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🪔 व्रत-त्योहार

🥣 शीतला सातम व रांधण छठ (गुजरात) 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

श्रावण कृष्ण षष्ठी-सप्तमी (अमांत — जन्माष्टमी से एक दिन पहले) — रांधण छठ को सारे पकवान बनाकर सातम को चूल्हा ठंडा, शीतला माता की पूजा, बासी भोजन; बालकों की रोग-रक्षा का माताओं का व्रत; गुजरात-सौराष्ट्र-कच्छ-राजस्थान (मारवाड़)।

शीतला सातम व रांधण छठ (गुजरात) 2027 की तिथि
मंगलवार, 24 अगस्त 2027
भाद्रपद · कृष्ण पक्ष · सप्तमी (विक्रम संवत 2084)
🌅 सूर्योदय5:55 AM
⭐ अभिजित मुहूर्त11:59 AM – 12:47 PM
🌇 सूर्यास्त6:52 PM
⛔ राहुकाल (टालें)03:37 PM – 05:14 PM
  • रांधण छठ (सब पकवान बनाने का दिन) — सोमवार, 23 अगस्त 2027
  • शीतला सातम (बासी भोजन — चूल्हा ठंडा) — मंगलवार, 24 अगस्त 2027
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

शीतला सातम गुजराती (अमांत) श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को होती है — कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक एक दिन पहले (उत्तर-भारतीय पूर्णिमांत गणना में भाद्रपद कृष्ण सप्तमी); उससे एक दिन पहले **रांधण छठ** (षष्ठी) — जिस दिन घर की स्त्रियाँ अगले पूरे दिन का भोजन (थेपला, ढेबरा, पूड़ी, सब्ज़ी, मीठा, बाजरे के रोटला) बनाकर रात चूल्हे को धोकर, हल्दी-कुमकुम से पूजकर ठंडा कर देती हैं। सातम को चूल्हा नहीं जलता — शीतला माता को बासी (ठंडा) भोजन अर्पित कर पूरा परिवार बासी भोजन करता है।

शीतला माता चेचक-खसरा-फोड़े-ज्वर की देवी हैं — «शीतला» = शीतल रखने वाली; माताएँ बच्चों को रोगों से बचाने के लिए यह व्रत रखती हैं, शीतला-मंदिर में ठंडा जल-दही-बासी रोटी चढ़ाती हैं, गधे (शीतला का वाहन) को चारा; कथा (नीचे) एक बहू की जो चूल्हा ठंडा करना भूल गई। उत्तर-भारत की **शीतला अष्टमी (बसौड़ा)** चैत्र में इसी भाव का पर्व — अलग पन्ना। ऊपर इस साल की रांधण छठ व शीतला सातम की तिथियाँ; नीचे विधि, दो दिन का पकवान-मेनू, कथा और इलाक़ों की रीत।

महत्व — यह व्रत क्यों

स्कंद-पुराण: शीतला देवी — गधे पर सवार, हाथ में झाड़ू-कलश-सूप-नीम, दुर्गा का रूप — रोग-नाशिनी; «शीतले त्वं जगन्माता…» स्तोत्र; उनकी पूजा ठंडे भोजन से — «आज चूल्हा न जले, देवी को शीतलता मिले»; मानसून-अंत के संक्रामक रोग-काल में एक दिन रसोई-विश्राम, बासी-ठंडे भोजन का लोक-स्वास्थ्य-विज्ञान (रांधण छठ का भोजन प्रायः लंबे रहने वाला — थेपला-सूखी सब्ज़ी-अचार)।

तिथि-नियम: गुजरात-सौराष्ट्र-कच्छ में अमांत श्रावण कृष्ण षष्ठी-सप्तमी (जन्माष्टमी से पहले) — ऊपर सूची इसी से; राजस्थान (मारवाड़-जोधपुर) में भी «शीतला सातम» इसी दिन कुछ समाज, अन्य चैत्र की बसौड़ा; मध्य प्रदेश-मालवा में «शीतला सप्तमी» श्रावण में; बंगाल-ओडिशा में शीतला-पूजा चैत्र/फाल्गुन।

