🌸 ओणम (तिरुवोणम) 2027
केरल का सबसे बड़ा पर्व — चिंगम (सिंह) मास में श्रवण (तिरुवोणम) नक्षत्र का दिन; राजा महाबलि का वार्षिक आगमन; दस दिन का पूक्कलम (फूल-रंगोली), ओणसद्या (26-व्यंजन केले के पत्ते पर), कसवु-साड़ी, वल्लम-कली (नौका-दौड़), पुलिकली; अगस्त-सितंबर।
ओणम केरल का राष्ट्रीय पर्व है — मलयालम वर्ष के पहले मास चिंगम (सौर सिंह-मास, अगस्त-सितंबर) में जिस दिन श्रवण (तिरुवोणम) नक्षत्र हो, वह «तिरुवोणम» — पर्व का मुख्य दिन; उससे दस दिन पहले अत्तम (हस्त) नक्षत्र से पूक्कलम (आँगन में फूलों की रंगोली) शुरू होता है और तिरुवोणम पर पूरा होता है। मान्यता है कि इस दिन दानवीर असुर-राजा महाबलि साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने पाताल से केरल आते हैं — इसलिए हर घर सजा, हर पेट भरा, हर चेहरा प्रसन्न रहना चाहिए।
घर की स्त्रियाँ पूक्कलम बनाती हैं, कसवु (क्रीम-सुनहरी) साड़ी पहनती हैं, ओणसद्या — केले के पत्ते पर 20-26 शाकाहारी व्यंजन (परिप्पु, सांबर, अवियल, ओलन, थोरन, पचड़ी, पायसम…) — बनाती हैं; पुरुष वल्लम-कली (सर्प-नौका दौड़), पुलिकली (बाघ-नृत्य), ओणक्कली; बच्चों को ओणक्कोडि (नए कपड़े)। तिरुवोणम की सुबह तृक्काक्करा-अप्पन (वामन) की मिट्टी-पिरामिड मूर्ति की पूजा। ऊपर इस साल के तिरुवोणम की तिथि (दिल्ली-सूर्योदय के नक्षत्र से; केरल में वही दिन); नीचे दस दिनों का क्रम, पूक्कलम, सद्या की सूची, कथा और इलाक़ों की रीत।
महत्व — यह व्रत क्यों
महाबलि-वामन कथा (नीचे): विष्णु ने वामन बनकर बलि से तीन पग में तीनों लोक लिए, बलि को पाताल भेजा पर वर दिया कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आ सकें — वही दिन तिरुवोणम; ओणम इसी «सुनहरे युग» (मावेली नाडु — जब सब समान, न चोरी न झूठ) की स्मृति है — «मावेली नाडु वाणीडुम कालम्…» ओणम-गीत।
दस दिन: अत्तम (1 — पूक्कलम की पहली पंखुड़ी-पंक्ति, तृक्काक्करा मंदिर से पर्व-आरंभ), चित्तिरा, चोदि, विशाकम, अनिझम, त्रिकेट्टा, मूलम (सद्या-आरंभ), पूरादम (ओणत्तप्पन की मूर्तियाँ), उत्रादम (पहला ओणम — «उत्रादप्पाच्चिल», ख़रीदारी की धूम), तिरुवोणम (मुख्य — दूसरा ओणम), अवित्तम (तीसरा), चतयम (चौथा — ओणत्तप्पन विसर्जन); पर्व अत्तम से चतयम 12 दिन।
फ़सल-पर्व भी — चिंगम में धान की कटाई के बाद समृद्धि-उत्सव, मानसून का अंत; सब धर्मों के लोग मनाते हैं (केरल का साझा पर्व); केरल-सरकार का एक सप्ताह का उत्सव (तिरुवनंतपुरम् में जुलूस-«ओणम वीक»), अरनमुला-वल्लम-कली (उत्रट्टाति), वैक्कम-अष्टमी अलग।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू ओणम-क्रम है — अत्तम से तिरुवोणम तक पूक्कलम, ओणत्तप्पन-पूजा, सद्या, ओणक्कोडि; केरल से बाहर रहने वाले मलयाली व अन्य परिवारों के लिए भी।
