपरि आहे। संक्रांति-तिथि (13/14 अप्रैल) संक्रांति-क्षण व प्रादेशिक पंचांग पासून — आपल्या प्रदेश चा पंचांग मिला लें।

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