स्त्री-व्रत: माताएँ संतान-रक्षा (चेचक-खसरा-ज्वर) हेतु; सातम को उपवास/बासी भोजन, शीतला-दर्शन; नवविवाहिता पहली सातम ससुराल में; रांधण छठ गुजराती रसोई का उत्सव — हर घर 10-15 व्यंजन; «सातम-आठम» (शीतला सातम + जन्माष्टमी) सौराष्ट्र का बड़ा मेला-अवकाश (द्वारका-जूनागढ़-भावनगर के लोक-मेले)।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह गुजराती घर की रांधण छठ–शीतला सातम की विधि है — छठ को पकवान व चूल्हा-पूजा, सातम को शीतला-पूजा व बासी भोजन; मारवाड़-मालवा के परिवारों के लिए भी वही।

  1. रांधण छठ (षष्ठी) — दिन-भर: सुबह स्नान, घर-रसोई की सफ़ाई; सातम (और कई घर आठम/जन्माष्टमी) के लिए सब भोजन बनाना — थेपला (मेथी/दूधी), ढेबरा (बाजरा-मेथी), पूड़ी, बाजरे के रोटला, सूखी सब्ज़ी (भरेला रींगण/भिंडी/कारेला-आलू), करी (कढ़ी न बनाएँ — कई घर), मिठाई (लापसी/शीरो/लाडू/पुरणपोळी), फरसाण (ढोकळा-खमण-मुठिया-पात्रा), अचार-छुंदो, दही जमाना, खीचड़ी नहीं (ताज़ा चाहिए); पानी भरकर रखना।
  2. रांधण छठ — रात: सब पकवान बनने के बाद चूल्हा/गैस पूरी तरह ठंडा — चूल्हे को पानी से धोना, हल्दी-कुमकुम-चावल-फूल से पूजा, दीप, चूल्हे पर ठंडे पानी का लोटा; «कल अग्नि नहीं जलेगी» का संकल्प; रसोई में शीतला माता के लिए बासी रोटी-दही-गुड़ अलग रखना; तवा-कड़ाही उल्टी रख देना (रीत)।
  3. शीतला सातम — सुबह: ठंडे पानी से स्नान (गर्म पानी नहीं — कई घर), साफ़ वस्त्र; चूल्हा नहीं जलाना, चाय भी नहीं (कठोर रीत — कुछ घर दूध-चाय बाहर से/थर्मस); शीतला माता के मंदिर/घर में चित्र की पूजा — ठंडा जल, दही, बासी रोटी-थेपला, गुड़, कुलेर (बाजरे-गुड़-घी), मीठे चावल, नीम-पत्ते, हल्दी-कुमकुम, फूल; «शीतला अष्टक/शीतला स्तोत्र»; गधे को चारा-गुड़ (शीतला-वाहन); बच्चों को माता के सामने ठंडे जल का छींटा — रोग-रक्षा।
  4. शीतला सातम — कथा: शीतला सातम की कथा (नीचे — बहू व चूल्हा) परिवार के साथ सुनना, सब स्त्रियाँ; व्रत रखने वाली माताएँ फलाहार/एक समय बासी भोजन; बच्चों को व्रत नहीं — बासी भोजन खिलाना।
  5. शीतला सातम — भोजन: पूरा परिवार दिन-भर बासी (रांधण छठ का) भोजन — थेपला-दही-अचार, रोटला-सब्ज़ी, मिठाई, फरसाण; कुछ नहीं गर्म करना (माइक्रोवेव भी नहीं — रीत); मेहमान-पड़ोसी को बासी थाली भेंट; शाम शीतला-आरती।
  6. सातम — दिन: बाज़ार-मेले (सातम-आठम मेला — सौराष्ट्र), झूले, बच्चों के खेल; कई घर तालाब/नदी-किनारे शीतला-मंदिर जाते हैं; रात 12 बजे से जन्माष्टमी (आठम) — कान्हा का जन्म, चूल्हा फिर जलता (कई घर आठम को भी सात्विक-ताज़ा)।
  7. आठम (अगले दिन — जन्माष्टमी): सुबह चूल्हा जलाकर पहले शीतला माता व फिर कृष्ण को ताज़ा भोग; बासी बचा भोजन गाय-गधे-ग़रीब को; जन्माष्टमी की रात-पूजा।
  8. उत्तर-भारतीय समकक्ष: चैत्र कृष्ण अष्टमी की बसौड़ा (शीतला अष्टमी) — सप्तमी को पकवान, अष्टमी को बासी; विधि लगभग वही — उस पन्ने पर; राजस्थान-मारवाड़ में «शीतला सातम» श्रावण-रीत भी।