- अत्तम (पहला दिन): सुबह स्नान, आँगन/द्वार पर गोबर-लीपकर पूक्कलम की पहली पंक्ति — सिर्फ़ तुलसी व पीले (तुंबा) फूल; रोज़ एक-एक पंक्ति/रंग बढ़ता है — गेंदा, चेंबरत्ती (गुड़हल), चेत्ती, जासवंद, कमल-पंखुड़ी; तिरुवोणम पर 10 पंक्तियों का पूरा पूक्कलम; बीच में दीप (निलविलक्कु)।
- मूलम-पूरादम-उत्रादम: घर की सफ़ाई-सजावट, नए कपड़े (ओणक्कोडि) की ख़रीद — उत्रादम को «उत्रादप्पाच्चिल» (अंतिम-दिन की भागदौड़); पूरादम को मिट्टी के ओणत्तप्पन/तृक्काक्करा-अप्पन (चौकोर पिरामिड — वामन/महाबलि का प्रतीक) बनाकर पूक्कलम के बीच स्थापना, चावल-आटे का घोल (अणियल) से सजावट, फूल-अक्षत; बड़ी बहन/माँ को «ओणप्पुडव» (साड़ी) देना।
- तिरुवोणम की सुबह: ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान, कसवु-मुंडु/साड़ी; पूक्कलम पूरा करना, ओणत्तप्पन को अड़ा (चावल-नारियल-गुड़ का भाप-पकवान) का नैवेद्य, दीप, «ओणप्पाट्टु» (ओणम-गीत); महाबलि का स्वागत — द्वार पर दीप, आरप्पु-विळि (उत्सव-ध्वनि); घर के बड़े सबको ओणक्कोडि (नए वस्त्र) देते हैं, पैर छूना।
- ओणसद्या (दोपहर): केले के पत्ते पर (नोक बाएँ) क्रम से — पप्पड़म, केला (नेन्त्र), शर्करा-वरट्टि, उप्पेरि, अचार (इंजि-पुळि, मांगा), पचड़ी-किच्चड़ी, थोरन, ओलन, अवियल, कूट्टुकरी, एरिश्शेरी, कालन, फिर चावल — परिप्पु-नेय्य (दाल-घी), सांबर, रसम, मोरु (छाछ); अंत में पायसम (पाल-अड़ा, परिप्पु, पालड़ा) — 2-3 प्रकार; परिवार साथ, बुज़ुर्ग-मेहमान पहले।
- दोपहर-शाम: ओणक्कलिकल — तिरुवातिरा-कली (स्त्रियों का गोल-नृत्य दीप के चारों ओर), कुम्मट्टि, पुलिकली (त्रिशूर — चौथे ओणम), वल्लम-कली (अरनमुला-चंपक्कुलम), ऊंजाल (झूला), तलप्पंतु-कली; बच्चों के खेल; टीवी पर ओणम-कार्यक्रम।
- अवित्तम-चतयम: तीसरे-चौथे ओणम पर ओणत्तप्पन की मूर्तियाँ पूक्कलम से उठाकर जल/खेत में विसर्जन — «अगले साल फिर आना»; चतयम को श्री-नारायण-गुरु जयंती भी (केरल)।
- केरल के बाहर: छोटा पूक्कलम (कागज़/फूल), ओणत्तप्पन (मिट्टी/पीतल), सद्या 8-10 व्यंजन या केले-पत्ते पर सामूहिक (मलयाली-समाज); केरल के परिवारों को «ओणाशंसकल्» (शुभकामना), वीडियो-कॉल पर बड़ों को प्रणाम।
- ओणम-नियम: घर में झगड़ा-उधारी-उदासी नहीं (महाबलि प्रजा को सुखी देखना चाहते हैं), ग़रीब को सद्या-दान (केरल में सामूहिक सद्या), पूक्कलम में रोज़ ताज़े फूल।
पूजा-सामग्री की सूची
पूक्कलम के फूल, ओणत्तप्पन की मिट्टी, कसवु, केले के पत्ते और 26 व्यंजनों की सद्या — ओणम की सूची।
- पूक्कलम: तुलसी, तुंबा (सफ़ेद), गेंदा (पीला-नारंगी), चेंबरत्ती (गुड़हल — लाल), चेत्ती (इक्सोरा), कमल-पंखुड़ी, हरी पत्तियाँ, गोबर/चावल-आटे का आधार, निलविलक्कु (पीतल-दीप)