पूजा-सामग्री की सूची

रांधण छठ की पूरी रसोई + चूल्हा-पूजा + शीतला माता का ठंडा भोग — दो दिन की सूची।

  • रांधण छठ की रसोई: गेहूँ-बाजरे का आटा, मेथी-दूधी (थेपला-ढेबरा), बेसन (खमण-ढोकळा-मुठिया), अरबी-पत्ते (पात्रा), सब्ज़ियाँ (बैंगन-भिंडी-कारेला-आलू), गुड़-घी (लापसी-लाडू-कुलेर), दही जमाने का दूध, अचार-छुंदो-मुरब्बा, मसाले, तेल
  • चूल्हा-पूजा: जल, हल्दी, कुमकुम, चावल, फूल, दीप, ठंडे पानी का लोटा; तवा-कड़ाही (उल्टी रखने को)
  • शीतला माता: चित्र/मूर्ति (गधे पर, झाड़ू-सूप-कलश), मंदिर-दर्शन; भोग — बासी रोटी-थेपला, दही, गुड़, कुलेर (बाजरा-गुड़-घी), मीठे चावल (ठंडे), ठंडा जल, नीम-पत्ते, हल्दी-कुमकुम, फूल (गुड़हल-गेंदा), नारियल, सूप-झाड़ू (प्रतीक — कुछ घर)
  • स्तोत्र/कथा: शीतला अष्टक (स्कंद-पुराण), शीतला सातम की कथा, आरती
  • गधे को चारा-गुड़; बच्चों के लिए ठंडा जल-छींटा, नीम
  • व्रत: फलाहार (फल-दही-दूध — बिना गर्म किए), बासी भोजन; ठंडे पानी का स्नान
  • आठम/जन्माष्टमी: ताज़ा भोग की सामग्री (अगले दिन)

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व्रत-कथा

एक गाँव में सब स्त्रियाँ रांधण छठ को पकवान बनाकर चूल्हा ठंडा करतीं, सातम को शीतला माता को बासी भोग चढ़ातीं। एक साहूकार की बहू थकान में चूल्हा ठंडा करना भूल गई — अंगारे सुलगते रह गए। रात शीतला माता गाँव में घूमने निकलीं, हर घर के ठंडे चूल्हे पर विश्राम करतीं; बहू के चूल्हे पर लेटते ही जल गईं — क्रोध में देवी ने बहू के सोए बालक को अपने साथ ले लिया (कहीं: बालक को ज्वर-चेचक)।

सुबह बहू ने बच्चा न पाया, रोती हुई शीतला माता की खोज में निकली; रास्ते में मिलीं दो स्त्रियाँ (जिन्होंने माता को ठंडी छाछ पिलाई थी — उनका दुःख दूर हुआ), एक कुम्हार (जिसके आँवा की आग माता ने शांत की); अंत में गाँव-बाहर बरगद के नीचे शीतला माता जली पीठ सेंकती मिलीं; बहू ने पहचानकर ठंडा दही-जल से माता की पीठ शीतल की, क्षमा माँगी — «अब कभी सातम को चूल्हा नहीं जलाऊँगी»; माता ने प्रसन्न होकर बालक जीवित लौटाया और वर दिया — «जो सातम को चूल्हा ठंडा रख मुझे बासी-ठंडा भोग देगा, उसके बालक रोग-मुक्त रहेंगे»।

स्कंद-पुराण की शीतला-कथा: राजा इंद्रद्युम्न की पुत्री शुभकारी ने शीतला-व्रत कर एक सर्प-दंश से मरे ब्राह्मण-परिवार को जिलाया; शीतला — जल-देवी, गधे पर, झाड़ू (रोग बुहारना), सूप (छानना), कलश (ठंडा जल), नीम (औषधि) — चेचक-खसरा की लोक-देवी जिनकी पूजा ठंडक से; गुजरात के सातम-आठम मेले (द्वारका, तरणेतर के आसपास, भावनगर) इसी की स्मृति।