- ओणत्तप्पन/तृक्काक्करा-अप्पन: मिट्टी (या पीतल) की चौकोर पिरामिड-मूर्तियाँ (3-5), चावल-आटे का घोल (अणियल), फूल-अक्षत, अड़ा (नैवेद्य)
- वस्त्र: कसवु-साड़ी/मुंडु (क्रीम-सुनहरी बॉर्डर), बच्चों के ओणक्कोडि, बड़ों के लिए ओणप्पुडव (साड़ी-मुंडु)
- सद्या: केले के पत्ते, चावल (मट्टा/रोज़), तूर-दाल, सब्ज़ियाँ (कद्दू, कच्चा केला, सेम, गाजर, ककड़ी, कद्दू-लौकी, याम, ड्रमस्टिक), नारियल (बहुत), नारियल-तेल, दही-छाछ, इमली, गुड़, अदरक, कड़ी-पत्ता, राई, हरी-मिर्च
- पायसम: चावल/अड़ा/परिप्पु (मूँग), गुड़, नारियल-दूध, घी, काजू-किशमिश, इलायची; पप्पड़म, नेन्त्रम (केरल केला), शर्करा-वरट्टि (केले के गुड़-चिप्स), उप्पेरि (चिप्स), इंजि-पुळि, अचार
- खेल-नृत्य: ऊंजाल (झूला), तिरुवातिरा-कली के लिए दीप, तलप्पंतु; ओणप्पाट्टु (गीत)
- दान: सामूहिक-सद्या/भोजन ग़रीबों को, वस्त्र; मंदिर (तृक्काक्करा/वामनमूर्ति) में दर्शन
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प्रह्लाद के पौत्र असुर-राजा महाबलि दानवीर, न्यायी व विष्णु-भक्त थे; उनके राज्य में सब समान, सुखी — देवता ईर्ष्या से डरे कि बलि इंद्र-पद ले लेंगे; अदिति की प्रार्थना पर विष्णु वामन (बटुक-ब्राह्मण) बनकर बलि के अश्वमेध-यज्ञ में पहुँचे और तीन पग भूमि माँगी; गुरु शुक्राचार्य ने रोका, पर बलि ने दान दिया — वामन ने विराट रूप में दो पग में पृथ्वी-स्वर्ग नापे, तीसरे के लिए बलि ने अपना सिर दिया; विष्णु ने उन्हें पाताल (सुतल) का राजा बनाया और वर दिया — «साल में एक दिन अपनी प्रजा से मिलने आओगे» — वही तिरुवोणम; केरल में तृक्काक्करा (वामन का मंदिर) से पर्व आरंभ।
ओणम केरल के «सुनहरे युग» की स्मृति है — मावेली (महाबलि) के राज में «न चोरी, न छल, न झूठ, न दुःख; सब समान» (ओणम-गीत); इसलिए ओणम पर हर घर सजा, हर परिवार नए कपड़ों में, सबका पेट भरा — ताकि लौटे राजा को प्रजा सुखी दिखे; जाति-धर्म-भेद के बिना सब मनाते हैं।
वल्लम-कली की कथा: अरनमुला के पार्थसारथी (कृष्ण) मंदिर में एक भक्त-ब्राह्मण का तिरुवोणम-भोज (तिरुवोण-सद्या) कृष्ण तक नौका से पहुँचाया गया — तभी से उत्रट्टाति को अरनमुला-वल्लम-कली (पल्लियोड़म — सर्प-नौकाएँ, वंचिप्पाट्टु गीत); पुलिकली त्रिशूर के महाराजा शक्तन तंपुरान के समय (200 वर्ष) से — बाघ-रंग में नर्तक, चौथे ओणम पर।
ओणसद्या — केले के पत्ते पर 26 व्यंजन, पायसम अंत में
ओणसद्या ओणम की आत्मा — पूर्ण शाकाहारी, नारियल-तेल व नारियल-आधारित, केले के पत्ते पर बाएँ से दाएँ निश्चित क्रम में परोसा; पत्ते की नोक बाएँ; चावल बीच में; पायसम अंतिम; परिवार ज़मीन पर साथ बैठकर; पत्ते को अंत में अपनी ओर मोड़ना = «संतुष्ट»। नीचे व्यंजन-क्रम व सरल विधि।