रांधण छठ का पूरा मेनू — थेपला, ढेबरा, रोटला, लापसी, फरसाण; सातम को सब ठंडा

रांधण छठ गुजराती रसोई का त्योहार — 10-15 व्यंजन जो अगले दिन ठंडे भी स्वादिष्ट रहें (तेल-मसाले-सूखी सब्ज़ी-अचार); सातम को कुछ गर्म नहीं — दही-अचार-छुंदो के साथ थेपला-रोटला; शीतला माता को कुलेर व बासी रोटी-दही; बासी भोजन पेट के लिए हल्का माना गया (किण्वन)। नीचे सूची।

  • रोटी-वर्ग: मेथी-थेपला, दूधी-थेपला, ढेबरा (बाजरा-मेथी-गुड़), बाजरे-जुवार के रोटला, पूड़ी (मसाला), भाखरी — सातम को दही-अचार से
  • सब्ज़ी (सूखी/तेल वाली — ठंडी अच्छी): भरेला रींगण-बटाका (भरवाँ बैंगन-आलू), भिंडी-संभारो, कारेला (करेला) का शाक, तुवेर-ढोकळी (कुछ), आलू-सूखा, सांभारो (पत्तागोभी-गाजर-मिर्च का ताज़ा-सा अचार)
  • फरसाण: खमण-ढोकळा, मुठिया, पात्रा (अरबी-पत्ते), खांडवी, चकरी-गाँठिया-सेव, दाल-वड़ा, भजिया (छठ को)
  • मिठाई: लापसी (टूटे गेहूँ-गुड़-घी), शीरो, बूंदी/मोतीचूर के लाडू, पुरणपोळी, घारी (सूरत), मोहनथाल, खीर (ठंडी), कुलेर (बाजरे का आटा-घी-गुड़ — शीतला माता का विशेष भोग), श्रीखंड (छठ को जमाकर)
  • अचार-चटनी-दही: छुंदो (आम का मीठा अचार), गुंदा-केरी, मेथिया, हरी चटनी, दही (छठ की रात जमाया), छाछ (मथ सकते हैं — बिना आग)
  • शीतला-भोग: कुलेर, बासी रोटी/थेपला, दही, गुड़, मीठे चावल, ठंडा जल, नीम; आठम को ताज़ा — पंजरी-माखन (कृष्ण)

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

सौराष्ट्र का सातम-आठम मेला, अहमदाबाद के थेपले, कच्छ की शीतला, मारवाड़ की सातम, मालवा की सप्तमी — चूल्हा ठंडा, मन शीतल।