- पत्ते के ऊपरी बाएँ कोने से: पप्पड़म, नेन्त्र-पळम (केला), शर्करा-वरट्टि (गुड़-केले चिप्स), उप्पेरि (केले के नमकीन चिप्स), नमक; फिर अचार — इंजि-पुळि (अदरक-इमली-गुड़ की चटनी), मांगा-अचार, नारंगा
- ऊपरी पंक्ति (दाएँ): किच्चड़ी (ककड़ी/भिंडी-दही), पचड़ी (अनानास/कद्दू-दही-नारियल), थोरन (सेम/पत्तागोभी-नारियल की सूखी सब्ज़ी), ओलन (कद्दू-लोबिया-नारियल-दूध), अवियल (मिश्रित सब्ज़ी-नारियल-दही), कूट्टुकरी (काला चना-याम-नारियल), एरिश्शेरी (कद्दू-चना-भुना नारियल), कालन (कच्चा केला/याम-दही-नारियल)
- चावल (मट्टा — लाल) बीच में; उस पर क्रम से — परिप्पु + नेय्य (मूँग-दाल + घी), सांबर, रसम, फिर मोरु/पुळिश्शेरी (छाछ-कढ़ी); पप्पड़म तोड़कर परिप्पु में
- पायसम (2-3): पाल-अड़ा (चावल-अड़ा-दूध-चीनी), परिप्पु-पायसम (मूँग-गुड़-नारियल-दूध), पालड़ा-प्रदमन, गोतंबु (गेहूँ), सेमिया; पायसम के साथ केला व पप्पड़म (केरल-रीत — मीठे-नमकीन का मेल); अंत में मोरु-चावल व केला — पाचन
- सुबह का नाश्ता: इडियप्पम-स्ट्यू, पुट्टु-कड़ला, अप्पम; ओणम-विशेष: अड़ा (ओणत्तप्पन का नैवेद्य), उन्नियप्पम, इलयड़ा
- केरल के बाहर सरल सद्या (8-10): चावल, परिप्पु-घी, सांबर, अवियल, थोरन, पचड़ी, इंजि-पुळि, पप्पड़म, केला, एक पायसम; बंगलुरु-मुंबई-दिल्ली-खाड़ी में मलयाली-समाज की सामूहिक सद्या
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
अरनमुला की नौका-दौड़, त्रिशूर की पुलिकली, कोच्चि का अत्तचमयम, खाड़ी-देशों का प्रवासी-ओणम — केरल का पर्व दुनिया-भर।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- अत्तम से रोज़ पूक्कलम (ताज़े फूल), तिरुवोणम पर पूरा; बीच में निलविलक्कु
- ओणत्तप्पन-पूजा सुबह, अड़ा-नैवेद्य; ओणक्कोडि — बड़े छोटों को नए कपड़े, प्रणाम
- ओणसद्या पूर्ण शाकाहारी, केले के पत्ते पर क्रम से, परिवार साथ; ग़रीब/पड़ोसी को सद्या
- ओणक्कलिकल — झूला, तिरुवातिरा-कली, खेल; बच्चों को कथा (महाबलि-वामन)
- अवित्तम/चतयम पर ओणत्तप्पन का विसर्जन जल/खेत में
❌ क्या न करें
- ओणम-दिनों में झगड़ा, उधार-माँग, शोक-दिखावा (महाबलि प्रजा को सुखी देखने आते हैं — लोक-भाव)
- सद्या में माँस-मछली-प्याज़-लहसुन (पारंपरिक सद्या शुद्ध शाकाहारी; कुछ समुदाय अलग)
- पूक्कलम में कृत्रिम/प्लास्टिक फूल, बासी फूल; नकली रंग
- वल्लम-कली/पुलिकली में नशा-असुरक्षा; भीड़ में बच्चे अकेले
- ओणम को केवल «हिंदू-पर्व» समझना — केरल में सब धर्मों का साझा; किसी को सद्या से वंचित न रखें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ओणम (तिरुवोणम) 2027 में कब है?