मध्य-उत्तर गुजरात (अहमदाबाद-बड़ौदा-सूरत-मेहसाणा): रांधण छठ को हर घर की रसोई त्योहार — थेपला-ढेबरा-लापसी-फरसाण; सातम को शीतला माता के मंदिर (अहमदाबाद — कालूपुर/शीतला-मंदिर), बासी भोजन, बच्चों को ठंडा जल; सूरत में घारी-लोचो (छठ को), सातम-आठम की छुट्टी; बड़ौदा-मेहसाणा में शीतला माता के लोक-मेले, गधे को गुड़-चारा; आठम को कान्हा का जन्म।
सौराष्ट्र-कच्छ (राजकोट-जामनगर-भावनगर-जूनागढ़-भुज): «सातम-आठम» सौराष्ट्र का सबसे बड़ा लोक-मेला-अवकाश — जामनगर-राजकोट-भावनगर-पोरबंदर-द्वारका के मेले (झूले, लोक-नृत्य, दुकानें), शीतला माता के मंदिर (रांधण छठ के पकवान लेकर), कुलेर-रोटला-गुंदा-केरी; कच्छ में शीतला सातम पर «शीतला-आठम-मेला», बाजरे के रोटला-छाछ; गिर-जूनागढ़ में लोक-मेले; कारीगर-किसान-व्यापारी सब बंद — तीन दिन (छठ-सातम-आठम) का उत्सव।
राजस्थान-मारवाड़ (जोधपुर-बीकानेर-जैसलमेर) व मध्य प्रदेश-मालवा: मारवाड़ में «शीतला सातम» — जोधपुर के कई समाज श्रावण कृष्ण सप्तमी को बासी भोजन व शीतला-पूजा (गुजरात-प्रभाव), अधिकांश राजस्थान चैत्र की शीतला अष्टमी (बसौड़ा) मुख्य; बीकानेर-जैसलमेर में शीतला-मंदिर, गधे को चारा; मप्र-मालवा (इंदौर-उज्जैन) में «शीतला सप्तमी» श्रावण में कुछ परिवार, चैत्र-बसौड़ा अधिक; गुजराती-मारवाड़ी प्रवासी (मुंबई-कोलकाता-चेन्नई) घर-रीत से।
महाराष्ट्र-गोवा (गुजराती-मारवाड़ी समाज व स्थानीय): मुंबई-पुणे-नासिक के गुजराती-कच्छी परिवार रांधण छठ-सातम पूरी रीत से (थेपला-ढेबरा, शीतला-मंदिर — मुंबई के भुलेश्वर/मालाड); महाराष्ट्रीय समाज में शीतला-पूजा «शीतला सप्तमी» आषाढ़-श्रावण में कुछ जगह, चैत्र-अष्टमी अधिक; गोवा-कोंकण में शीतला (सांतेरी/शीतला देवी) मंदिर, नारळ-भोग।
उत्तर प्रदेश-बिहार-दिल्ली-हरियाणा (बसौड़ा-समकक्ष): यहाँ मुख्य पर्व चैत्र कृष्ण अष्टमी की शीतला अष्टमी/बसौड़ा — सप्तमी को पकवान (पूड़ी-मीठे चावल-बाजरा), अष्टमी को बासी भोजन, शीतला-मंदिर (गुड़गाँव-शीतला माता, कानपुर, आगरा); श्रावण की सातम गुजराती-मारवाड़ी प्रवासियों में; बिहार-बंगाल में शीतला-पूजा फाल्गुन-चैत्र (बंगाल में «शीतला पूजो» — बासी-पांता)।
दक्षिण भारत (समकक्ष देवियाँ): तमिलनाडु-कर्नाटक-आंध्र में शीतला के समकक्ष मारियम्मन/पोलेरम्मा/एल्लम्मा — आडि (श्रावण) मास में «आडि पूरम/कूल-अर्पण» (ठंडा दलिया-कूळ, नीम-पत्ते, छाछ — रोग-देवी को शीतलता), आंध्र में «पोलेरम्मा जातरा», कर्नाटक में «मारिकांबा»; भाव वही — गर्मी-मानसून के रोगों की देवी को ठंडा भोजन; गुजराती प्रवासी (बेंगलुरु-चेन्नई) सातम-आठम घर पर।
🙏 आपके घर की रीत इससे अलग है? यहाँ लिखिए

दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • रांधण छठ को सब भोजन बनाकर रात चूल्हा धोकर पूजें, ठंडा; सातम को आग नहीं
  • शीतला माता को ठंडा जल-दही-बासी रोटी-कुलेर-नीम; गधे को चारा-गुड़; बच्चों को ठंडा छींटा
  • बासी भोजन ठंडा-साफ़ रखें (ढककर, हवादार) — थेपला-सूखी सब्ज़ी-अचार टिकाऊ; कथा सुनें
  • आठम को पहले शीतला फिर कृष्ण को ताज़ा भोग; बचा बासी गाय-ग़रीब को
  • बीमार/गर्भवती/शिशु: बासी की जगह फल-दूध-दही (बिना गर्म किए) — स्वास्थ्य पहले

❌ क्या न करें

  • सातम को चूल्हा-गैस-माइक्रोवेव जलाना, गर्म पानी, चाय बनाना (रीत — शीतला को अग्नि से कष्ट)
  • रांधण छठ का भोजन गर्मी-नमी में बिगड़ने देना — दूध-वाली/खिचड़ी-भात जैसी चीज़ें (जल्दी ख़राब) न रखें; फ्रिज का उपयोग रीत-अनुसार
  • शीतला माता को गर्म/ताज़ा-पका भोग, लाल-मिर्च-तेज़ मसाले; नीम-वृक्ष को नुक़सान
  • बच्चों को जबरन बासी खिलाना बीमार होने पर; गधे को सताना
  • सातम को सिलाई-कैंची-बाल-नाख़ून (लोक-नियम); कलह

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शीतला सातम और रांधण छठ 2027 में कब हैं?