ऊपर इस साल के तिरुवोणम की तिथि है — चिंगम (सौर सिंह-मास) में श्रवण-नक्षत्र का दिन (सूर्योदय-नक्षत्र से); अत्तम (पूक्कलम-आरंभ) उससे 9 दिन पहले, उत्रादम एक दिन पहले, अवित्तम-चतयम दो दिन बाद; केरल-सरकार का पंचांग (मलयालम कैलेंडर) वही दिन देता है — कभी नक्षत्र दो दिन फैले तो केरल-पंचांग की तिथि मानें।
ओणम किसका पर्व है — हिंदू या सबका?
मूल कथा वामन-महाबलि (वैष्णव) की है, पर केरल में ओणम धर्म-निरपेक्ष फ़सल व राज्य-पर्व है — हिंदू, ईसाई, मुस्लिम सब पूक्कलम-सद्या-ओणक्कोडि मनाते हैं; सरकारी छुट्टी व «ओणम-वीक»; इसलिए इसे केरल का «राष्ट्रीय पर्व» कहते हैं।
पूक्कलम कैसे बनाएँ, किस दिन कौन-सा फूल?
अत्तम को गोबर/मिट्टी के गोल आधार पर सिर्फ़ तुलसी व तुंबा (सफ़ेद) की एक पंक्ति; चित्तिरा से रोज़ एक रंग/पंक्ति — पीला (गेंदा), नारंगी, लाल (चेंबरत्ती-चेत्ती), बैंगनी (कक्का-पूवु), हरी पत्तियाँ; तिरुवोणम पर 10 पंक्तियाँ, बीच में दीप व ओणत्तप्पन; परंपरा में रोज़ पंखुड़ियाँ बदलें; कागज़/चावल-रंगोली का विकल्प केरल के बाहर।
ओणसद्या में कितने व्यंजन और क्रम क्या?
पारंपरिक 26 (कहीं 20-64): पप्पड़म-केला-चिप्स-अचार (बाएँ), किच्चड़ी-पचड़ी-थोरन-ओलन-अवियल-कूट्टुकरी-एरिश्शेरी-कालन (ऊपर), चावल पर परिप्पु-घी → सांबर → रसम → मोरु, अंत में 2-3 पायसम; पत्ते की नोक बाएँ, केले के पत्ते पर ही; घर पर 8-10 भी सद्या है — भाव पूर्णता का।
ओणत्तप्पन/तृक्काक्करा-अप्पन क्या है?
मिट्टी की चौकोर पिरामिड-आकार मूर्तियाँ (3-5) जो पूरादम से तिरुवोणम तक पूक्कलम के बीच रखी जाती हैं — वामन/महाबलि/तृक्काक्करा-मंदिर के देव का प्रतीक; चावल-आटे के घोल से सजाते, अड़ा-फूल चढ़ाते; चतयम को विसर्जन; तृक्काक्करा (कोच्चि) वामन का मंदिर — ओणम का मूल-स्थान।
केरल के बाहर ओणम कैसे मनाएँ?
छोटा पूक्कलम (फूल/कागज़), ओणत्तप्पन (मिट्टी/पीतल), सुबह दीप-पूजा, कसवु/नए कपड़े, सद्या 8-10 व्यंजन केले के पत्ते पर (या थाली), पायसम, परिवार-भोज, ओणम-गीत/तिरुवातिरा, वीडियो पर केरल के बड़ों को प्रणाम; शहर के मलयाली-समाजम की सामूहिक सद्या में जाना — गैर-मलयाली भी सादर आमंत्रित होते हैं।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण केरल की पारंपरिक रीत व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने परिवार-इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। तिरुवोणम की तिथि सौर-मास व नक्षत्र से — मलयालम कैलेंडर/केरल-पंचांग से मिला लें।
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