ऊपर इस साल की दोनों तिथियाँ हैं — रांधण छठ (श्रावण कृष्ण षष्ठी, अमांत) और शीतला सातम (सप्तमी), जन्माष्टमी (आठम) से ठीक पहले; उत्तर-भारतीय पूर्णिमांत पंचांग में यह भाद्रपद कृष्ण षष्ठी-सप्तमी है — तिथि वही; गुजराती पंचांग से मिला लें।

शीतला सातम और शीतला अष्टमी (बसौड़ा) में अंतर?

दोनों शीतला माता के बासी-भोजन पर्व — शीतला सातम गुजरात-सौराष्ट्र-कच्छ की, श्रावण (अमांत) कृष्ण सप्तमी को, जन्माष्टमी से पहले (मानसून-अंत); शीतला अष्टमी/बसौड़ा उत्तर-भारत-राजस्थान-मप्र की, चैत्र कृष्ण अष्टमी को, होली के आठ दिन बाद (वसंत-अंत); विधि एक — पहले दिन पकाना, अगले दिन चूल्हा ठंडा व बासी।

सातम को चाय-दूध भी नहीं?

कठोर रीत में आग बिल्कुल नहीं — चाय भी नहीं; व्यावहारिक घर छठ की रात थर्मस में चाय/दूध रख लेते हैं या ठंडा दूध-छाछ लेते हैं; शिशु-बीमार-बुज़ुर्ग के लिए गर्म चीज़ बनाना दोष नहीं (स्वास्थ्य सर्वोपरि — देवी माँ हैं); माइक्रोवेव को भी «आग» मानते हैं।

बासी भोजन सुरक्षित कैसे रखें?

रांधण छठ को कम नमी वाले, तेल-मसाले वाले व्यंजन (थेपला-ढेबरा-सूखी सब्ज़ी-अचार-लाडू-फरसाण) बनाएँ; दूध-पनीर-खिचड़ी-भात-कढ़ी (जल्दी बिगड़ते) न रखें; ढककर हवादार-ठंडी जगह/फ्रिज (रीत-अनुसार); दही छठ की रात जमाएँ; सुबह सूँघकर देखें — खट्टा-बदबू हो तो न खाएँ, फल-दूध लें।

शीतला माता को कुलेर क्यों?

कुलेर = बाजरे के आटे में घी-गुड़ का सूखा मिश्रण — बिना आग के बनने वाला, ठंडा, टिकाऊ — गुजरात-राजस्थान का शीतला-भोग (नाग पंचमी पर भी); बासी रोटी-दही-गुड़-मीठे चावल-ठंडा जल-नीम भी; देवी को «शीतलता» प्रिय, गर्म-ताज़ा-मसालेदार वर्जित।

सातम-आठम मेला क्या है?

सौराष्ट्र-कच्छ में शीतला सातम + जन्माष्टमी (आठम) के दो-तीन दिन का लोक-मेला व अवकाश — जामनगर, राजकोट, भावनगर, पोरबंदर, द्वारका, भुज में झूले-दुकानें-लोक-नृत्य-रास; किसान-व्यापारी-कारीगर सब छुट्टी; रांधण छठ के पकवान लेकर मेले में; गुजरात के सबसे बड़े ग्रामीण मेलों में।

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⚠️ यह विवरण गुजरात-सौराष्ट्र-कच्छ की पारंपरिक रीत व लोक-कथा पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। बासी भोजन स्वास्थ्य देखकर — शिशु, गर्भवती, रोगी व गर्मी-नमी में ताज़ा भोजन दोष नहीं; तिथि गुजराती (अमांत) पंचांग से मिला लें।

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